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अलीगढ़ः गम और गुस्सा... बमुश्किल 19 घंटे बाद भरा गया पंचनामा
Sun, 05 Dec 2021 01:35 AM IST
राजेश सिंह
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: राजेश सिंह
Updated Sun, 05 Dec 2021 01:35 AM IST
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पूर्व ब्लॉक प्रमुख रेनू शर्मा की मौत के बाद मोर्चरी पर धरना प्रदर्शन करते लाेग।
- फोटो : neeraj
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जहरीली शराब कांड में पति-बेटे व परिवार के छह सदस्यों संग जेल में निरुद्ध जवां की पूर्व ब्लॉक प्रमुख रेनू शर्मा की शुक्रवार रात में हुई मौत की खबर ने सभी को हिलाकर रख दिया। हालांकि वे लंबे समय से बीमार थीं और कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित थीं। इलाज में लापरवाही की खबर ने मौत के गम में गुस्से का काम किया। शायद यही सुनकर लोगों की संवेदनाएं जुड़ीं।
सुबह से ही कस्बा जवां में उनके घर और पोस्टमार्टम गृह पर लोगों का जुटना शुरू हो गया। इस बीच परिवार व समर्थकों की ऋषि व अन्य परिजनों की पैरोल बिना पंचनामा पर हस्ताक्षर न करने की जिद ने पुलिस प्रशासन के साथ-साथ सत्ता पक्ष के उन नेताओं के हाथ पांव फुला दिए, जो उनके समर्थन में खड़े थे। किसी तरह बात बनी और मौत के बाद शुरू हुए घटनाक्रम के 19 घंटे बाद परिवार पोस्टमार्टम कराने को तैयार हुआ, तब जाकर पंचनामा पर हस्ताक्षर हुए और शव का पोस्टमार्टम पांच डॉक्टरों के पैनल से कराया गया। देर रात शव जवां पहुंच गया था, जहां अंतिम संस्कार की तैयारियां जारी थीं।
रात से कमान संभाले थे बरौली के भाजपा नेता
रात जैसे ही रेनू की मौत और परिवार के गुस्से की खबर मिली तो सबसे पहले बरौली विधायक ठा. दलवीर सिंह अपने नाती विजय सिंह पप्पू व क्षेत्र के ही नेता भाजपा जिला महामंत्री शिवनारायण शर्मा मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां परिवार से वार्ता के बाद शासन स्तर पर जेल के अधिकारियों से वार्ता की गई और दोनों नेता प्रकरण समझने कारागार भी पहुंचे। इसके बाद परिवार को इस बात के लिए समझाया गया कि शव को पोस्टमार्टम केंद्र पहुंचाया जाए। मगर परिवार रात में ही इस जिद पर था कि जब तक रेनू के पति ऋषि, बेटे कुनाल आदि की पैरोल नहीं होगी, तब तक वे शव को यहां से नहीं ले जाएंगे। इसे लेकर जब जद्दोजहद शुरू हुई तो कानूनी राय के आधार पर सहमति बनी कि पैरोल न्यायालय स्तर से दी जाएगी। इसलिए शव को यहां से पोस्टमार्टम गृह भेज दिया जाए। बेशक पोस्टमार्टम पैरोल होने के बाद ही कराया जाए। इस सहमति के बाद सुबह शव मेडिकल से पोस्टमार्टम गृह लाया गया।
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सुबह से इस तरह हुई दिन भर सियासी खींचतान
सुबह होते ही यहां बरौली विधायक ठा.दलवीर सिंह, बसपा के प्रत्याशी नरेंद्र शर्मा, बुलंदशहर की शिकारपुर सीट से दावेदारी कर रहे सपा नेता पूर्व विधायक गुड्डू पंडित, पूर्व सांसद चौ.बिजेंद्र सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष रतन दीप सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू, भाजपा जिला महामंत्री शिवनारायण शर्मा, जिला उपाध्यक्ष गौरव शर्मा, सपा पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इशहाक, सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव, मनोज यादव, काशिफ आब्दी, रंजीत चौधरी, संजय शर्मा, आमिर आबिद, भाजपा नेता अजय सिंह व विजय सिंह पप्पू, ठा.सुबोध सिंह, पूर्व विधायक प्रमोद गौड़, युवा भाजपा नेता नरेंद्र पचौरी, कांग्रेस नेता ब्रजेश शर्मा आदि पहुंच गए। इनमें विपक्ष के नेता तो परिवार की मांग के समर्थन में ऋषि के बेटे को लेकर फर्श बिछाकर धरने पर बैठ गए और पुलिस प्रशासनिक विरोधी नारेबाजी करने लगे। वहीं भाजपा के नेता परिवार को समझाने और पैरोल आदि की प्रक्रिया को पूरा कराने में लग गए।
सांसद के पहुंचने पर महिलाओं का गुस्सा फूटा
दोपहर में सांसद सतीश गौतम जब पहुंचे तो महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। महिलाओं का कहना था कि महिला बीमार थी। बावजूद उसे जहरीली शराब के झूठे मुकदमे में जेल भेज दिया गया। उस समय भाजपा के नेता कहां थे। अब क्यों आए हैं यहां। आने वाले समय में वोट लेने आएंगे, तब इसका जवाब दिया जाएगा। इस दौरान सांसद ने उन्हें समझाने का प्रयास किया तो हूटिंग करते हुए अभद्र टिप्पणी करते हुए सांसद, विधायक व भाजपा विरोधी नारेबाजी कर दी। इसके चलते सांसद अधिकारियों से वार्ता कर चले गए। उनके साथ भाजपा नेता चंद्रमणि कौशिक, मनोज गौतम आदि थे।
सपा-बसपा नेताओं में भी होती रही खींचतान
इस दौरान धरनास्थल पर सपा व बसपा नेताओं में भी खींचतान होती रही। इसके पीछे की वजह परिवार पर अपनी अपनी तरह से बात मनवाने का प्रयास था। इसे लेकर कई बार दोनों दलों के नेताओं में भृकुटि तनने की स्थिति बनी। इस दौरान पुलिस अधिकारियों से वार्ता के दौर में भी दोनों दलों के नेताओं के अपने तर्क थे। उस दौरान भी कई बार बहस हुई।
पैरोल अर्जी खारिज होने पर भाजपा नेता फिर सक्रिय
दोपहर में विपक्षी नेताओं के अपने-अपने दखल के चलते और परिवार की महिलाओं के विरोधी नारेबाजी के चलते भाजपा नेता यहां से चले गए थे। मगर दोपहर में जब खबर मिली कि न्यायालय से परिवार के सभी छह सदस्यों की पैरोल अर्जी खारिज कर दी गई है तो भाजपा नेताओं ने एक बार फिर प्रयास शुरू किया। इस बाद भाजपा नेता शिवनारायण शर्मा, गौरव शर्मा ने ऋषि शर्मा के बेटे विनय को जेल पर बुलाया। जहां वे उसे लेकर ऋषि से मिलने गए। इस दौरान गुड्डू पंडित भी वहां पहुंचे। इस दौरान ऋषि से कई घंटे की वार्ता हुई। किसी तरह समझाकर तय किया कि बिना पैरोल के पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाए। तब जाकर यह तय हुआ।
वीडियो कॉल कर ऋषि को दिखाया पत्नी का चेहरा
पोस्टमार्टम केंद्र पर शाम को पंचनामा की प्रक्रिया के बाद जेल से ऋषि को वीडियो कॉल के जरिये पत्नी का चेहरा दिखाया गया। इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हुई।
पंचनामा भरने के बाद भी विफरे विपक्ष के नेता
सुबह से धरना दिए बैठे विपक्ष के नेता रात में धरना जारी रखने की तैयारी में थे। उनकी जिद थी कि पैरोल होने के बाद ही पंचनामा भरा जाएगा। मगर शाम को जब यह प्रक्रिया शुरू हो गई तो विपक्ष के नेता बिफरने लगे। इनका तर्क था कि हम सुबह से यहां जमा हैं, हमें बिना बताए यह कैसे तय हो गया। मगर पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों का रुख व परिवार की सहमति पर उनकी एक न चली। इसके बाद पोस्टमार्टम कराने के बाद रात 9 बजे शव यहां से कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच जवां ले जाया गया।
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सुबह से ही कस्बा जवां में उनके घर और पोस्टमार्टम गृह पर लोगों का जुटना शुरू हो गया। इस बीच परिवार व समर्थकों की ऋषि व अन्य परिजनों की पैरोल बिना पंचनामा पर हस्ताक्षर न करने की जिद ने पुलिस प्रशासन के साथ-साथ सत्ता पक्ष के उन नेताओं के हाथ पांव फुला दिए, जो उनके समर्थन में खड़े थे। किसी तरह बात बनी और मौत के बाद शुरू हुए घटनाक्रम के 19 घंटे बाद परिवार पोस्टमार्टम कराने को तैयार हुआ, तब जाकर पंचनामा पर हस्ताक्षर हुए और शव का पोस्टमार्टम पांच डॉक्टरों के पैनल से कराया गया। देर रात शव जवां पहुंच गया था, जहां अंतिम संस्कार की तैयारियां जारी थीं।
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रात से कमान संभाले थे बरौली के भाजपा नेता
रात जैसे ही रेनू की मौत और परिवार के गुस्से की खबर मिली तो सबसे पहले बरौली विधायक ठा. दलवीर सिंह अपने नाती विजय सिंह पप्पू व क्षेत्र के ही नेता भाजपा जिला महामंत्री शिवनारायण शर्मा मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां परिवार से वार्ता के बाद शासन स्तर पर जेल के अधिकारियों से वार्ता की गई और दोनों नेता प्रकरण समझने कारागार भी पहुंचे। इसके बाद परिवार को इस बात के लिए समझाया गया कि शव को पोस्टमार्टम केंद्र पहुंचाया जाए। मगर परिवार रात में ही इस जिद पर था कि जब तक रेनू के पति ऋषि, बेटे कुनाल आदि की पैरोल नहीं होगी, तब तक वे शव को यहां से नहीं ले जाएंगे। इसे लेकर जब जद्दोजहद शुरू हुई तो कानूनी राय के आधार पर सहमति बनी कि पैरोल न्यायालय स्तर से दी जाएगी। इसलिए शव को यहां से पोस्टमार्टम गृह भेज दिया जाए। बेशक पोस्टमार्टम पैरोल होने के बाद ही कराया जाए। इस सहमति के बाद सुबह शव मेडिकल से पोस्टमार्टम गृह लाया गया।
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सुबह से इस तरह हुई दिन भर सियासी खींचतान
सुबह होते ही यहां बरौली विधायक ठा.दलवीर सिंह, बसपा के प्रत्याशी नरेंद्र शर्मा, बुलंदशहर की शिकारपुर सीट से दावेदारी कर रहे सपा नेता पूर्व विधायक गुड्डू पंडित, पूर्व सांसद चौ.बिजेंद्र सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष रतन दीप सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू, भाजपा जिला महामंत्री शिवनारायण शर्मा, जिला उपाध्यक्ष गौरव शर्मा, सपा पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इशहाक, सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव, मनोज यादव, काशिफ आब्दी, रंजीत चौधरी, संजय शर्मा, आमिर आबिद, भाजपा नेता अजय सिंह व विजय सिंह पप्पू, ठा.सुबोध सिंह, पूर्व विधायक प्रमोद गौड़, युवा भाजपा नेता नरेंद्र पचौरी, कांग्रेस नेता ब्रजेश शर्मा आदि पहुंच गए। इनमें विपक्ष के नेता तो परिवार की मांग के समर्थन में ऋषि के बेटे को लेकर फर्श बिछाकर धरने पर बैठ गए और पुलिस प्रशासनिक विरोधी नारेबाजी करने लगे। वहीं भाजपा के नेता परिवार को समझाने और पैरोल आदि की प्रक्रिया को पूरा कराने में लग गए।
सांसद के पहुंचने पर महिलाओं का गुस्सा फूटा
दोपहर में सांसद सतीश गौतम जब पहुंचे तो महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। महिलाओं का कहना था कि महिला बीमार थी। बावजूद उसे जहरीली शराब के झूठे मुकदमे में जेल भेज दिया गया। उस समय भाजपा के नेता कहां थे। अब क्यों आए हैं यहां। आने वाले समय में वोट लेने आएंगे, तब इसका जवाब दिया जाएगा। इस दौरान सांसद ने उन्हें समझाने का प्रयास किया तो हूटिंग करते हुए अभद्र टिप्पणी करते हुए सांसद, विधायक व भाजपा विरोधी नारेबाजी कर दी। इसके चलते सांसद अधिकारियों से वार्ता कर चले गए। उनके साथ भाजपा नेता चंद्रमणि कौशिक, मनोज गौतम आदि थे।
सपा-बसपा नेताओं में भी होती रही खींचतान
इस दौरान धरनास्थल पर सपा व बसपा नेताओं में भी खींचतान होती रही। इसके पीछे की वजह परिवार पर अपनी अपनी तरह से बात मनवाने का प्रयास था। इसे लेकर कई बार दोनों दलों के नेताओं में भृकुटि तनने की स्थिति बनी। इस दौरान पुलिस अधिकारियों से वार्ता के दौर में भी दोनों दलों के नेताओं के अपने तर्क थे। उस दौरान भी कई बार बहस हुई।
पैरोल अर्जी खारिज होने पर भाजपा नेता फिर सक्रिय
दोपहर में विपक्षी नेताओं के अपने-अपने दखल के चलते और परिवार की महिलाओं के विरोधी नारेबाजी के चलते भाजपा नेता यहां से चले गए थे। मगर दोपहर में जब खबर मिली कि न्यायालय से परिवार के सभी छह सदस्यों की पैरोल अर्जी खारिज कर दी गई है तो भाजपा नेताओं ने एक बार फिर प्रयास शुरू किया। इस बाद भाजपा नेता शिवनारायण शर्मा, गौरव शर्मा ने ऋषि शर्मा के बेटे विनय को जेल पर बुलाया। जहां वे उसे लेकर ऋषि से मिलने गए। इस दौरान गुड्डू पंडित भी वहां पहुंचे। इस दौरान ऋषि से कई घंटे की वार्ता हुई। किसी तरह समझाकर तय किया कि बिना पैरोल के पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाए। तब जाकर यह तय हुआ।
वीडियो कॉल कर ऋषि को दिखाया पत्नी का चेहरा
पोस्टमार्टम केंद्र पर शाम को पंचनामा की प्रक्रिया के बाद जेल से ऋषि को वीडियो कॉल के जरिये पत्नी का चेहरा दिखाया गया। इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हुई।
पंचनामा भरने के बाद भी विफरे विपक्ष के नेता
सुबह से धरना दिए बैठे विपक्ष के नेता रात में धरना जारी रखने की तैयारी में थे। उनकी जिद थी कि पैरोल होने के बाद ही पंचनामा भरा जाएगा। मगर शाम को जब यह प्रक्रिया शुरू हो गई तो विपक्ष के नेता बिफरने लगे। इनका तर्क था कि हम सुबह से यहां जमा हैं, हमें बिना बताए यह कैसे तय हो गया। मगर पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों का रुख व परिवार की सहमति पर उनकी एक न चली। इसके बाद पोस्टमार्टम कराने के बाद रात 9 बजे शव यहां से कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच जवां ले जाया गया।