फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Mannan Wani was associated with terrorists through Net Kalinga

नेट कालिंग के जरिये आतंकियों से जुड़ा था मन्नान वानी

Thu, 08 Feb 2018 01:39 AM IST
क्राइम न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
क्राइम न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़ Updated Thu, 08 Feb 2018 01:39 AM IST
विज्ञापन
Mannan Wani was associated with terrorists through Net Kalinga
mannan vani
आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के पूर्व कश्मीरी छात्र मन्नान वानी ने आतंकी राह पकड़ने से पहले अपने खिलाफ सारे सबूत और निशान खत्म कर दिए हैं। मन्नान वानी के बारे में जांच कर रही खुफिया एजेंसियों व यूपी और जम्मू-कश्मीर पुलिस को जांच में यह पता लगा है कि वह आतंकी संगठन से फोन के माध्यम से बात ही नहीं करता था। वह नेट कालिंग के माध्यम से उनके संपर्क में था।
विज्ञापन


यही वजह है कि उसके नंबरों से मोबाइल या कॉल डिटेल का कोई भी संदिग्ध रिकार्ड नहीं मिला है। इस तथ्य के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की मुश्किल और भी बढ़ गई है। अब मन्नान के वर्तमान और अतीत के बीच का धागा केवल उसके राजदारों के माध्यम से ही जुड़ा हुआ है, जिनका अभी भी स्पष्ट रूप से पता नहीं लग पा रहा है। यह बात भी साफ हुई है कि वह पिछले दो साल से आतंकियों के संपर्क में था।
विज्ञापन


कश्मीर के रहने वाले एएमयू के पूर्व छात्र मन्नान वानी के विषय में चार जनवरी को पता लगा कि वह आतंकी संगठन से जुड़ गया है। फेसबुक पर हाथ में एके 56 रायफल लिए एक तस्वीर वायरल हुई। इसके बाद हिजबुल मुजाहिदीन के प्रवक्ता ने भी मन्नान के संगठन में शामिल होने की पुष्टि करते हुए बयान जारी किया। मन्नान के आतंकी कनेक्शन जाहिर होने के बाद प्रदेश और केंद्र की सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने अलीगढ़ में डेरा डाल दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


मन्नान के कमरे से मिले हर फोन नंबर, उसके नंबर और उससे जुड़े नाम के संबंध में जांच की गई। उस समय एएमयू में शीतकालीन अवकाश था। अब अवकाश खत्म होने के बाद विद्यार्थी भी वापस कैंपस में आ गए हैं। लेकिन तमाम नंबर खंगालने और साथी छात्रों से पूछताछ करने के बाद भी पुलिस को मन्नान का वह राजदार नहीं मिला है जो उसके अतीत और वर्तमान के बीच की कड़ी को जोड़ सके। 

सुरक्षा एजेंसियों ने उसके  मित्रों, रिश्तेदारों, परिचितों आदि सभी से जानकारी करी, लेकिन कोई ठोस नतीजा निकलकर नहीं आया। इस बीच जांच एजेंसियों को यह तो जाहिर ही हो चुका है कि उसके ट्विटर एकाउंट पर सिर्फ तीन भारतीय जुड़े हुए थे। एक जयराम रमेश, उमर अब्दुल्ला और सांसद असदुद्दीन ओवैसी। पाकिस्तान के तमाम क्रिकेटर और शख्सियतें उसके ट्विटर एकाउंट से जुड़ी हुई थीं।


एक बार मन्नान ने धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की शादी की भी एनआईए से जांच कराए जाने की मांग की थी। इसके आधार पर यह साफ हुआ है कि वह देश विरोधी ताकतों से इंटरनेट कालिंग के जरिये ही जुड़ा और उसी कॉलिंग के माध्यम से मोटीवेट होकर आतंकी संगठन तक पहुंचा। अब एजेंसियां इंटरनेट कॉलर्स के माध्यम से उसके राजदारों तक पहुंचने की कोशिश में हैं। मगर समस्या यह भी है कि वह लगभग दो साल से इनके संपर्क में था। इसलिए सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या वह दो साल का रिकार्ड जुटा पाएंगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed