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फर्जी आईएएस गिरफ्तार ठग चुका है लाखों रुपये

Thu, 15 Mar 2018 02:18 AM IST
क्राइम न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
क्राइम न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़ Updated Thu, 15 Mar 2018 02:18 AM IST
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Fake IAS arrested
फर्जी आईएएस बनकर ठगी करने का आरोपी योगेंद्र (पीछे लाल रंग की टीशर्ट में) - फोटो : अमर उजाला
खुद को आईएएस अधिकारी बताकर काम करवाने का भरोसा देकर लोगों से लाखों रुपये ऐंठने वाले शातिर ठग योगेंद्र को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। लखनऊ का रहने वाला यह ठग नीली बत्ती लगी अंबेसडर कार का इस्तेमाल कर लोगों पर रौब गांठता था। वह काफी समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था। इस ठग पर अलीगढ़ पुलिस ने ढाई हजार रुपये का ईनाम घोषित कर रखा था।
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पुलिस अधीक्षक ग्रामीण यशवीर सिंह और सीओ पंकज कुमार श्रीवास्तव ने पुलिस लाइन स्थित सभागार में पत्रकारों को बताया कि थाना बन्ना देवी पुलिस को सूचना मिली कि लाखों रुपये की ठगी करने का आरोपी अलीगढ़ आ रहा है। इस पर थाना प्रभारी ने टीम रवाना कर कर आरोपी योेगेंद्र पुत्र राजबहादुर निवासी विपुल खंड, गोमती नगर, लखनऊ को गिरफ्तार कर लिया। योगेंद्र मूल रूप से औरैया जिले के गांव मुड़ी पन्ना का रहने वाला है।
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उन्होंने बताया कि योगेंद्र खुद को आईएएस अधिकारी बता कर लोगों को अपनी बातों में फंसाता था। साथ ही उच्चाधिकारियों का नाम लेकर कहता कि उनसे कहकर तुम्हारा काम करा दूंगा। इसकी एवज में लोगों से मोटी रकम ऐंठकर फरार हो जाता था। रुतबा दिखाने के लिए योगेंद्र नोएडा अथॉरिटी से नीलामी में खरीदी गई अंबेसडर कार (यूपी 16 यू 6484) पर नीली बत्ती का इस्तेमाल करता था। वह अपने साथ एक फर्जी अर्दली भी रखता था।
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अदालत से उसके खिलाफ कुर्की वारंट जारी हुए, लेकिन उसका कहीं पता नहीं लग पा रहा था। अलीगढ़ एसएसपी ने उस पर ढाई हजार रुपये ईनाम घोषित कर दिया था। गिरफ्तार करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक बन्ना देवी जितेंद्र सिंह दीक्षित, उप निरीक्षक राम प्रकाश गौतम, सर्विलांस सेल के महेंद्र प्रताप सिंह, सिपाही समीर यादव, अजीत सिंह यादव शामिल थे।

सर्विलांस से पता चली लोकेशन 
आईएएस अधिकारी बनकर ठगी करने वाले योगेंद्र सिंह को उसके मोबाइल नंबर ने पुलिस तक पहुंचा दिया। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह अपना ठिकाना बदल देता था। लोगों की नजर में विश्वसनीय बने रहने के लिए योगेंद्र सिंह अपना मोबाइल नंबर नहीं बदलता था। वह आई फोन इस्तेमाल करता था। इस पर उसका फोन सर्विलांस पर लिया गया और उसकी लोकेशन ट्रेस की जाती रही। फोन के साथ लोकेशन मिलने से पुलिस का काम आसान हो गया और योगेंद्र गिरफ्तार हो गया।


इन कामों को कराने का देता था भरोसा
जमीन पर कब्जा दिलवाने, नौकरी लगवाने, फैक्ट्री के लिए लोन दिलवाने, सरकारी प्रोजेक्ट दिलवाने, एनजीओे को पैसा उपलब्ध कराने, सरकारी योजनाओं में भूखंड आवंटित कराने, मेडिकल कॉलेज, डिग्री कॉलेज खुलवाने आदि का भरोसा दिलाकर रुपये ऐंठता था।
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