झूठी शान के लिए हुई रूपाली-हिमांशु की हत्या
एसएसपी अजय साहनी की रविवार को दिन भर थाने पर मौजूदगी के बाद पुलिस ने यह खुलासा कर दिया है। इस केस के खुलासे के लिए दो दिन से एसपी क्राइम के निर्देशन में पुलिस व फॉरेंसिक टीम जुटी हुई थी। जिसके खुलासे में पुलिस ने रविवार को रूपाली के चाचा योगेश वर्मा उर्फ भोला और पिता मुकेश वर्मा को गिरफ्तार कर सफलता हासिल कर ली है। एसएसपी ने इस मामले की जांच में लापरवाही बरतने वाले हल्का इंचार्ज दरोगा व बीट सिपाही के खिलाफ निलंबन के लिए रिपोर्ट तलब की है।
नगर के मोहल्ला ब्रह्मनपुरी निवासी प्रियनाथ वर्मा का बेटे हिमांशु वर्मा के अपने पड़ोस में रहने वाली रूपाली वर्मा पुत्री मुकेश वर्मा से प्रेम संबंध थे। रूपाली के परिजनों को इस बात का पता चला तो दोनों परिवारों में झगड़ा हुआ और रूपाली के परिजन अपने पैतृक गांव जिरौली डोर चले गए, लेकिन हिमांशु का रूपाली से मिलना जुलना जारी रहा। 12 सितंबर की शाम को रूपाली ने फोन करके हिमांशु को गांव में बुला लिया और दोनों एक ही बाइक से घर से निकल रहे थे। तभी रूपाली के घर वालों ने पीछा किया और दोनों को हरदोई के पास से घायल अवस्था में गाड़ी डालकर थाने ले गए और पुलिस को हादसे की जानकारी दी। पुलिस ने दोनों प्रेमी युगल को आनन-फानन अस्पताल भिजवा दिया। जहां दोनों को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था। प्रियनाथ वर्मा का आरोप है कि रूपाली के चाचा योगेश वर्मा उर्फ भोला, पिता मुकेश वर्मा व मां रेनू वर्मा दोनों के प्रेम संबंधों का विरोध करते थे। वह लोग शादी का रिश्ता लेकर भी इनके पास गए थे, मगर उन्होंने रिश्ता ठुकराते हुए धमकी दी थी कि यदि दोनों का मिलना-जुलना ओर फोन पर बात करना बंद नहीं हुआ तो जान से मार देंगे।
िहमांशु के 22 और रूपाली की 18 चोटों से ठनका माथा, तब खुला केस
पालीमुुकीमपुर पुलिस इस घटना को हादसा मान रही थी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद भी इस घटना को हादसे में दर्ज किया। पालीमुुकीमपुर पुलिस की जांच से परिजन संतुष्ट नहीं हुए, क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हिमांशु के 22 और रूपाली के 18 चोटें आई थीं। कुछ चोटें तो ऐसी थीं, जो मौत होने के बाद की हैं। हिमांशु के परिजन एसएसपी के पास पहुंचे। एसएसपी ने एसपी क्राइम आशुतोष द्विवेदी के नेतृत्व में सीओ प्रशांत सिंह और कोतवाल अतरौली प्रवेश राणा को जांच के आदेश दिए थे। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल पर जाकर पड़ताल की तो वहां कुछ साक्ष्य और गवाह ऐसे मिले, जिन्होंने घटना अपनी आंखों से देखी थी और उन्होंने पुलिस को बताया कि कुछ लोगों ने जान बूझकर दोनों के ऊपर गाड़ी को बार-बार आगे पीछे करके चढ़ाया और फिर दूसरी गाड़ी में डालकर वहीं लोग दोनों को ले गए थे।
दुर्घटना का मुकदमा दाखिल दफ्तर, अब हत्या दर्ज
पालीमुकीमपुर पुलिस पहले ही दिन से लापरवाह रही। इसी लापरवाही का परिणाम रहा कि जब युवती के परिजन हत्यारोपी घायल हिमांशु व रूपाली को लेकर थाने पहुंचे तो पुलिस ने उसे प्रथम दृष्टया एक्सीडेंट मान लिया। उसी मंशा से पुलिस ने एक्सीडेंट का मुकदमा भी दर्ज कर लिया। हालांकि युवक के परिजन पहले ही दिन से इसे ऑनर किलिंग करार देने पर तुले हुए थे। मगर थाना पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। अब जब खुलासा हो गया तो एसएसपी के निर्देश पर पालीमुकीमपुर पुलिस ने हिमांशु के पिता प्रियनाथ वर्मा की तहरीर पर पकड़े गए चाचा, पिता के अलावा आशु वर्मा व उनके चार अज्ञात साथियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। इस मुकदमे में कहा गया है कि छह माह पहले इन लोगों ने दोनों को हत्या की धमकी दी थी। इसी के तहत साजिश रचकर रूपाली से हिमांशु को फोन पर बुलाया और जब वह बाइक पर दोनों जा रहे थे तो उनको अपनी गाड़ी से रौंद दिया। खुद दोनों को घायल अवस्था में थाने लेकर पहुंच गए। जब सूचना पर प्रियनाथ व परिजन थाने पहुंचे तो हिमांशु मृत था, जबकि रूपाली जख्मी थी। उसने यह बात बताई कि हमें पीछे से चाचा व पिता ने मारा है। इसके बाद उसकी भी मौत हो गई। इंस्पेक्टर पाली के अनुसार पूर्व में दर्ज एक्सीडेंट का मुकदमा दाखिल दफ्तर कर अब हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पहले दिन बेशक घटना को एक्सीडेंट के रूप में प्रस्तुत किया गया। मगर परिवार के आरोपों के बाद जब गंभीरता से जांच कराई गई तो यह हत्या उजागर हुई और युवती के परिजनों ने साजिश रचकर दोनों की हत्या की। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में पहले दिन पालीमुकीमपुर थाने के दरोगा व बीट सिपाही की लापरवाही रही है, जिनके खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तलब की गई है।
- अजय कुमार साहनी एसएसपी