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कुख्यात डकैत अरुण फौजी की प्रधानी पर संकट
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Fri, 09 Jun 2017 02:02 AM IST
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terrorist
- फोटो : Demo Photo
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अभिषेक शर्मा
पश्चिमी यूपी, दिल्ली एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा का कुख्यात जरायम पेशेवर एनएजी कमांडो ट्रेनिंग प्राप्त अरुण उर्फ फौजी और उसके गैंग को राजस्थान की बैंक डकैती में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह सजा डकैती प्रभावित क्षेत्र भरतपुर के विशेष न्यायाधीश बालकृष्ण मिश्र के न्यायालय से सुनाई गई है।
इस तरह अरुण फौजी को सजा होने के बाद अब उसकी पैतृक गांव लौहर्रा ब्लाक लोधा की प्रधानी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। वहीं, एसटीएफ सहित अन्य पुलिस एजेंसियों को उसके पुलिस अभिरक्षा से भागने का अंदेशा सताने लगा है।
क्योंकि पहली बार उसे किसी मुकदमे में सजा हुई है। इसके चलते यूपी एसटीएफ ने राजस्थान पुलिस से अरुण फौजी को तारीखों पर पेशी के समय कड़ी सुरक्षा में लाने ले जाने के संबंध में सचेत किया है। यह भी सूचना भेजी गई है कि वह एक बार भागने में सफल रहा है, जबकि दो बार उसके प्रयास असफल हुए हैं।
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इसके अलावा अलवर की एक बैंक डकैती में उसके सभी साथियों को सजा हो चुकी है, जबकि वह फरार था, इसलिए सजा नहीं हो पाई थी। अब जेल में रहने के दौरान उसमें भी सजा होने का अंदेशा है।
बता दें कि अरुण फौजी पूरे गैंग के साथ इन दिनों भरतपुर की डींग जेल में निरुद्ध है। बता दें कि तीन दिन पहले विरोधी खेमे के लोग अरुण को सजा की सूचना लेकर जिलाधिकारी कार्यालय गए थे, जहां जिलाधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी थी। अब वह जल्द ही जिलाधिकारी से मुलाकात करके पूरी स्थिति से अवगत कराएंगे ताकि उसकी प्रधानी को लेकर वैधानिक कार्रवाई की जा सके।
यह था दिनदहाड़े बैंक में डाका
वाकया 8 जून 2012 का है, जब राजस्थान के भरतपुर स्थित उद्योग नगर थाना क्षेत्र की स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर में दोपहर करीब 12.40 बजे सामान्य ढंग से कामकाज चल रहा था। तभी अचानक 8-10 नकाबपोश सशस्त्र डकैतों ने धावा बोल दिया। बदमाशों ने घुसते ही गार्ड की रायफल लूटकर उसे वहीं तोड़कर फेंक दिया और कैशियर विवेक आनंद को मारपीट कर चाभियां लूट लीं। इसके बाद बैंक से कुल 4 लाख 28 हजार 195 रुपये नगदी लूट ले गए। जाते समय बदमाश सभी कर्मचारी, ग्राहकों को स्ट्रांग रूम में बंद कर गए और सभी के मोबाइल लूट ले गए। इस मुकदमे में पुलिस ने सबसे पहले मोबाइल सर्विलांस व मुखबिरी के आधार पर हरदुआ के संदीप उर्फ निक्की ठाकुर को करीब डेढ़ लाख की नगदी सहित गिरफ्तार किया। इसके आधार पर अन्य अपराधियों के नाम उजागर हुए थे।
इनको भी मिली सजा
संदीप उर्फ निक्की ठाकुर निवासी हरदुआ थाना हरदुआगंज, अरुण उर्फ फौजी उर्फ अनिल गुड्डा निवासी लौहर्रा थाना लोधा, सतपाल निवासी सरौता कुम्हेर भरतपुर, हरेंद्र उर्फ गुड्डा निवासी माती बसईं थाना गोंडा, श्याम पाठक निवासी जसराना फीरोजाबाद।
अरुण फौजी को सजा का प्रकरण संज्ञान में तो नहीं आया है। मगर इस तरह किसी जनप्रतिनिधि को जघन्य अपराध में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है तो उसका पद से हटना तय है। इस मामले में भी जो भी नियमावली और निर्वाचन प्रावधान कहते हैं उनके अनुसार एक-दो दिन में आगे की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
ऋषिकेश भाष्कर याशोद, डीएम
सेना से जरायम की दुनिया तक
सेना में एनएसजी कमांडो ट्रेनिंग प्राप्त अरुण उर्फ फौजी मूल रूप से लोधा के गांव लौहर्रा का निवासी है। उसने पारिवारिक व रिश्तेदारी की रंजिश से जरायम दुनिया में कदम रखा और सेना से अवकाश पर आने के दौरान 2001-02 के करीब बुलंदशहर में दिनदहाड़े बैंक की कैश वैन लूटने में सिविल लाइंस इलाके से गिरफ्तार हुआ। इसके बाद उसने सेना से सेवानिवृत्ति ले ली और फिर अपराध की दुनिया में कूद गया। इस दौरान उसने राजस्थान, पश्चिमी यूपी, एनसीआर, मैनपुरी, हरियाणा में कई बड़े अपराध किए। इनमें सोनू गौतम के साथ श्रीधाम एक्सप्रेस हत्याकांड, एनसीआर से आईओसी इंजीनियर अपहरणकांड, अकराबाद में पूर्व विधायक के भतीजे को कार सहित हाईजैक कर लूट, मैनपुरी में लूट सहित कई बैंक डकैतियां, अपहरण, हत्याओं सहित 31 से ज्यादा अपराध पुलिस रिकार्ड में दर्ज हुए। आईओसी इंजीनियर अपहरण कांड में वह गुड्डा संग गिरफ्तार हुआ। फिर पंकज उर्फ भोला ने उसे मथुरा से छुड़ाया। बाद में फरीदाबाद में पकड़ा गया। इसी बीच उसके साथी नगनू की हत्या के बाद वह और पंकज सोनू से अलग हुए। बाद में उसके साथी 50 हजारी पंकज को बन्नादेवी में 2014 में मुठभेड़ में मार गिराया गया।
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पश्चिमी यूपी, दिल्ली एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा का कुख्यात जरायम पेशेवर एनएजी कमांडो ट्रेनिंग प्राप्त अरुण उर्फ फौजी और उसके गैंग को राजस्थान की बैंक डकैती में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह सजा डकैती प्रभावित क्षेत्र भरतपुर के विशेष न्यायाधीश बालकृष्ण मिश्र के न्यायालय से सुनाई गई है।
इस तरह अरुण फौजी को सजा होने के बाद अब उसकी पैतृक गांव लौहर्रा ब्लाक लोधा की प्रधानी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। वहीं, एसटीएफ सहित अन्य पुलिस एजेंसियों को उसके पुलिस अभिरक्षा से भागने का अंदेशा सताने लगा है।
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क्योंकि पहली बार उसे किसी मुकदमे में सजा हुई है। इसके चलते यूपी एसटीएफ ने राजस्थान पुलिस से अरुण फौजी को तारीखों पर पेशी के समय कड़ी सुरक्षा में लाने ले जाने के संबंध में सचेत किया है। यह भी सूचना भेजी गई है कि वह एक बार भागने में सफल रहा है, जबकि दो बार उसके प्रयास असफल हुए हैं।
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इसके अलावा अलवर की एक बैंक डकैती में उसके सभी साथियों को सजा हो चुकी है, जबकि वह फरार था, इसलिए सजा नहीं हो पाई थी। अब जेल में रहने के दौरान उसमें भी सजा होने का अंदेशा है।
बता दें कि अरुण फौजी पूरे गैंग के साथ इन दिनों भरतपुर की डींग जेल में निरुद्ध है। बता दें कि तीन दिन पहले विरोधी खेमे के लोग अरुण को सजा की सूचना लेकर जिलाधिकारी कार्यालय गए थे, जहां जिलाधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी थी। अब वह जल्द ही जिलाधिकारी से मुलाकात करके पूरी स्थिति से अवगत कराएंगे ताकि उसकी प्रधानी को लेकर वैधानिक कार्रवाई की जा सके।
यह था दिनदहाड़े बैंक में डाका
वाकया 8 जून 2012 का है, जब राजस्थान के भरतपुर स्थित उद्योग नगर थाना क्षेत्र की स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर में दोपहर करीब 12.40 बजे सामान्य ढंग से कामकाज चल रहा था। तभी अचानक 8-10 नकाबपोश सशस्त्र डकैतों ने धावा बोल दिया। बदमाशों ने घुसते ही गार्ड की रायफल लूटकर उसे वहीं तोड़कर फेंक दिया और कैशियर विवेक आनंद को मारपीट कर चाभियां लूट लीं। इसके बाद बैंक से कुल 4 लाख 28 हजार 195 रुपये नगदी लूट ले गए। जाते समय बदमाश सभी कर्मचारी, ग्राहकों को स्ट्रांग रूम में बंद कर गए और सभी के मोबाइल लूट ले गए। इस मुकदमे में पुलिस ने सबसे पहले मोबाइल सर्विलांस व मुखबिरी के आधार पर हरदुआ के संदीप उर्फ निक्की ठाकुर को करीब डेढ़ लाख की नगदी सहित गिरफ्तार किया। इसके आधार पर अन्य अपराधियों के नाम उजागर हुए थे।
इनको भी मिली सजा
संदीप उर्फ निक्की ठाकुर निवासी हरदुआ थाना हरदुआगंज, अरुण उर्फ फौजी उर्फ अनिल गुड्डा निवासी लौहर्रा थाना लोधा, सतपाल निवासी सरौता कुम्हेर भरतपुर, हरेंद्र उर्फ गुड्डा निवासी माती बसईं थाना गोंडा, श्याम पाठक निवासी जसराना फीरोजाबाद।
अरुण फौजी को सजा का प्रकरण संज्ञान में तो नहीं आया है। मगर इस तरह किसी जनप्रतिनिधि को जघन्य अपराध में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है तो उसका पद से हटना तय है। इस मामले में भी जो भी नियमावली और निर्वाचन प्रावधान कहते हैं उनके अनुसार एक-दो दिन में आगे की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
ऋषिकेश भाष्कर याशोद, डीएम
सेना से जरायम की दुनिया तक
सेना में एनएसजी कमांडो ट्रेनिंग प्राप्त अरुण उर्फ फौजी मूल रूप से लोधा के गांव लौहर्रा का निवासी है। उसने पारिवारिक व रिश्तेदारी की रंजिश से जरायम दुनिया में कदम रखा और सेना से अवकाश पर आने के दौरान 2001-02 के करीब बुलंदशहर में दिनदहाड़े बैंक की कैश वैन लूटने में सिविल लाइंस इलाके से गिरफ्तार हुआ। इसके बाद उसने सेना से सेवानिवृत्ति ले ली और फिर अपराध की दुनिया में कूद गया। इस दौरान उसने राजस्थान, पश्चिमी यूपी, एनसीआर, मैनपुरी, हरियाणा में कई बड़े अपराध किए। इनमें सोनू गौतम के साथ श्रीधाम एक्सप्रेस हत्याकांड, एनसीआर से आईओसी इंजीनियर अपहरणकांड, अकराबाद में पूर्व विधायक के भतीजे को कार सहित हाईजैक कर लूट, मैनपुरी में लूट सहित कई बैंक डकैतियां, अपहरण, हत्याओं सहित 31 से ज्यादा अपराध पुलिस रिकार्ड में दर्ज हुए। आईओसी इंजीनियर अपहरण कांड में वह गुड्डा संग गिरफ्तार हुआ। फिर पंकज उर्फ भोला ने उसे मथुरा से छुड़ाया। बाद में फरीदाबाद में पकड़ा गया। इसी बीच उसके साथी नगनू की हत्या के बाद वह और पंकज सोनू से अलग हुए। बाद में उसके साथी 50 हजारी पंकज को बन्नादेवी में 2014 में मुठभेड़ में मार गिराया गया।