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दलालों ने ही तैयार कर बांट दिए आवंटन पत्र, रसीद
Sun, 28 Apr 2019 02:11 AM IST
राजेश सिंह
क्राइम डेस्क, अभिषेक शर्मा, अलीगढ़
क्राइम डेस्क, अभिषेक शर्मा, अलीगढ़
Published by: राजेश सिंह
Updated Sun, 28 Apr 2019 02:11 AM IST
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एलमपुर आवास योजना की संदिग्ध रसीद
- फोटो : Amar Ujala
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एलमपुर आवास योजना के फ्लैटों पर अवैध कब्जे हो गए। जानते हैं कैसे? आइए, हम बताएंगे। दरअसल, आवंटन पत्र और रसीद दलालों ने खुद ही तैयार कर बांट दिए। जिसने कीमत दी उसी ने इनसे आवंटन पत्र पा लिया। लेकिन ऐसा करते समय 2 बातों का ध्यान रखा। पहली, आवंटन पत्र पर नाम वही डाला जो डूडा की सूची में था और दूसरी बात, लाभार्थी अंश समय से जमा कर दिया। लेकिन फ्लैट 25-एफ-ए में उनसे चूक हो गयी, इसके आवंटन पत्र 2 नाम से बना दिये।
ऐसी और भी बहुत सी चूक हुईं। यही चूक जल्द ही उन्हें शिकंजे में ला देंगी। ऐसी ही चूक ‘अमर उजाला’ की पड़ताल का आधार बनी है। ये सब डूडा की सुस्ती से हुआ या सहमति से? इसका खुलासा भी जल्द होगा। लेकिन फर्जीवाड़े की इंतिहा आज हम सबूत सहित बताएंगे। पेश है विस्तृत रिपोर्ट...
फ्लैट 1, आवंटन 2, सौदा 3 से
25-एफ.-ए महज एक फ्लैट है। लेकिन इसके आवंटन दो हैं। बिजली विभाग में कनेक्शन के लिए लगाए गए राजकुमारी नाम के आवंटन पर 15 अप्रैल 2017 की तारीख अंकित है। हालांकि डूडा ने जितने भी आवंटन पत्र जारी किए हैं उन पर 2016 तक की तिथियां हैं। भले आवंटन पत्र 2018 तक सौंपा हो। जब दलालों को अपनी चूक का अंदाजा हुआ तो उन्होंने राजकुमारी नाम का आवंटन पत्र नष्ट कर कमलादेवी नाम का आवंटन पत्र बना लिया। इस पर तिथि 14 मार्च 2016 अंकित है। ऐसा करते वक्त 2 लोगों से इस फ्लैट का सौदा भी किया। लेकिन इसका तीसरा सौदा भी कर लिया।
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ये 2018 के दिसंबर में किया। फ्लैट संख्या 24-एफ.-ए निवासी शारदा देवी ने इस बाबत शिकायत भी अफसरों को कर रखी है। शिकायत में कहा कि उनकी तलाकशुदा बेटी के लिए उन्होंने ये फ्लैट अलॉट कराने का प्रयास किया था। 2 दलालों ने उनसे साढे़ 3 लाख रुपये लिए थे लेकिन आवंटन दूसरे नाम पर दिए। हालांकि नाम सुधार के लिए रामनगर आईटीआई रोड निवासी दलाल ने 60 हजार और भी ले लिए लेकिन नाम नहीं सुधरा। इस मामले में पैसे वापस मांगने पर पिछले दिनों झगड़ा भी हुआ। जिसमें तत्कालीन अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम मौके पर पहुंचे और शारदा को शांति भंग में जेल भेजा गया था। दो दिन बाद जमानत पर शारदा छूटी। तभी से शारदा दलालों के निशाने पर आ गई हैं।
फर्जी वोटरकार्ड पर दिलाये बिजली कनेक्शन
फ्लैट 25-एफ.-ए में राजकुमारी और कमलादेवी दोनों नाम के आवंटन पत्र जारी हुए। हालांकि फ्लैट में रहने वाली महिला इनमें से कोई नहीं है। वो कोई तीसरी महिला है। लेकिन जब बिजली कनेक्शन की बारी आयी तो राजकुमारी नाम की डिटेल बनाकर उस पर फ्लैट में रहने वाली तीसरी महिला का फोटो लगाकर फर्जी वोटर आईडी तैयार की और उसी पर बिजली कनेक्शन आज तक चल रहा है। इस वोटर कार्ड में सिर्फ नाम और फोटो ही दिख रहा है। ऐसी कोई डिटेल नहीं दिख रही जिससे इसे क्रॉस चेक किया जा सके। ये कनेक्शन कमला देवी के नाम पर भी हो सकता था, लेकिन तब तक राजकुमारी नाम का ही आवंटन पत्र तैयार हुआ था।
जीरो घुमाकर बन गए ‘हीरो’
असली और नकली आवंटन को बराबर रखिये और बारीकी से देखिए। दोनों में ही नीचे परियोजना अधिकारी डूडा के हस्ताक्षर हैं। आवंटन दौर के पीओ जावेद थे। असली आवंटन में उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं। दूर से देखने में उनके हस्ताक्षर 2 जीरो जैसे लगते हैं लेकिन करीब से देखेंगे तो वो जीरो नहीं जेवी अंकित है। आप चाहें फ्लैट 24-एफ-ए का आवंटन पत्र व रसीद देख लें या फ्लैट 24-एफ.-बी के, दोनों असली हैं और एक जैसे हैं। अब आप 25-एफ.-ए के दोनों आवंटन पत्र व रसीद देखें। राजकुमारी नाम से जारी आवंटन पत्र में स्पष्ट रूप से डबल जीरो बने हैं। जब इसी फ्लैट के कमलादेवी नाम से दूसरे आवंटन पत्र में देखेंगे तो उसमें जीरो के ऊपर जीरो बनाकर आठ बना दिया है। और कमला देवी की रसीद में हूबहू वही 2 जीरो हैं जो राजकुमारी नाम के आवंटन पत्र में हैं।
अब आवास आवंटन संख्या का फांट देखें
कुलदीप के आवंटन में आवास आवंटन संख्या 24-एफ.-बी का फॉन्ट देखें। शारदा के आवंटन में भी फॉन्ट पर गौर करें। दोनों आवंटन असली हैं और दोनो का फॉन्ट भी एक है। अब राजकुमारी की आवंटन संख्या 25-एफ.-ए को भी देख लें।
शारदा और कुलदीप के फॉन्ट से एकदम अलग फॉन्ट है। अब फ्लैट 25-एफ.-ए के दूसरे आवंटन कमला देवी का लेटर भी देख लें। इसका भी वही फॉन्ट है जो राजकुमारी का है। क्योंकि राजकुमारी और कमलादेवी नाम के आवंटन पत्र व रसीद दलाल ने तैयार किये हैं।
दलाल की हैंड राइटिंग भी है सबूत
कुलदीप, शारदा और राजकुमारी, कमला देवी के आवंटन पत्रों व रसीदों में हस्ताक्षर व अंकों के फॉन्ट का ही अंतर नहीं है। हैंडराइटिंग का भी अंतर है। कमला देवी की रसीद में हैंडराइटिंग ज्यादा सधी हुई है, ये रसीद दलाल ने अपने हाथ से तैयार की है।
खबर से ही टल गया एक सौदा
26 अप्रैल के अंक में अमर उजाला ने अपनी पड़ताल की पहली किश्त प्रकाशित की थी। उस दिन भी ब्लॉक 19 में एक फ्लैट ढाई लाख में बिकना था। लेकिन खबर में पिसावा निवासी एक दलाल की पोल खोल दी थी। खबर पढ़ने के बाद ही वो डूडा कालोनी छोड़कर फरार हो गया। जिसे उस दिन फ्लैट बेचा जाना था। उस व्यक्ति ने दलाल को कई फोन किये लेकिन फोन नहीं उठा। उसके कुछ घंटों में ये बात आम हो गयी कि वो दलाल था और डूडा के फ्लैट अवैध तरीके से बेच रहा था।
फर्जीवाड़ा स्टेप टू स्टेप
- एक दलाल ने अपने प्रभाव से डूडा पीओ से दोस्ती कर योजना की हर अपडेट ली।
- डूडा से सूची प्राप्त कर ये देखा गया कि कौन आवंटी कब्जा लेने नहीं आये।
- उन आवंटियों की संख्या के ऐसे ग्राहक तलाशे जो सस्ते फ्लैट के इच्छुक थे।
- ऐसे ग्राहकों को ले जाकर कुछ आवंटन पत्र डूडा से दिलवाए।
- कुछ आवंटन पत्र दलाल ने खुद बनाकर बांट दिए लेकिन उनका लाभार्थी अंश डूडा को जमा कर दिया।
- ऐसा फर्जीवाड़ा दो दर्जन फ्लैटों में किया गया। ये वही फ्लैट हैं जिनके आवंटी डूडा नहीं आये।
ऐसी और भी बहुत सी चूक हुईं। यही चूक जल्द ही उन्हें शिकंजे में ला देंगी। ऐसी ही चूक ‘अमर उजाला’ की पड़ताल का आधार बनी है। ये सब डूडा की सुस्ती से हुआ या सहमति से? इसका खुलासा भी जल्द होगा। लेकिन फर्जीवाड़े की इंतिहा आज हम सबूत सहित बताएंगे। पेश है विस्तृत रिपोर्ट...
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फ्लैट 1, आवंटन 2, सौदा 3 से
25-एफ.-ए महज एक फ्लैट है। लेकिन इसके आवंटन दो हैं। बिजली विभाग में कनेक्शन के लिए लगाए गए राजकुमारी नाम के आवंटन पर 15 अप्रैल 2017 की तारीख अंकित है। हालांकि डूडा ने जितने भी आवंटन पत्र जारी किए हैं उन पर 2016 तक की तिथियां हैं। भले आवंटन पत्र 2018 तक सौंपा हो। जब दलालों को अपनी चूक का अंदाजा हुआ तो उन्होंने राजकुमारी नाम का आवंटन पत्र नष्ट कर कमलादेवी नाम का आवंटन पत्र बना लिया। इस पर तिथि 14 मार्च 2016 अंकित है। ऐसा करते वक्त 2 लोगों से इस फ्लैट का सौदा भी किया। लेकिन इसका तीसरा सौदा भी कर लिया।
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ये 2018 के दिसंबर में किया। फ्लैट संख्या 24-एफ.-ए निवासी शारदा देवी ने इस बाबत शिकायत भी अफसरों को कर रखी है। शिकायत में कहा कि उनकी तलाकशुदा बेटी के लिए उन्होंने ये फ्लैट अलॉट कराने का प्रयास किया था। 2 दलालों ने उनसे साढे़ 3 लाख रुपये लिए थे लेकिन आवंटन दूसरे नाम पर दिए। हालांकि नाम सुधार के लिए रामनगर आईटीआई रोड निवासी दलाल ने 60 हजार और भी ले लिए लेकिन नाम नहीं सुधरा। इस मामले में पैसे वापस मांगने पर पिछले दिनों झगड़ा भी हुआ। जिसमें तत्कालीन अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम मौके पर पहुंचे और शारदा को शांति भंग में जेल भेजा गया था। दो दिन बाद जमानत पर शारदा छूटी। तभी से शारदा दलालों के निशाने पर आ गई हैं।
फर्जी वोटरकार्ड पर दिलाये बिजली कनेक्शन
फ्लैट 25-एफ.-ए में राजकुमारी और कमलादेवी दोनों नाम के आवंटन पत्र जारी हुए। हालांकि फ्लैट में रहने वाली महिला इनमें से कोई नहीं है। वो कोई तीसरी महिला है। लेकिन जब बिजली कनेक्शन की बारी आयी तो राजकुमारी नाम की डिटेल बनाकर उस पर फ्लैट में रहने वाली तीसरी महिला का फोटो लगाकर फर्जी वोटर आईडी तैयार की और उसी पर बिजली कनेक्शन आज तक चल रहा है। इस वोटर कार्ड में सिर्फ नाम और फोटो ही दिख रहा है। ऐसी कोई डिटेल नहीं दिख रही जिससे इसे क्रॉस चेक किया जा सके। ये कनेक्शन कमला देवी के नाम पर भी हो सकता था, लेकिन तब तक राजकुमारी नाम का ही आवंटन पत्र तैयार हुआ था।
जीरो घुमाकर बन गए ‘हीरो’
असली और नकली आवंटन को बराबर रखिये और बारीकी से देखिए। दोनों में ही नीचे परियोजना अधिकारी डूडा के हस्ताक्षर हैं। आवंटन दौर के पीओ जावेद थे। असली आवंटन में उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं। दूर से देखने में उनके हस्ताक्षर 2 जीरो जैसे लगते हैं लेकिन करीब से देखेंगे तो वो जीरो नहीं जेवी अंकित है। आप चाहें फ्लैट 24-एफ-ए का आवंटन पत्र व रसीद देख लें या फ्लैट 24-एफ.-बी के, दोनों असली हैं और एक जैसे हैं। अब आप 25-एफ.-ए के दोनों आवंटन पत्र व रसीद देखें। राजकुमारी नाम से जारी आवंटन पत्र में स्पष्ट रूप से डबल जीरो बने हैं। जब इसी फ्लैट के कमलादेवी नाम से दूसरे आवंटन पत्र में देखेंगे तो उसमें जीरो के ऊपर जीरो बनाकर आठ बना दिया है। और कमला देवी की रसीद में हूबहू वही 2 जीरो हैं जो राजकुमारी नाम के आवंटन पत्र में हैं।
अब आवास आवंटन संख्या का फांट देखें
कुलदीप के आवंटन में आवास आवंटन संख्या 24-एफ.-बी का फॉन्ट देखें। शारदा के आवंटन में भी फॉन्ट पर गौर करें। दोनों आवंटन असली हैं और दोनो का फॉन्ट भी एक है। अब राजकुमारी की आवंटन संख्या 25-एफ.-ए को भी देख लें।
शारदा और कुलदीप के फॉन्ट से एकदम अलग फॉन्ट है। अब फ्लैट 25-एफ.-ए के दूसरे आवंटन कमला देवी का लेटर भी देख लें। इसका भी वही फॉन्ट है जो राजकुमारी का है। क्योंकि राजकुमारी और कमलादेवी नाम के आवंटन पत्र व रसीद दलाल ने तैयार किये हैं।
दलाल की हैंड राइटिंग भी है सबूत
कुलदीप, शारदा और राजकुमारी, कमला देवी के आवंटन पत्रों व रसीदों में हस्ताक्षर व अंकों के फॉन्ट का ही अंतर नहीं है। हैंडराइटिंग का भी अंतर है। कमला देवी की रसीद में हैंडराइटिंग ज्यादा सधी हुई है, ये रसीद दलाल ने अपने हाथ से तैयार की है।
खबर से ही टल गया एक सौदा
26 अप्रैल के अंक में अमर उजाला ने अपनी पड़ताल की पहली किश्त प्रकाशित की थी। उस दिन भी ब्लॉक 19 में एक फ्लैट ढाई लाख में बिकना था। लेकिन खबर में पिसावा निवासी एक दलाल की पोल खोल दी थी। खबर पढ़ने के बाद ही वो डूडा कालोनी छोड़कर फरार हो गया। जिसे उस दिन फ्लैट बेचा जाना था। उस व्यक्ति ने दलाल को कई फोन किये लेकिन फोन नहीं उठा। उसके कुछ घंटों में ये बात आम हो गयी कि वो दलाल था और डूडा के फ्लैट अवैध तरीके से बेच रहा था।
फर्जीवाड़ा स्टेप टू स्टेप
- एक दलाल ने अपने प्रभाव से डूडा पीओ से दोस्ती कर योजना की हर अपडेट ली।
- डूडा से सूची प्राप्त कर ये देखा गया कि कौन आवंटी कब्जा लेने नहीं आये।
- उन आवंटियों की संख्या के ऐसे ग्राहक तलाशे जो सस्ते फ्लैट के इच्छुक थे।
- ऐसे ग्राहकों को ले जाकर कुछ आवंटन पत्र डूडा से दिलवाए।
- कुछ आवंटन पत्र दलाल ने खुद बनाकर बांट दिए लेकिन उनका लाभार्थी अंश डूडा को जमा कर दिया।
- ऐसा फर्जीवाड़ा दो दर्जन फ्लैटों में किया गया। ये वही फ्लैट हैं जिनके आवंटी डूडा नहीं आये।