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एएमयू का वीडियो फुटेज बताएगा देशद्रोह के आरोप का सच
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Mon, 29 Oct 2018 02:02 AM IST
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हिजबुल कमांडर और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के निष्कासित शोध छात्र मन्नान वानी के मारे जाने के बाद परिसर में देश विरोधी नारेबाजी के मामले में साक्ष्य के रूप में जुटाए गए वीडियो फुटेज जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
प्रयोगशाला से पूछा गया है कि जांच में यह तय करके बताया जाए कि कहीं यह फुटेज संपादित तो नहीं हैं। इसके साथ ही घटना का सही समय, दिन, तारीख भी पूछी गई है। इस रिपोर्ट के मिलने के बाद मुकदमे में अग्रिम कार्रवाई होगी।
थाना सिविल लाइंस की मेडिकल रोड चौकी इंचार्ज इसरार अहमद की ओर से 12 अक्तूबर को दर्ज कराई गई रिपोर्ट में कहा गया है कि कश्मीरी आतंकी मन्नान वानी के मारे जाने के बाद एएमयू में कश्मीरी छात्रों के कैनेडी हाल के लान में इकट्ठा होकर नमाज-ए-जनाजा पढ़ने की सूचना मिली। वहां पहुंचने पर देखा कि काफी कश्मीरी छात्र इकट्ठा थे और उनके नेता भाषण दे रहे थे।
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उस समय एएमयू प्राक्टर टीम सहित अन्य लोग भी मौजूद थे। जब छात्र नमाज-ए-जनाजा की तैयारी करने लगे तो प्राक्टर टीम ने उन्हें रोका, जिस पर वाद विवाद हुआ और धक्कामुक्की हुई। यहां छात्रों ने एक व्यक्ति से मारपीट कर मोबाइल आदि भी लूट लिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सामने आने पर वह हमलावर कश्मीरी छात्रों को पहचान सकते हैं।
इस मुकदमे में रसायन विभाग के शोध छात्र वसीम अयूब मलिक और इतिहास विभाग के अब्दुल अबीर मीर को धारा 147, 148, 124 ए, 153 ए, 153 बी, 323, 504 और 506 के तहत आरोपी बनाया गया है। हालांकि एएमयू ने इस मुकदमे के आरोपी छात्रों का निलंबन वापस ले लिया है मगर छात्रों के स्तर से लगातार मुकदमा वापसी की मांग उठ रही है।
वहीं अभी पुलिस के स्तर से कहा जा रहा है कि जांच की औपचारिकताओं के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। इसी क्रम में एएमयू से प्राप्त किए गए सीसीटीवी के वीडियो फुटेज जांच के लिए भेजे गए हैं।
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प्रयोगशाला से पूछा गया है कि जांच में यह तय करके बताया जाए कि कहीं यह फुटेज संपादित तो नहीं हैं। इसके साथ ही घटना का सही समय, दिन, तारीख भी पूछी गई है। इस रिपोर्ट के मिलने के बाद मुकदमे में अग्रिम कार्रवाई होगी।
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थाना सिविल लाइंस की मेडिकल रोड चौकी इंचार्ज इसरार अहमद की ओर से 12 अक्तूबर को दर्ज कराई गई रिपोर्ट में कहा गया है कि कश्मीरी आतंकी मन्नान वानी के मारे जाने के बाद एएमयू में कश्मीरी छात्रों के कैनेडी हाल के लान में इकट्ठा होकर नमाज-ए-जनाजा पढ़ने की सूचना मिली। वहां पहुंचने पर देखा कि काफी कश्मीरी छात्र इकट्ठा थे और उनके नेता भाषण दे रहे थे।
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उस समय एएमयू प्राक्टर टीम सहित अन्य लोग भी मौजूद थे। जब छात्र नमाज-ए-जनाजा की तैयारी करने लगे तो प्राक्टर टीम ने उन्हें रोका, जिस पर वाद विवाद हुआ और धक्कामुक्की हुई। यहां छात्रों ने एक व्यक्ति से मारपीट कर मोबाइल आदि भी लूट लिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सामने आने पर वह हमलावर कश्मीरी छात्रों को पहचान सकते हैं।
इस मुकदमे में रसायन विभाग के शोध छात्र वसीम अयूब मलिक और इतिहास विभाग के अब्दुल अबीर मीर को धारा 147, 148, 124 ए, 153 ए, 153 बी, 323, 504 और 506 के तहत आरोपी बनाया गया है। हालांकि एएमयू ने इस मुकदमे के आरोपी छात्रों का निलंबन वापस ले लिया है मगर छात्रों के स्तर से लगातार मुकदमा वापसी की मांग उठ रही है।
वहीं अभी पुलिस के स्तर से कहा जा रहा है कि जांच की औपचारिकताओं के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। इसी क्रम में एएमयू से प्राप्त किए गए सीसीटीवी के वीडियो फुटेज जांच के लिए भेजे गए हैं।