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50 करोड़ रुपये की प्रापर्टी पर प्रशासन ने ठोकी सील

Wed, 08 May 2019 02:35 AM IST
राजेश सिंह क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: राजेश सिंह Updated Wed, 08 May 2019 02:35 AM IST
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Administration sealed on seized property worth Rs 50 crores
साइट पर लगा दिल्ली हाइट्स का बोर्ड। - फोटो : Rupesh
 महानगर के मेडिकल रोड स्थित अमर भवन की करीब 50 करोड़ रुपये कीमत की 5500 वर्गमीटर संपत्ति पर बन रहे बहुमंजिला भवन दिल्ली हाईट्स पर जिला प्रशासन ने मंगलवार की देर शाम सील ठोक दी है। यह कार्रवाई भूमाफिया पर फर्जी वसीयतनामा के जरिए जमीन पर कब्जा करने के आरोपों के जांच के बाद की गई है। भवन का नक्शा निरस्त कराने समेत देर रात मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी चल रही थी।
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साथ में साक्ष्यों के आधार पर जांच आर्थिक अपराध शाखा को भेजे जाने की भी तैयारी है। यह जमीन सरकारी साबित होती है तो इसे सरकार के पक्ष में अधिग्रहीत किया जाएगा। इस बड़ी कार्रवाई से शहर में चर्चाओं का दौर है। यह निर्माण एक पूर्व माननीय के संरक्षण में चल रहा था। आरोप है कि पिछली सरकार के उच्च ओहदेदारों के संरक्षण में जमीन पर कब्जा लेकर निर्माण शुरू कराया गया था।
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एसडीएम कोल रंजीत सिंह के अनुसार इस मामले में दिल्ली के भागीरथ पैलेस 1690 निवासी दुबई बेस्ड उद्योगपति विनोद कुमार पचनंदा की ओर से डीएम से शिकायत की गई थी। आरोप था कि दोदपुर मेडिकल रोड की अमर भवन स्थित 5500 वर्गमीटर जमीन के वह वारिस हैं। यह संपत्ति 11000 वर्ग मीटर आजादी के समय अजमल इलाही, आभा अली, सैयद जहीरउद्दीन हैदर, सलामदुद्दीन के नाम कोठी दर्ज है।
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इसके वारिसों के बिना सूचना के पाकिस्तान जाने पर संपत्ति भारत सरकार के हक में आ गई, जिसे विनोद पचनंदा के पूर्वजों ने वर्ष 1958 में नीलामी में खरीदा था। इस संपत्ति के दो हिस्से 5500-5500 परिवार में बंटे। एक हिस्से जिसके वारिस खुद विनोद हैं पर आरोपियों ने पिता धर्मपाल पचनंदा का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र व फर्जी वसीयतनामा पूर्व माननीय के ड्राइवर मनोज कुमार निवासी हाथरस के नाम दिखाया।

उसके आधार पर आरोपियों ने इस जमीन के कई टुकड़ों में बैनामा 2015 से 2016 के मध्य दिल्ली हाईट्स एसआरएस बिल्डर्स के मालिक साजिद के नाम कर दिया। इसके ऐवज में मोटी रकम का भुगतान लेना दिखाया गया है और इसके बाद यहां बहुमंजिला निर्माण कराया जा रहा है।

  शिकायत की जांच में पाया गया कि शिकायतकर्ता के पिता का जो मृत्यु प्रमाण पत्र 1996 से नगर निगम से जारी दिखाया गया था, वह फर्जी था। उनकी मृत्यु का असली प्रमाण पत्र दिल्ली एनसीआर क्षेत्र से जारी है। इस जांच के आधार पर यह तय पाया गया कि शिकायतकर्ता परिवार 2004 के बाद से यहां से दिल्ली विस्थापित हो गया। विवादित भूमि का भू स्वामित्व स्पष्ट नहीं है। मगर निर्माण भी अवैध माना गया है। इस आधार पर निर्माण तत्काल रोकते हुए एडीए से अग्रिम कार्रवाई को कहा गया है।  पूर्व माननीय ने इस कार्रवाई को जिला प्रशासन की राजनीतिक विद्वेष की कार्रवाई करार दिया है। कहा है कि सिविल मामले में बिना आदलती आदेश के इस तरह की कार्रवाई गलत है। वह मामले को लेकर आदालत जाएंगे।

पीड़ित ने जिलाधिकारी का जताया आभार
इस संबंध में पीड़ित विनोद पचनंदा ने जिलाधिकारी का आभार जताया गया है। उन्होंने कहा है कि वर्ष 2004 के बाद से वह न्याय के लिए भटक रहे थे। अब तक कई बार अलग.अलग अधिकारियों से मिले, मगर उन्हें पिछली सरकार में उच्च ओहदेदारों की मदद से जमीन पर कब्जा होने के कारण कहीं मदद नहीं मिली।


 विवादित संपत्ति की कीमत करीब 50 करोड़ रुपये है, जिसे सीज कर दिया गया है। असल भू स्वामित्व की जांच होने तक वहां कोई निर्माण नहीं होगा। अगर असल स्वामित्व नहीं पाया गया तो यह संपत्ति सरकार के हक में अधिग्रहीत की जाएगी। फिलहाल फर्जीवाड़ा करने वालों पर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
-रंजीत सिंह एसडीएम कोल।
 
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