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थप्पड़ से मृत के परिजनों को 50 हजार की सहायता
Updated Thu, 15 Nov 2018 02:43 AM IST
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
महानगर के सिविल लाइन इलाके में कठपुला के पास वाहन चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस के दारोगा के थप्पड़ से मृत युवक के परिजनों को 50 हजार रुपया बतौर आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। डीएम ने मृतक के परिजनों के नाम जिला राइफल एसोसिएशन फंड से यह राशि देने के आदेश जारी कर दिए हैं।
मंगलवार को महानगर के सिविल लाइन इलाके में कठपुला के पास वाहन चेकिंग के दौरान ट्रैफिक दारोगा ने बाइक सवार बरौली जवां निवासी 28 वर्षीय अफजाल पुत्र शौकत को थप्पड़ मार दिया था। दरअसल उसके पास अपनी गाड़ी के कागज नहीं थे। इस दौरान उसने तर्क दिया कि वह खुद अस्थमा एवं क्षय रोग से पीड़ित है और अपनी व अपनी बीमार बेटी के लिए दवा लेने जिला अस्पताल जा रहा है, लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनते हुए गाड़ी सीज कर दी। इस दौरान हुई बहस से कुपित होकर एक दारोगा ने उसे थप्पड़ मार दिया। इससे वह अचेत होकर गिर पड़ा। जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डाक्टरों ने फौरी तौर पर माना कि उसकी मौत दहशत में हृदयाघात से हुई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीएम चंद्रभूषण सिंह ने मृतक के परिजनों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिये जाने के आदेश दिए हैं। हालांकि अभी पुलिस द्वारा मृतक के सही नाम पते एवं अन्य आवश्यक विवरण का इंतजार किया जा रहा है।
पुलिस चेकिंग के दौरान गाड़ी के कागज पूरे नहीं होने, सीज करने से रोकने पर दरोगा के थप्पड़ से मारे गए अफजाल के परिजनों से बुधवार को पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह ने मुलाकात की। उन्होंने घटना के बारे में विस्तार से पता किया और प्रशासन से मिलने वाली मदद की जानकारी की। पूर्व विधायक ने कहा है कि लखनऊ में पुलिस की गोली से विवेक तिवारी की दर्दनाक मौत हो गई थी। प्रशासन ने उसको 25 लाख रुपये की मदद दी और पत्नी को सरकारी नौकरी दी। सरकार के बड़े नेता खुद पीड़ित परिजनों से मिलने गए, लेकिन अफजाल के मामले में प्रशासन उदासीन है। अफजाल को मदद के नाम पर केवल 50 हजार रुपये दिए जाने का बात हो रही है। इस महंगाई में तीन बच्चों और पत्नी का खर्च क्या 50 हजार रुपये में चल सकता है..? ये मदद के नाम पर मजाक है। शासन को चाहिए कि अफजाल के आश्रितों को सरकारी नौकरी और 25 लाख रुपये की मदद दे। पूर्व विधायक अफजाल के घर बरौली पहुंचे थे।
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सपा महिला सभा महानगर अध्यक्ष एवं समाजसेवी रुबीना खानम ने चेकिंग के दौरान पुलिस द्वारा पीटने पर हुई अफ़ जाल की हत्या को पुलिस के लिए शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस अब गुंडागर्दी पर उतर आई है। चेकिंग के नाम पर एक बीमार गरीब मजदूर के साथ मारपीट कर उसकी हत्या करना कायराना कुकृत्य है। उन्होंने कहा कि अभी तक इस निर्मम घटना में सम्मिलित पुलिस कर्मियों को सस्पेंड नहीं किया गया। हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, जबकि घटना के कई चश्मदीद मौजूद हैं। जबसे भाजपा सत्ता में आयी है आम जनता को पुलिस ही प्रताड़ित कर रही है। ये ठीक नहीं हैं। जनता इसका जवाब चुनाव में देगी।
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महानगर के सिविल लाइन इलाके में कठपुला के पास वाहन चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस के दारोगा के थप्पड़ से मृत युवक के परिजनों को 50 हजार रुपया बतौर आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। डीएम ने मृतक के परिजनों के नाम जिला राइफल एसोसिएशन फंड से यह राशि देने के आदेश जारी कर दिए हैं।
मंगलवार को महानगर के सिविल लाइन इलाके में कठपुला के पास वाहन चेकिंग के दौरान ट्रैफिक दारोगा ने बाइक सवार बरौली जवां निवासी 28 वर्षीय अफजाल पुत्र शौकत को थप्पड़ मार दिया था। दरअसल उसके पास अपनी गाड़ी के कागज नहीं थे। इस दौरान उसने तर्क दिया कि वह खुद अस्थमा एवं क्षय रोग से पीड़ित है और अपनी व अपनी बीमार बेटी के लिए दवा लेने जिला अस्पताल जा रहा है, लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनते हुए गाड़ी सीज कर दी। इस दौरान हुई बहस से कुपित होकर एक दारोगा ने उसे थप्पड़ मार दिया। इससे वह अचेत होकर गिर पड़ा। जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डाक्टरों ने फौरी तौर पर माना कि उसकी मौत दहशत में हृदयाघात से हुई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीएम चंद्रभूषण सिंह ने मृतक के परिजनों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिये जाने के आदेश दिए हैं। हालांकि अभी पुलिस द्वारा मृतक के सही नाम पते एवं अन्य आवश्यक विवरण का इंतजार किया जा रहा है।
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पुलिस चेकिंग के दौरान गाड़ी के कागज पूरे नहीं होने, सीज करने से रोकने पर दरोगा के थप्पड़ से मारे गए अफजाल के परिजनों से बुधवार को पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह ने मुलाकात की। उन्होंने घटना के बारे में विस्तार से पता किया और प्रशासन से मिलने वाली मदद की जानकारी की। पूर्व विधायक ने कहा है कि लखनऊ में पुलिस की गोली से विवेक तिवारी की दर्दनाक मौत हो गई थी। प्रशासन ने उसको 25 लाख रुपये की मदद दी और पत्नी को सरकारी नौकरी दी। सरकार के बड़े नेता खुद पीड़ित परिजनों से मिलने गए, लेकिन अफजाल के मामले में प्रशासन उदासीन है। अफजाल को मदद के नाम पर केवल 50 हजार रुपये दिए जाने का बात हो रही है। इस महंगाई में तीन बच्चों और पत्नी का खर्च क्या 50 हजार रुपये में चल सकता है..? ये मदद के नाम पर मजाक है। शासन को चाहिए कि अफजाल के आश्रितों को सरकारी नौकरी और 25 लाख रुपये की मदद दे। पूर्व विधायक अफजाल के घर बरौली पहुंचे थे।
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सपा महिला सभा महानगर अध्यक्ष एवं समाजसेवी रुबीना खानम ने चेकिंग के दौरान पुलिस द्वारा पीटने पर हुई अफ़ जाल की हत्या को पुलिस के लिए शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस अब गुंडागर्दी पर उतर आई है। चेकिंग के नाम पर एक बीमार गरीब मजदूर के साथ मारपीट कर उसकी हत्या करना कायराना कुकृत्य है। उन्होंने कहा कि अभी तक इस निर्मम घटना में सम्मिलित पुलिस कर्मियों को सस्पेंड नहीं किया गया। हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, जबकि घटना के कई चश्मदीद मौजूद हैं। जबसे भाजपा सत्ता में आयी है आम जनता को पुलिस ही प्रताड़ित कर रही है। ये ठीक नहीं हैं। जनता इसका जवाब चुनाव में देगी।