{"_id":"5a4d33754f1c1b0a788b66b7","slug":"81515008885-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एएमयू के प्रो. खालिद को कानूनी नोटिस","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
एएमयू के प्रो. खालिद को कानूनी नोटिस
Updated Thu, 04 Jan 2018 01:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
समाज सुधार संगठन के अध्यक्ष चौधरी इफराहीम हुसैन ने अधिवक्ता अशोक कुमार यादव के माध्यम से पत्नी को तीन तलाक देने वाले एएमयू संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. खालिद बिन यूसुफ को कानूनी नोटिस देकर सात दिन के अंदर जवाब मांगा है।
चौधरी इफराहीम को आरोप है कि तलाक देने में पूर्ण रूप से इस्लामी प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया गया। पहला तलाक 30 सितंबर, दूसरा तलाक 30 अक्तूबर एवं तीसरा तलाक 28 दिसंबर 2017 को देकर बीवी से रिश्ता खत्म कर दिया गया। कथित तलाक में आपके द्वारा मेल मिलाप की कोशिश नहीं की गई और न ही किसी को गवाह बनाया गया है, जबकि इस्लामी प्रक्रिया के अनुसार मेलमिलाप की कोशिश करने को पसंदीदा अमल माना गया है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि तलाक में इस्लामी प्रक्रिया को पूर्ण रूप से न अपनाकर मजहब-ए-इस्लाम की गलत तस्वीर समाज के समक्ष पेश करने का कृत्य किया गया है। जिससे इस्लाम की गलत तस्वीर गयी है और जनता को इस्लाम के प्रति गुमराह किया गया है।
विज्ञापन
एएमयू से जुड़े होने की वजह से छवि धूमिल की गई है। उन्होंने यह भी कहा है कि तलाक में पूर्ण रूप से इस्लामी प्रक्रिया नहीं अपनाए जाने के कारण औरत के साथ नाइंसाफी हुई है।
प्रो. खालिद से कहा गया है कि स्पष्ट करें कि आप मात्र तलाक के कानून को ही इस्लाम के अनुसार मानते हैं या कुरान हदीस के आदेशों को भी मानते हैं। उन्होंने नोटिस में यह भी कहा कि इस्लाम की सच्चाई छुपाने के लिए सार्वजनिक जनता से माफी मांगें।
विज्ञापन
समाज सुधार संगठन के अध्यक्ष चौधरी इफराहीम हुसैन ने अधिवक्ता अशोक कुमार यादव के माध्यम से पत्नी को तीन तलाक देने वाले एएमयू संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. खालिद बिन यूसुफ को कानूनी नोटिस देकर सात दिन के अंदर जवाब मांगा है।
चौधरी इफराहीम को आरोप है कि तलाक देने में पूर्ण रूप से इस्लामी प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया गया। पहला तलाक 30 सितंबर, दूसरा तलाक 30 अक्तूबर एवं तीसरा तलाक 28 दिसंबर 2017 को देकर बीवी से रिश्ता खत्म कर दिया गया। कथित तलाक में आपके द्वारा मेल मिलाप की कोशिश नहीं की गई और न ही किसी को गवाह बनाया गया है, जबकि इस्लामी प्रक्रिया के अनुसार मेलमिलाप की कोशिश करने को पसंदीदा अमल माना गया है।
विज्ञापन
उन्होंने आरोप लगाया है कि तलाक में इस्लामी प्रक्रिया को पूर्ण रूप से न अपनाकर मजहब-ए-इस्लाम की गलत तस्वीर समाज के समक्ष पेश करने का कृत्य किया गया है। जिससे इस्लाम की गलत तस्वीर गयी है और जनता को इस्लाम के प्रति गुमराह किया गया है।
विज्ञापन
एएमयू से जुड़े होने की वजह से छवि धूमिल की गई है। उन्होंने यह भी कहा है कि तलाक में पूर्ण रूप से इस्लामी प्रक्रिया नहीं अपनाए जाने के कारण औरत के साथ नाइंसाफी हुई है।
प्रो. खालिद से कहा गया है कि स्पष्ट करें कि आप मात्र तलाक के कानून को ही इस्लाम के अनुसार मानते हैं या कुरान हदीस के आदेशों को भी मानते हैं। उन्होंने नोटिस में यह भी कहा कि इस्लाम की सच्चाई छुपाने के लिए सार्वजनिक जनता से माफी मांगें।