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बिहार नहीं पश्चिम बंगाल से जुड़ रहे मारे गए अपराधियों के तार
Updated Sun, 23 Sep 2018 02:12 AM IST
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
साधुओं की सिलसिलेवार हत्या से जुड़े अपराधियों नौशाद और मुस्तकीम को मुठभेड़ में मारने के बाद विपक्षी दलों के निशाने पर आई पुलिस हर जवाब देने के लिए अपराधियों और उनके परिवार के एक-एक सदस्य की तह तक जाने में जुटी है। अब तक पुलिस जिस नतीजे पर पहुंची है, उसके अनुसार इस परिवार का बिहार से दूर-दूर तक नाता नजर नहीं आ रहा। इस परिवार के पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले से पलायित होने के तथ्य सामने आ रहे हैं। इस सच्चाई की तह में जाने के लिए टीम को लगाया गया है, छर्रा के पते पर बने जो आधार कार्ड मारे गए अपराधियों से मिले हैं, उनका सत्यापन नहीं हो पा रहा है। वहां इनके रहने की अभी तक तस्दीक नहीं हो पाई है। अब पुलिस यह जानने में जुटी है कि आखिर फर्जी आधार कार्ड कहां से और किसकी मदद से बने। वहीं इन अपराधियों के डासना जेल जाने के अलावा इनके शामली में एक हत्या में शामिल होने की बात भी सामने आ रही है।
सबसे ज्यादा तो दादी ने उलझाया पुलिस को
हरदुआगंज में हुई मुठभेड़ के संबंध में मारे गए अपराधियों पर दर्ज हुए धारा 307 के मुकदमे की विवेचना इंस्पेक्टर मडराक को सौंपी गई है। इसी मुकदमे में बयान आदि दर्ज कराने के सिलसिले में दोनों परिवारों की महिलाओं को विवेचक द्वारा महिला पुलिस की मदद से शनिवार को अतरौली थाने पर बुलाया गया। जहां इन महिलाओं से अलग-अलग बातचीत हुई। खास बात इस दौरान जब मुश्तकीम की दादी रफीकन से बात हुई तो वह पुलिस को उसके ही सवालों में उलझाने लगी। पुलिस की मानें तो वह अपने पिता, दादा, पति व सही पता याद न होने जैसे तर्क देने लगी। इसी बीच अलग-अलग बातचीत में पुरुलिया का जिक्र सामने आया। इससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि यह परिवार बिहार अब झारखंड के बलरामपुर का न होकर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का है। शाम को एसएसपी अजय कुमार साहनी व अन्य पुलिस अफसर भी अतरौली पहुंचे और जांच टीमों द्वारा अब तक जुटाए गए तथ्यों की समीक्षा कर आगे के लिए निर्देश दिए।
आखिर क्यों गायब मुस्तकीम का पिता
मुठभेड़ में नौशाद के साथ मुस्तकीम के मारे जाने की सूचना के बाद भी मुस्तकीम का पिता इरफान अभी तक सामने नहीं आया है। न तो वो पुलिस के सामने आ रहा और न ही अपने घर लौटा है। आखिर वह कहां गायब है और वो किस डर से गायब है। उसके गायब होने से तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। परिजनों ने बताया कि मुठभेड़ से तीन दिन पहले जेल गए यासीन आदि को 16 सितंबर को पुलिस ने घर से उठाया था। तभी से इरफान भी गायब है। उनके बारे में किसी को भी पता नहीं है। वहीं नौशाद के पिता रहमान दूसरी शादी कर चुका है और वह नौशाद के परिवार से नाता तोड़ चुके है। इसलिए कई वर्ष से इनसे मिलने भी नहीं आया।
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महिलाओं से मिलने थाने गई सामाजिक कार्यकत्री की गाड़ी सीज
पुलिस ने शाहिन, शबाना और रफीकन के थाने बुलाया था। दोपहर में सामाजिक कार्यकत्री मारिया आलम इस परिवार से मिलने अतरौली पहुंचीं। जहां मुस्तकीम की पत्नी हिना ने बताया कि उन्हें पुलिस ने थाने में बैठाए रखा है। इस खबर पर मारिया आलम थाने पहुंची। उनके साथ कुछ महिलाएं भी थीं। पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने तीनों महिलाओं से मिलने की बात की तो पुलिस ने मिलने नहीं दिया। इससे महिलाओं की पुलिस से नोकझोंक हो गई। मारिया आलम का कहना है कि पुलिस ने उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उनकी गाड़ी सीज कर दी।
क्यों झूठ बोल रहा परिवार: एसएसपी
एसएसपी अजय कुमार साहनी का कहना है कि अभी तक मुठभेड़ में मारे गए नौशाद व मुस्तकीम के सही पते सत्यापित नहीं हो पाए हैं। अतरौली में पिछले 9 माह से रहने से पहले की जानकारी पर परिवार द्वारा छर्रा में रहना और वहीं से आधार कार्ड आदि बनवाने की बात कही जा रही है। मगर अब तक की जांच में छर्रा में उनका पता सत्यापित नहीं हो पाया है। इससे लग रहा है कि परिवार झूठ बोल रहा है। वहीं परिजनों से पूछताछ में ही इनके पश्चिम बंगाल के पुरुलिया से पलायित होकर आने की बात सामने आई है। अब तक परिजन बिहार का बताकर झूठ क्यों बोल रहे थे। फिलहाल पता सत्यापन कराने का काम जारी है। दो टीमें इसी काम में लगी हैं। चाहे मूल पता कहीं से हो, जल्द ही तस्वीर साफ होगी। इनके अपराध को लेकर डासना जेल जाने के अलावा शामली में हत्या की बात भी सामने आई है। पूरा क्राइम रिकार्ड जल्द ही सामने होगा।
मुस्तकीम व नौशाद के परिजनों को इंसाफ मिले: उलेमा काउंसिल
राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के मंडल अध्यक्ष निसार अहमद की अगुवाई में एक प्रतिनिधि मंडल हरदुआगंज मुठभेड़ में मारे गए मुस्तकीम व नौशाद के परिजनों से मिला। परिजनों को प्रतिनिधि मंडल ने मदद का आश्वासन दिया। मंडल अध्यक्ष निसार अहमद व भारतीय समाज सेवक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी इफराहीम हुसैन ने कहा कि शुक्रवार को एटा के लोगों द्वारा मुठभेड़ को लेकर की गई पत्रकार वार्ता में उन्हें बुलाया गया था। पत्रकार वार्ता करने वालों ने उन्हें पूरे प्रकरण से अवगत नहीं कराया था और न ही इस प्रकरण में पूरी बात मालूम थी। उन्होंने कहा कि जब मृतक के परिजनों से मिले, तब हकीकत मालूम हुई। जिस तरह साधु के हत्यारों की तलाश में पुलिस जुटी है, उसी तरह मुस्तकीम व नौशाद के परिजनों को भी इंसाफ मिलना चाहिए। वहीं उलेमा काउंसिल ने इस परिवार के साथ खड़े पूर्व विधायक जमीरउल्लाह को सलाह दी है कि वह ऐसे ही खड़े रहें। मगर बसपा से दूरी बना लें, क्योंकि बसपा ही उनका साथ नहीं देगी। प्रतिनिधि मंडल में सैयद अब्दुल्लाह, मोहम्मद इरशाद तूफानी, मुदस्सिर, एजाज आरिफ आदि मौजूद रहे।
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साधुओं की सिलसिलेवार हत्या से जुड़े अपराधियों नौशाद और मुस्तकीम को मुठभेड़ में मारने के बाद विपक्षी दलों के निशाने पर आई पुलिस हर जवाब देने के लिए अपराधियों और उनके परिवार के एक-एक सदस्य की तह तक जाने में जुटी है। अब तक पुलिस जिस नतीजे पर पहुंची है, उसके अनुसार इस परिवार का बिहार से दूर-दूर तक नाता नजर नहीं आ रहा। इस परिवार के पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले से पलायित होने के तथ्य सामने आ रहे हैं। इस सच्चाई की तह में जाने के लिए टीम को लगाया गया है, छर्रा के पते पर बने जो आधार कार्ड मारे गए अपराधियों से मिले हैं, उनका सत्यापन नहीं हो पा रहा है। वहां इनके रहने की अभी तक तस्दीक नहीं हो पाई है। अब पुलिस यह जानने में जुटी है कि आखिर फर्जी आधार कार्ड कहां से और किसकी मदद से बने। वहीं इन अपराधियों के डासना जेल जाने के अलावा इनके शामली में एक हत्या में शामिल होने की बात भी सामने आ रही है।
सबसे ज्यादा तो दादी ने उलझाया पुलिस को
हरदुआगंज में हुई मुठभेड़ के संबंध में मारे गए अपराधियों पर दर्ज हुए धारा 307 के मुकदमे की विवेचना इंस्पेक्टर मडराक को सौंपी गई है। इसी मुकदमे में बयान आदि दर्ज कराने के सिलसिले में दोनों परिवारों की महिलाओं को विवेचक द्वारा महिला पुलिस की मदद से शनिवार को अतरौली थाने पर बुलाया गया। जहां इन महिलाओं से अलग-अलग बातचीत हुई। खास बात इस दौरान जब मुश्तकीम की दादी रफीकन से बात हुई तो वह पुलिस को उसके ही सवालों में उलझाने लगी। पुलिस की मानें तो वह अपने पिता, दादा, पति व सही पता याद न होने जैसे तर्क देने लगी। इसी बीच अलग-अलग बातचीत में पुरुलिया का जिक्र सामने आया। इससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि यह परिवार बिहार अब झारखंड के बलरामपुर का न होकर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का है। शाम को एसएसपी अजय कुमार साहनी व अन्य पुलिस अफसर भी अतरौली पहुंचे और जांच टीमों द्वारा अब तक जुटाए गए तथ्यों की समीक्षा कर आगे के लिए निर्देश दिए।
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आखिर क्यों गायब मुस्तकीम का पिता
मुठभेड़ में नौशाद के साथ मुस्तकीम के मारे जाने की सूचना के बाद भी मुस्तकीम का पिता इरफान अभी तक सामने नहीं आया है। न तो वो पुलिस के सामने आ रहा और न ही अपने घर लौटा है। आखिर वह कहां गायब है और वो किस डर से गायब है। उसके गायब होने से तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। परिजनों ने बताया कि मुठभेड़ से तीन दिन पहले जेल गए यासीन आदि को 16 सितंबर को पुलिस ने घर से उठाया था। तभी से इरफान भी गायब है। उनके बारे में किसी को भी पता नहीं है। वहीं नौशाद के पिता रहमान दूसरी शादी कर चुका है और वह नौशाद के परिवार से नाता तोड़ चुके है। इसलिए कई वर्ष से इनसे मिलने भी नहीं आया।
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महिलाओं से मिलने थाने गई सामाजिक कार्यकत्री की गाड़ी सीज
पुलिस ने शाहिन, शबाना और रफीकन के थाने बुलाया था। दोपहर में सामाजिक कार्यकत्री मारिया आलम इस परिवार से मिलने अतरौली पहुंचीं। जहां मुस्तकीम की पत्नी हिना ने बताया कि उन्हें पुलिस ने थाने में बैठाए रखा है। इस खबर पर मारिया आलम थाने पहुंची। उनके साथ कुछ महिलाएं भी थीं। पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने तीनों महिलाओं से मिलने की बात की तो पुलिस ने मिलने नहीं दिया। इससे महिलाओं की पुलिस से नोकझोंक हो गई। मारिया आलम का कहना है कि पुलिस ने उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उनकी गाड़ी सीज कर दी।
क्यों झूठ बोल रहा परिवार: एसएसपी
एसएसपी अजय कुमार साहनी का कहना है कि अभी तक मुठभेड़ में मारे गए नौशाद व मुस्तकीम के सही पते सत्यापित नहीं हो पाए हैं। अतरौली में पिछले 9 माह से रहने से पहले की जानकारी पर परिवार द्वारा छर्रा में रहना और वहीं से आधार कार्ड आदि बनवाने की बात कही जा रही है। मगर अब तक की जांच में छर्रा में उनका पता सत्यापित नहीं हो पाया है। इससे लग रहा है कि परिवार झूठ बोल रहा है। वहीं परिजनों से पूछताछ में ही इनके पश्चिम बंगाल के पुरुलिया से पलायित होकर आने की बात सामने आई है। अब तक परिजन बिहार का बताकर झूठ क्यों बोल रहे थे। फिलहाल पता सत्यापन कराने का काम जारी है। दो टीमें इसी काम में लगी हैं। चाहे मूल पता कहीं से हो, जल्द ही तस्वीर साफ होगी। इनके अपराध को लेकर डासना जेल जाने के अलावा शामली में हत्या की बात भी सामने आई है। पूरा क्राइम रिकार्ड जल्द ही सामने होगा।
मुस्तकीम व नौशाद के परिजनों को इंसाफ मिले: उलेमा काउंसिल
राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के मंडल अध्यक्ष निसार अहमद की अगुवाई में एक प्रतिनिधि मंडल हरदुआगंज मुठभेड़ में मारे गए मुस्तकीम व नौशाद के परिजनों से मिला। परिजनों को प्रतिनिधि मंडल ने मदद का आश्वासन दिया। मंडल अध्यक्ष निसार अहमद व भारतीय समाज सेवक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी इफराहीम हुसैन ने कहा कि शुक्रवार को एटा के लोगों द्वारा मुठभेड़ को लेकर की गई पत्रकार वार्ता में उन्हें बुलाया गया था। पत्रकार वार्ता करने वालों ने उन्हें पूरे प्रकरण से अवगत नहीं कराया था और न ही इस प्रकरण में पूरी बात मालूम थी। उन्होंने कहा कि जब मृतक के परिजनों से मिले, तब हकीकत मालूम हुई। जिस तरह साधु के हत्यारों की तलाश में पुलिस जुटी है, उसी तरह मुस्तकीम व नौशाद के परिजनों को भी इंसाफ मिलना चाहिए। वहीं उलेमा काउंसिल ने इस परिवार के साथ खड़े पूर्व विधायक जमीरउल्लाह को सलाह दी है कि वह ऐसे ही खड़े रहें। मगर बसपा से दूरी बना लें, क्योंकि बसपा ही उनका साथ नहीं देगी। प्रतिनिधि मंडल में सैयद अब्दुल्लाह, मोहम्मद इरशाद तूफानी, मुदस्सिर, एजाज आरिफ आदि मौजूद रहे।