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बढ़ सकती हैं जेल गए बसपा पार्षद सद्दाम की मुश्किलें
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
जमालपुर में भाजपा के चुनाव प्रचार के विरोध और मारपीट की घटना के बाद शांति भंग के आरोप में जेल भेजे गए बसपा पार्षद सद्दाम की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चूंकि सद्दाम पर एएमयू में फरवरी में हुए घटनाक्रम के दो मुकदमों में भी आरोप है। इसलिए भाजपाइयों ने सद्दाम के खिलाफ उस मामले में भी कार्रवाई की बात अधिकारियों तक रखी है।
इस पर डीआईजी ने एसआईटी को निर्देशित किया है कि उन दोनों मुकदमों में सद्दाम के खिलाफ नामजदगी व साक्ष्य देख लें। अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ उन दोनों मुकदमों में वारंट बनाकर अदालत में तलब कर तामील कराया जाए। अगर इन दोनों मुकदमों के वारंट पहुंचते हैं तो सद्दाम की रिहाई अटक सकती है। बाकी तीन लोगों को जरूर शांति भंग में मुचलकों पर जमानत देकर रिहा किया जा सकेगा।
दो दिन पहले जमालपुर में हुए घटनाक्रम में पुलिस ने सद्दाम, सपा पार्षद पति असलम नूर, फारूक व इमरान को शांति भंग में जेल भेजा था। हालांकि भाजपा की ओर से इस मारपीट मामले में तहरीर देकर मुकदमे की मांग भी की गई। मगर अभी तक पुलिस ने जांच के नाम पर वह मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
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वहीं इस मामले में सद्दाम को लेकर भाजपाइयों की ओर से लगातार पुलिस अधिकारियों पर पूर्व के मुकदमों में कार्रवाई के लिए पैरोकारी की जा रही है। इसे लेकर एसएसपी व डीआईजी तक से भाजपाइयों की ओर से कहा गया है।
चूंकि सद्दाम एएमयू में फरवरी में भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष मुकेश पर हमले व डॉ. निशित व बरौली विधायक पौत्र अजय सिंह पर हमले के मुकदमों में आरोपी है। इसलिए उन मुकदमों में वारंट भेजने का अनुरोध किया गया है।
इसे लेकर डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि यह तथ्य उनके संज्ञान में लाया गया था। इस पर एसआईटी के विवेचकों को निर्देशित किया गया है कि एएमयू प्रकरण के मुकदमों में अगर सद्दाम नामजद है और उसके खिलाफ साक्ष्य मिलते हैं तो जांच कर साक्ष्य संकलित कर उन मुकदमों में सद्दाम को अदालत में तलब कराकर वारंट तामील करा दिया जाए।
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जमालपुर में भाजपा के चुनाव प्रचार के विरोध और मारपीट की घटना के बाद शांति भंग के आरोप में जेल भेजे गए बसपा पार्षद सद्दाम की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चूंकि सद्दाम पर एएमयू में फरवरी में हुए घटनाक्रम के दो मुकदमों में भी आरोप है। इसलिए भाजपाइयों ने सद्दाम के खिलाफ उस मामले में भी कार्रवाई की बात अधिकारियों तक रखी है।
इस पर डीआईजी ने एसआईटी को निर्देशित किया है कि उन दोनों मुकदमों में सद्दाम के खिलाफ नामजदगी व साक्ष्य देख लें। अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ उन दोनों मुकदमों में वारंट बनाकर अदालत में तलब कर तामील कराया जाए। अगर इन दोनों मुकदमों के वारंट पहुंचते हैं तो सद्दाम की रिहाई अटक सकती है। बाकी तीन लोगों को जरूर शांति भंग में मुचलकों पर जमानत देकर रिहा किया जा सकेगा।
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दो दिन पहले जमालपुर में हुए घटनाक्रम में पुलिस ने सद्दाम, सपा पार्षद पति असलम नूर, फारूक व इमरान को शांति भंग में जेल भेजा था। हालांकि भाजपा की ओर से इस मारपीट मामले में तहरीर देकर मुकदमे की मांग भी की गई। मगर अभी तक पुलिस ने जांच के नाम पर वह मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
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वहीं इस मामले में सद्दाम को लेकर भाजपाइयों की ओर से लगातार पुलिस अधिकारियों पर पूर्व के मुकदमों में कार्रवाई के लिए पैरोकारी की जा रही है। इसे लेकर एसएसपी व डीआईजी तक से भाजपाइयों की ओर से कहा गया है।
चूंकि सद्दाम एएमयू में फरवरी में भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष मुकेश पर हमले व डॉ. निशित व बरौली विधायक पौत्र अजय सिंह पर हमले के मुकदमों में आरोपी है। इसलिए उन मुकदमों में वारंट भेजने का अनुरोध किया गया है।
इसे लेकर डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि यह तथ्य उनके संज्ञान में लाया गया था। इस पर एसआईटी के विवेचकों को निर्देशित किया गया है कि एएमयू प्रकरण के मुकदमों में अगर सद्दाम नामजद है और उसके खिलाफ साक्ष्य मिलते हैं तो जांच कर साक्ष्य संकलित कर उन मुकदमों में सद्दाम को अदालत में तलब कराकर वारंट तामील करा दिया जाए।