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मडराक गैंगरेप कांड में आरोपी का पॉलीग्राफी कराएगी सीबीआई
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
मडराक क्षेत्र में दो साल पुराने गैंगरेप प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मुकदमा दर्ज करने के बाद जांच कर रही सीबीआई लखनऊ की टीम मुकदमे के एक आरोपी का पॉलीग्राफी टेस्ट भी कराएगी। इसके लिए टीम ने अदालत से मंजूरी मांगी है। वहीं जांच टीम मंगलवार को साक्ष्य संकलन के लिए जिला मुख्यालय पहुंची और यहां के रिकार्ड से पुराने साक्ष्य एकत्रित किए। इधर, टीम घटनास्थल पर भी मौका मुआयना करने गई।
बता दें कि पूर्व में थाना पुलिस के स्तर से प्रकरण में गैंगरेप का होना नहीं पाया गया था और मुकदमे में महज मारपीट की धाराओं में चार्जशीट दायर की थी। थाना पुलिस पर इस प्रकरण में सवाल खड़े करते हुए पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अगस्त 2018 में जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
सीबीआई लखनऊ में दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक मडराक थाना क्षेत्र में 13 सितंबर 2016 को दिन दहाड़े एक घर में घुसकर कुछ दबंग लोगों ने खाना बना रही एक महिला के साथ पिस्टल की नोंक पर गैंगरेप किया।
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स्थानीय थाने पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और भगा दिया गया था। इसकी शिकायत पीड़ित परिवार ने 14 सितंबर को एसएसपी कार्यालय पर दी और आईजीआरएस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से की थी। तब करीब दस दिन बाद मामले में गांव के अन्नू, लोकेश व मनीष आदि पर मुकदमा तो दर्ज हुआ, मगर कार्रवाई के नाम पर महज मारपीट की धाराओं में चार्जशीट दायर कर दी। इस पर पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली और सीबीआई को मामला सुपुर्द किया गया।
जिसमें जांच कर रही लखनऊ सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच टीम मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंची। इस दौरान एसएसपी दफ्तर पर मौजूद अधिकारियों से प्रकरण में वार्ता कर 14 सितंबर को एसएसपी दफ्तर में पीड़ित द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र, इसके बाद प्रकरण में दाखिल किए गए शपथ पत्र आदि के रिकार्ड देखे। यहां एसपी देहात से मुलाकात में बताया गया कि मामले में पॉलीग्राफी टेस्ट की अनुमति भी मांगी गई है। एसपी देहात मणीलाल पाटीदार ने टीम को जरूरी साक्ष्य संकलित भी कराए।
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मडराक क्षेत्र में दो साल पुराने गैंगरेप प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मुकदमा दर्ज करने के बाद जांच कर रही सीबीआई लखनऊ की टीम मुकदमे के एक आरोपी का पॉलीग्राफी टेस्ट भी कराएगी। इसके लिए टीम ने अदालत से मंजूरी मांगी है। वहीं जांच टीम मंगलवार को साक्ष्य संकलन के लिए जिला मुख्यालय पहुंची और यहां के रिकार्ड से पुराने साक्ष्य एकत्रित किए। इधर, टीम घटनास्थल पर भी मौका मुआयना करने गई।
बता दें कि पूर्व में थाना पुलिस के स्तर से प्रकरण में गैंगरेप का होना नहीं पाया गया था और मुकदमे में महज मारपीट की धाराओं में चार्जशीट दायर की थी। थाना पुलिस पर इस प्रकरण में सवाल खड़े करते हुए पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अगस्त 2018 में जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
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सीबीआई लखनऊ में दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक मडराक थाना क्षेत्र में 13 सितंबर 2016 को दिन दहाड़े एक घर में घुसकर कुछ दबंग लोगों ने खाना बना रही एक महिला के साथ पिस्टल की नोंक पर गैंगरेप किया।
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स्थानीय थाने पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और भगा दिया गया था। इसकी शिकायत पीड़ित परिवार ने 14 सितंबर को एसएसपी कार्यालय पर दी और आईजीआरएस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से की थी। तब करीब दस दिन बाद मामले में गांव के अन्नू, लोकेश व मनीष आदि पर मुकदमा तो दर्ज हुआ, मगर कार्रवाई के नाम पर महज मारपीट की धाराओं में चार्जशीट दायर कर दी। इस पर पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली और सीबीआई को मामला सुपुर्द किया गया।
जिसमें जांच कर रही लखनऊ सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच टीम मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंची। इस दौरान एसएसपी दफ्तर पर मौजूद अधिकारियों से प्रकरण में वार्ता कर 14 सितंबर को एसएसपी दफ्तर में पीड़ित द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र, इसके बाद प्रकरण में दाखिल किए गए शपथ पत्र आदि के रिकार्ड देखे। यहां एसपी देहात से मुलाकात में बताया गया कि मामले में पॉलीग्राफी टेस्ट की अनुमति भी मांगी गई है। एसपी देहात मणीलाल पाटीदार ने टीम को जरूरी साक्ष्य संकलित भी कराए।