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नौशाद-मुस्तकीम के साथी बने साधुओं की हत्या में साजिश के आरोपी
Updated Fri, 14 Dec 2018 02:01 AM IST
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
पालीमुकीमपुर, अतरौली और हरदुआगंज में हुई सिलसिलेवार साधुओं की हत्या के मुकदमे में पुलिस ने दो और बदमाशों के नाम शामिल किए हैं। हरदुआगंज पुलिस ने कलाई बंबा के तिहरे हत्याकांड में इन दोनों के नाम एटा जेल में बैठकर हत्याकांड की साजिश रचने के आरोप में बढ़ाए हैं और इनकी रिमांड लेने के लिए अदालत में अपील की है।
इंस्पेक्टर डॉ. विनोद सिंह के अनुसार विवेचना के दौरान कलाई बंबा के दुर्रेनी देवी मंदिर पर साधु व पास के खेत में दंपती की हत्या की साजिश रचने में मारे गए मुस्तकीम गैंग के ही असगर पुत्र बाबू फकीर निवासी नई बस्ती, चमड़ा फैक्ट्री के पीछे हापुड़ और पासा उर्फ मुशर्रफ पुत्र अलीउद्दीन निबासी नई बस्ती जामा मस्जिद, उझानी बदायूं का नाम प्रकाश में आया जो इस समय एटा के मुफ्ती की हत्या के आरोप में एटा जेल में हैं।
दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। एटा में वर्ष 2016 में हुए मुफ्ती शहजादा हत्याकांड के मुख्य आरोपी साबिर अली उर्फ दिनेश प्रताप सिंह पुत्र बीरबल जाटव किदवई नगर एटा ने मुफ्ती पक्ष को लोगों को फंसाने यह घटनाएं की थीं। इसका 18 सितंबर को खुलासा किया गया था और 20 सितंबर को नौशाद व मुस्तकीम मुठभेड़ में मारे गए थे। इस मुकदमे में जेल गए आरोपियों ने यह स्वीकारा कि जेल में निरुद्ध असगर व पाशा ने ही साबिर से यह सुपारी तय की थी कि हत्याएं हम कराएंगे और तुम्हारे विरोधियों का नाम आएगा।
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साबिर ने भी इन दोनों की जमानत कराने का ठेका लिया था। मगर जमानत कराने में सफलता नहीं मिली थी। इसके चलते इन दोनों को मुकदमे में साजिश रचने का आरोपी बनाया है। जल्द ही इन्हें वी वारंट पर यहां लाकर रिमांड पर लिया जाएगा।
नहीं आया एहसान खान, तलाशती रही पुलिस
मारे गए साधु व दंपती के परिवार को धमकाने व आरोपियों के पक्ष में बयान दिलाने के लिए दबाव डालने के दो मुकदमों का आरोपी आजमगढ़ निवासी नेता एहसान खान का गुरुवार को अलीगढ़ कलेक्ट्रेट पर धरने के लिए आना प्रस्तावित था। इसे लेकर पुलिस तैयारी में रही। मगर वह नहीं आया। न किसी तरह का धरना भी जिला मुख्यालय पर हुआ। बता दें कि एहसान की ओर से पिछले दिनों अतरौली भ्रमण के दौरान 13 दिसंबर को कलेक्ट्रेट पर धरने की बात कही गई।
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पालीमुकीमपुर, अतरौली और हरदुआगंज में हुई सिलसिलेवार साधुओं की हत्या के मुकदमे में पुलिस ने दो और बदमाशों के नाम शामिल किए हैं। हरदुआगंज पुलिस ने कलाई बंबा के तिहरे हत्याकांड में इन दोनों के नाम एटा जेल में बैठकर हत्याकांड की साजिश रचने के आरोप में बढ़ाए हैं और इनकी रिमांड लेने के लिए अदालत में अपील की है।
इंस्पेक्टर डॉ. विनोद सिंह के अनुसार विवेचना के दौरान कलाई बंबा के दुर्रेनी देवी मंदिर पर साधु व पास के खेत में दंपती की हत्या की साजिश रचने में मारे गए मुस्तकीम गैंग के ही असगर पुत्र बाबू फकीर निवासी नई बस्ती, चमड़ा फैक्ट्री के पीछे हापुड़ और पासा उर्फ मुशर्रफ पुत्र अलीउद्दीन निबासी नई बस्ती जामा मस्जिद, उझानी बदायूं का नाम प्रकाश में आया जो इस समय एटा के मुफ्ती की हत्या के आरोप में एटा जेल में हैं।
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दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। एटा में वर्ष 2016 में हुए मुफ्ती शहजादा हत्याकांड के मुख्य आरोपी साबिर अली उर्फ दिनेश प्रताप सिंह पुत्र बीरबल जाटव किदवई नगर एटा ने मुफ्ती पक्ष को लोगों को फंसाने यह घटनाएं की थीं। इसका 18 सितंबर को खुलासा किया गया था और 20 सितंबर को नौशाद व मुस्तकीम मुठभेड़ में मारे गए थे। इस मुकदमे में जेल गए आरोपियों ने यह स्वीकारा कि जेल में निरुद्ध असगर व पाशा ने ही साबिर से यह सुपारी तय की थी कि हत्याएं हम कराएंगे और तुम्हारे विरोधियों का नाम आएगा।
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साबिर ने भी इन दोनों की जमानत कराने का ठेका लिया था। मगर जमानत कराने में सफलता नहीं मिली थी। इसके चलते इन दोनों को मुकदमे में साजिश रचने का आरोपी बनाया है। जल्द ही इन्हें वी वारंट पर यहां लाकर रिमांड पर लिया जाएगा।
नहीं आया एहसान खान, तलाशती रही पुलिस
मारे गए साधु व दंपती के परिवार को धमकाने व आरोपियों के पक्ष में बयान दिलाने के लिए दबाव डालने के दो मुकदमों का आरोपी आजमगढ़ निवासी नेता एहसान खान का गुरुवार को अलीगढ़ कलेक्ट्रेट पर धरने के लिए आना प्रस्तावित था। इसे लेकर पुलिस तैयारी में रही। मगर वह नहीं आया। न किसी तरह का धरना भी जिला मुख्यालय पर हुआ। बता दें कि एहसान की ओर से पिछले दिनों अतरौली भ्रमण के दौरान 13 दिसंबर को कलेक्ट्रेट पर धरने की बात कही गई।
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