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निलंबित एआरटीओ ज्वाइनिंग को पहुंचे आरटीओ
Updated Sat, 13 Jan 2018 01:13 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
फर्जीवाड़ा एवं धोखाधड़ी के मामले में जेल गए एआरटीओ बी प्रसाद आठ जनवरी को आरटीओ आफिस में अपनी ज्वाइनिंग के लिए आ गए। हालांकि आरटीओ ने उन्हें निलंबन का आदेश दिखाते हुए मुख्यालय जाने की सलाह देकर उल्टे पैर लौटा दिया, लेकिन इस बीच आफिस में काफी चर्चा थी कि निलंबन की जानकारी गिरफ्तार हुए एआरटीओ को क्यों नहीं थी।
इसके पीछे आफिस में कानाफूसी हो रही थी कि गिरफ्तारी और जेल जाने के दौरान उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि उनके जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद तत्काल बाद पुरानी डेट में निलंबन का आदेश कर यहां भेज दिया।
आठ नवंबर 2017 को अलीगढ़ में तैनात एआरटीओ (प्रशासन) बी प्रसाद को हरदोई पुलिस ने फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया। हरदोई पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। इस दौरान आरटीओ राधेश्याम पूरे दिन उनका बचाव करते रहे, लेकिन दूसरे दिन हाथ खड़े कर दिए। पुलिस ने अगले दिन उन्हें कोर्ट में पेश किया, कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया।
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इस बीच कई बार पूछे जाने के बाद भी आरटीओ ने एआरटीओ के खिलाफ हुई विभागीय कार्यवाही की जानकारी नहीं दी। इधर, 22 दिसंबर को एआरटीओ को हाईकोर्ट से बेल मिल गई और वह सात जनवरी को जेल से रिहा हो गए। जेल से रिहा होने के अगले दिन आठ जनवरी को ही वह अलीगढ़ में ज्वाइनिंग को पहुंच गए। इस बीच आरटीओ राधेश्याम से उन्होंने अकेले में मुलाकात की और लौट गए।
महीनों तक एआरटीओ बी प्रसाद के नाम की नेमप्लेट लगी रही आफिस के बाहर
-एआरटीओ बी प्रसाद के गिरफ्तार होने के महीनों बाद तक उनके कार्यालय के बाहर नेमप्लेट लगी रही। इस संबंध में कई बार मीडिया ने उनसे पूछा तो हर बार आरटीओ विभागीय कार्यवाही का हवाला देकर मामला टाल देते। एक दिन किसी शरारती तत्व ने इस नेमप्लेट पर अपना गुस्सा उतारते हुए तोड़ दिया। इसके बाद आज भी उनके कार्यालय के अंदर नेमप्लेट रखी हुई है।
एआरटीओ बी प्रसाद को आठ अक्तूबर को निलंबित कर दिया था। इस मामले में विभागीय अधिकारी पीडी मालवीय जांच कर रहे हैं। उनकी जांच रिपोर्ट के बाद ही ज्वाइनिंग दी जा सकती है। वह कार्यालय ज्वाइनिंग के लिए आए थे, लेकिन उन्हें निलंबन का आदेश दिखाकर वापस कर दिया।
राधेश्याम, आरटीओ अलीगढ़
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फर्जीवाड़ा एवं धोखाधड़ी के मामले में जेल गए एआरटीओ बी प्रसाद आठ जनवरी को आरटीओ आफिस में अपनी ज्वाइनिंग के लिए आ गए। हालांकि आरटीओ ने उन्हें निलंबन का आदेश दिखाते हुए मुख्यालय जाने की सलाह देकर उल्टे पैर लौटा दिया, लेकिन इस बीच आफिस में काफी चर्चा थी कि निलंबन की जानकारी गिरफ्तार हुए एआरटीओ को क्यों नहीं थी।
इसके पीछे आफिस में कानाफूसी हो रही थी कि गिरफ्तारी और जेल जाने के दौरान उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि उनके जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद तत्काल बाद पुरानी डेट में निलंबन का आदेश कर यहां भेज दिया।
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आठ नवंबर 2017 को अलीगढ़ में तैनात एआरटीओ (प्रशासन) बी प्रसाद को हरदोई पुलिस ने फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया। हरदोई पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। इस दौरान आरटीओ राधेश्याम पूरे दिन उनका बचाव करते रहे, लेकिन दूसरे दिन हाथ खड़े कर दिए। पुलिस ने अगले दिन उन्हें कोर्ट में पेश किया, कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया।
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इस बीच कई बार पूछे जाने के बाद भी आरटीओ ने एआरटीओ के खिलाफ हुई विभागीय कार्यवाही की जानकारी नहीं दी। इधर, 22 दिसंबर को एआरटीओ को हाईकोर्ट से बेल मिल गई और वह सात जनवरी को जेल से रिहा हो गए। जेल से रिहा होने के अगले दिन आठ जनवरी को ही वह अलीगढ़ में ज्वाइनिंग को पहुंच गए। इस बीच आरटीओ राधेश्याम से उन्होंने अकेले में मुलाकात की और लौट गए।
महीनों तक एआरटीओ बी प्रसाद के नाम की नेमप्लेट लगी रही आफिस के बाहर
-एआरटीओ बी प्रसाद के गिरफ्तार होने के महीनों बाद तक उनके कार्यालय के बाहर नेमप्लेट लगी रही। इस संबंध में कई बार मीडिया ने उनसे पूछा तो हर बार आरटीओ विभागीय कार्यवाही का हवाला देकर मामला टाल देते। एक दिन किसी शरारती तत्व ने इस नेमप्लेट पर अपना गुस्सा उतारते हुए तोड़ दिया। इसके बाद आज भी उनके कार्यालय के अंदर नेमप्लेट रखी हुई है।
एआरटीओ बी प्रसाद को आठ अक्तूबर को निलंबित कर दिया था। इस मामले में विभागीय अधिकारी पीडी मालवीय जांच कर रहे हैं। उनकी जांच रिपोर्ट के बाद ही ज्वाइनिंग दी जा सकती है। वह कार्यालय ज्वाइनिंग के लिए आए थे, लेकिन उन्हें निलंबन का आदेश दिखाकर वापस कर दिया।
राधेश्याम, आरटीओ अलीगढ़