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Aligarh News: होलिका दहन के लिए बना रहे गोकाष्ठ, गांव में लगाई मशीन
Sat, 15 Feb 2025 01:49 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Sat, 15 Feb 2025 01:49 AM IST
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होलिका दहन, हवन, यज्ञ, धार्मिक अनुष्ठान से लेकर अंतिम संस्कार तक गोकाष्ठ का प्रयोग बढ़ रहा है। लकड़ी महंगी होने से इसकी मांग बढ़ी है। क्षेत्र के गांव सलेमापुर के दो युवा सुमित व सुधीर अत्री भी इसको बना रहे हैं। गांव में ही मशीन लगाकर वे इसका उत्पादन कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन वर्ष से सरकारी नौकरी की तैयारी में जुटे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। अब दोनों ने गोकाष्ठ मशीन लगाई है। एक घंटे में करीब 500 किलो गोबर की लकड़ी बनकर तैयार हो जाती हैं। एक गीली लकड़ी का वजन 3 किलोग्राम होता है जो चार दिनों में सूखकर 1.5 किलोग्राम की रह जाती है। इसकी कीमत 7 रुपये है। गोशालाओं से एक ट्रॉली गोबर 2500 रुपये में खरीदते हैं। इससे करीब 1300 लकड़ियां बनतीं हैं। मशीन में लकड़ी बनाने के अलग-अलग सांचे हैं। हवन की लकड़ी गोबर में हवन सामग्री व कपूर मिलाकर अलग सांचे बनाते हैं। मार्च में होली है, इसके लिए भी गोकाष्ठ बना रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन वर्ष से सरकारी नौकरी की तैयारी में जुटे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। अब दोनों ने गोकाष्ठ मशीन लगाई है। एक घंटे में करीब 500 किलो गोबर की लकड़ी बनकर तैयार हो जाती हैं। एक गीली लकड़ी का वजन 3 किलोग्राम होता है जो चार दिनों में सूखकर 1.5 किलोग्राम की रह जाती है। इसकी कीमत 7 रुपये है। गोशालाओं से एक ट्रॉली गोबर 2500 रुपये में खरीदते हैं। इससे करीब 1300 लकड़ियां बनतीं हैं। मशीन में लकड़ी बनाने के अलग-अलग सांचे हैं। हवन की लकड़ी गोबर में हवन सामग्री व कपूर मिलाकर अलग सांचे बनाते हैं। मार्च में होली है, इसके लिए भी गोकाष्ठ बना रहे हैं।
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