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आइसोलेशन वार्ड में भर्ती एमबीबीएस छात्र कर रहा ऑनलाइन पढ़ाई
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आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कस्बा खैर निवासी एमबीबीएस छात्र आदित्य पढ़ाई करते हुए।
- फोटो : CITY OFFICE
पंकज रावत
दुनिया में इस समय कोरोना महामारी को लेकर हाहाकार मचा है। अभी तक इस महामारी की न कोई दवा आई और न ही वैक्सीन बनी है। ऐसे में कोरोना के मरीज डरकर नहीं बल्कि अपने हौसले के बल पर डटकर इस बीमारी का मुकाबला कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ उदाहरण खैर में कोरोना संक्रमित मिले एमबीबीएस छात्र ने पेश किया है। वह 23 जून से अतरौली के एल-वन हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती है। उसकी हालात में लगातार सुधार हो रहा है। पढ़ाई नहीं छोड़ी है। वह अस्पताल के बेड पर ही रोजाना कॉलेज की ऑनलाइन क्लास अटैंड कर रहा है, जो कि अन्य मरीजों के लिए एक मिसाल है।
कस्बा खैर निवासी एमबीबीएस छात्र आदित्य शर्मा कस्बे के ही नर्सिंगहोम संचालक डॉ. महेश शर्मा का छोटा बेटा है। बड़ा बेटा रामकृष्ण शर्मा भी डॉक्टर है। आदित्य हापुड़ मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहा है। वह लॉकडाउन से पूर्व ही 15 मार्च को घर आ गया था। एक अप्रैल से उसकी ऑनलाइन कक्षा शुरू हो गईं। इसी बीच पिता कोरोना संक्रमित हो गए। उन्हें अतरौली में भर्ती कराया गया और परिवार के सभी लोगों के सैंपल लिए गए।
23 जून को दोनों भाइयों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। लेकिन वह घबराए नहीं और सकारात्मक रहने व बीमारी को अवसर के रूप में लेने के संदेश के साथ काम शुरू किया। अस्पताल में भर्ती होने से पूर्व अपनी कॉपी किताब और लैपटॉप भी साथ रख लिया। सुबह साढ़े नौ बजे से दोपहर दो बजे तक ऑनलाइन क्लास चलती है। बाद में क्लास में दिया गया काम और सेल्फ स्टडी जारी रहती है। ऐसे में आदित्य के कम से कम 12 घंटे पढ़ाई में गुजर रहे हैं। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय से ले रहे हैं। तीन दिन कैसे बीत गए पता ही नहीं चला।
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आदित्य कहते हैं इस महामारी से डरने के बजाय डटकर मुकाबला करें, सकारात्मक सोचें। उन्होंने प्रशासन व डॉक्टरों के प्रयासों को सराहा। उनकी हिम्मत की हर कोई दाद दे रहा है। उन्होंने सभी से इस लड़ाई में सहयोग की अपील की तथा बिना डरे लड़ने की बात कही है।
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दुनिया में इस समय कोरोना महामारी को लेकर हाहाकार मचा है। अभी तक इस महामारी की न कोई दवा आई और न ही वैक्सीन बनी है। ऐसे में कोरोना के मरीज डरकर नहीं बल्कि अपने हौसले के बल पर डटकर इस बीमारी का मुकाबला कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ उदाहरण खैर में कोरोना संक्रमित मिले एमबीबीएस छात्र ने पेश किया है। वह 23 जून से अतरौली के एल-वन हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती है। उसकी हालात में लगातार सुधार हो रहा है। पढ़ाई नहीं छोड़ी है। वह अस्पताल के बेड पर ही रोजाना कॉलेज की ऑनलाइन क्लास अटैंड कर रहा है, जो कि अन्य मरीजों के लिए एक मिसाल है।
कस्बा खैर निवासी एमबीबीएस छात्र आदित्य शर्मा कस्बे के ही नर्सिंगहोम संचालक डॉ. महेश शर्मा का छोटा बेटा है। बड़ा बेटा रामकृष्ण शर्मा भी डॉक्टर है। आदित्य हापुड़ मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहा है। वह लॉकडाउन से पूर्व ही 15 मार्च को घर आ गया था। एक अप्रैल से उसकी ऑनलाइन कक्षा शुरू हो गईं। इसी बीच पिता कोरोना संक्रमित हो गए। उन्हें अतरौली में भर्ती कराया गया और परिवार के सभी लोगों के सैंपल लिए गए।
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23 जून को दोनों भाइयों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। लेकिन वह घबराए नहीं और सकारात्मक रहने व बीमारी को अवसर के रूप में लेने के संदेश के साथ काम शुरू किया। अस्पताल में भर्ती होने से पूर्व अपनी कॉपी किताब और लैपटॉप भी साथ रख लिया। सुबह साढ़े नौ बजे से दोपहर दो बजे तक ऑनलाइन क्लास चलती है। बाद में क्लास में दिया गया काम और सेल्फ स्टडी जारी रहती है। ऐसे में आदित्य के कम से कम 12 घंटे पढ़ाई में गुजर रहे हैं। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय से ले रहे हैं। तीन दिन कैसे बीत गए पता ही नहीं चला।
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आदित्य कहते हैं इस महामारी से डरने के बजाय डटकर मुकाबला करें, सकारात्मक सोचें। उन्होंने प्रशासन व डॉक्टरों के प्रयासों को सराहा। उनकी हिम्मत की हर कोई दाद दे रहा है। उन्होंने सभी से इस लड़ाई में सहयोग की अपील की तथा बिना डरे लड़ने की बात कही है।