Aligarh: 2.5 करोड़ हर साल नालों की सफाई पर खर्च, दावों में चमक रहे नाले, सड़कों पर 36 घंटे बाद भी जलभराव
रामघाट मार्ग पर एडीए कॉलोनी, विष्णुपुरी, सुदामापुरी, गुरुद्वारा रोड, छर्रा अड्डा, नौरंगाबाद, मामू भांजा, अचलताल, गोविंदनगर, शाहजमाल ईदगाह रोड, तुर्कमानगेट समेत विभिन्न इलाकों में मानसून में बारिश के दौरान सड़कें डूब जाती हैं, जिससे घरों और दुकानों में पानी भर जाता है।
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अलीगढ़ शहर को स्मार्ट बनाने के बड़े-बड़े दावे और हर साल की तरह इस बार भी नालों की सफाई पर खर्च हुए ढाई करोड़ रुपये मानसून की पहली बारिश में ही बह गए। हालात यह है कि बुधवार को हुई बारिश के बाद से गूलर रोड, खैर रोड और मेलरोज बाईपास जैसे निचले इलाके 36 घंटे बाद शुक्रवार को भी टापू बने हुए हैं। हर साल बरसात में यही हालात होते हैं।
शहर को नगर निगम का दर्जा मिले करीब 31 साल बीत चुके हैं। इस अवधि में शहर की आबादी बढ़कर 17 लाख तक पहुंच गई है। शहर का क्षेत्रफल भी 42 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 70 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इस अनियोजित विकास ने शहर की जल निकासी प्रणाली पर भारी दबाव डाला है। तीन प्रमुख नालों पर बेहिसाब पानी की निकासी का दारोमदार है। सीवर की निकासी भी इन्हीं नालों से होती है, जिससे वे अक्सर चोक हो जाते हैं। शहर के छह प्रमुख जल संचय तालाब पूरी तरह खत्म हो गए हैं। बचे हुए पोखर व तालाब भी आधे-अधूरे और गंदगी से अटे पड़े हैं। ये वर्षा जल को समा नहीं पाते। पंचनगरी, कालीदह, विकास नगर और नई बस्ती के तालाब बिना बारिश के भी लबालब रहते हैं।
पहले आबादी कम थी, खुला क्षेत्र था। अब आबादी बढ़ गई, कॉलोनियां बन गई हैं। संसाधन नहीं बढ़ सके। जिम्मेदार विभागों को कार्ययोजना बनाकर काम करना होगा।-गजराज सिंह, क्वार्सी
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शहर भले ही स्मार्ट सिटी में आ गया हो, लेकिन सूरत नहीं बदली। वही गंदगी से बजबजाते नाले, कूड़े के ढेर और हर साल बारिश में जलभराव होता है।-जयप्रकाश वर्मा, क्वार्सी
वर्षों से शहर के लोग जलभराव से जूझ रहे हैं। हर बार यही दिलासा दी जाती है कि व्यवस्थाएं सुधरेंगी। यह सुनते-सुनते कई साल बीत गए।-नंद किशोर, नगला मानसिंह
इस बार पहली ही बारिश में शहर में कई जगह जलभराव हो गया। अगर समय रहते अफसरों ने ध्यान न दिया तो शहर में जलभराव से हालात बेहद खराब हो सकते हैं।-विनोद कुमार, कुंवर नगर
शहर की बड़ी समस्या अनियोजित विकास है। आबादी बढ़ने के साथ जरूरतें भी बढ़ गई हैं। कॉलोनियां बनने लगीं, अपार्टमेंट खड़े हो गए। नालों पर अतिक्रमण कर सीवर लाइन इसी में जोड़ दी। ड्रेनेज सिस्टम बैठने की यह भी वजह है। अब ड्रेनेज व सीवरेज के लिए मास्टर प्लान तैयार कराया जा रहा है। स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम, सीवरेज योजना व ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की योजनाएं इसी दिशा में बढ़ाए गए कदम हैं। नई सीवर लाइन भी बिछाई जा रही है। शहर के सभी नालों की बारिश से पूर्व ही सफाई कराई जा चुकी है।-प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त
इन इलाकों का बरसात में हो जाता है बुरा हाल
रामघाट मार्ग पर एडीए कॉलोनी, विष्णुपुरी, सुदामापुरी, गुरुद्वारा रोड, छर्रा अड्डा, नौरंगाबाद, मामू भांजा, अचलताल, गोविंदनगर, शाहजमाल ईदगाह रोड, तुर्कमानगेट समेत विभिन्न इलाकों में मानसून में बारिश के दौरान सड़कें डूब जाती हैं, जिससे घरों और दुकानों में पानी भर जाता है। निगम अधिकारी इस स्थिति के लिए शहर की कटोरेनुमा भौगोलिक स्थिति को जिम्मेदार ठहराते हैं।
नाले कीचड़-गंदगी से लबालब, ये है नालों की सफाई का हाल
अलीगढ़ शहर के एटा चुंगी बाईपास से गुजर रहे कमालपुर नाले की सफाई नहीं हो सकी है। मानसिंह नगला की पुलिया पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है। इसमें कीचड़ व गंदगी तैर रही है, कूड़े के अंबार लगे हुए हैं। अचलताल से हीरालाल बारहसैनी इंटर कॉलेज, श्री वार्ष्णेय महाविद्यालय की ओर जा रहा नाला गंदगी से अटा पड़ा है। शाहजमाल इलाका हर बार बारिश में डूब जाता है। इस बार भी वहां हालात ऐसे ही बने हुए हैं। नगर निगम ने यहां पंपिंग स्टेशन को सक्रिय कर दिया है। क्वार्सी चौराहे के पास पिछले एक महीने से नाला व सीवर लाइन की सफाई का काम चल रहा है। एक ओर की सड़क बंद है।
अंग्रेजों के जमाने की तीन ड्रेन पर टिकी है पूरी जल निकासी व्यवस्था
शहर की जल निकासी व्यवस्था अंग्रेजों के जमाने में बनीं तीन ड्रेन पर टिकी है। शहर की सीमा में 12.976 किलोमीटर में फैला अलीगढ़ ड्रेन पानी निकासी का मुख्य स्रोत है। इससे इतना ही लंबा जाफरी ड्रेन और 4.724 किलोमीटर लंबा मथुरा-इगलास रोड ड्रेन जुड़े हुए हैं। ये दोनों ड्रेन शहर के 29 संपर्क नालों का पानी अलीगढ़ ड्रेन तक पहुंचाते हैं, जहां से पानी काली नदी में गिरता है। बारिश के दौरान जाफरी ड्रेन कटने से पिछले साल श्रीनगर, शिव शक्ति कॉलोनी में पानी भर गया था। अलीगढ़ ड्रेन का एक हिस्सा कट गया था, जिससे मडराक के कई गांव जलमग्न हो गए।
नियमों की अनदेखी, अधिकारियों की लापरवाही शहर में ड्रेनेज सिस्टम को लेकर अब तक कोई मास्टर प्लान नहीं बन सका है। शहर में बिल्डर बिना उचित बुनियादी ढांचे के ही कॉलोनियों का निर्माण कर रहे हैं। पुराने शहर में सीवर लाइन भी अब चोक हो चुकी हैं। इन्हें भी नालों से जोड़ दिया गया है। नालों की तली में कीचड़ जमी होने से बारिश में ओवरफ्लो हो जाते हैं। अब जो नाले बनाए जा रहे हैं, उनकी गहराई छह फुट और चौड़ाई पांच फुट है।