Raju Srivastav: अलीगढ़ को हंसाकर गए थे राजू, रुख्सती में रुला गए; उदास और मायूस हैं लोग
राजू के प्रशंसक अलीगढ़ में खूब हैं। उनकी एक झलक पाने के लिए प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ती थी, लेकिन अब उनमें उदासी और मायूसी है, क्योंकि उनके दिलों पर राज करने वाला उनका पसंदीदा कलाकार राजू इस दुनिया को अलविदा कह चुका है।
विस्तार
कॉमेडी किंग राजू श्रीवास्तव के निधन से अलीगढ़ में उनके प्रशंसक गम में डूब गए। राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी यानी नुमाइश में राजू दो बार अपने फन का प्रदर्शन कर चुके हैं। उनके हंसगुल्लों पर कृष्णांजलि और कोहिनूर मंच श्रोताओं के ठहाकों से गूंज उठा था।
राजू के प्रशंसक अलीगढ़ में खूब हैं। उनकी एक झलक पाने के लिए प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ती थी, लेकिन अब उनमें उदासी और मायूसी है, क्योंकि उनके दिलों पर राज करने वाला उनका पसंदीदा कलाकार राजू इस दुनिया को अलविदा कह चुका है। पहली बार 2011 और दूसरी बार 2014 में नुमाइश के ला टर शो में आए, जबकि टेलीविजन के पटकथा लेखक मनोज संतोषी के निमंत्रण पर अलीगढ़ आए थे। इस दौरान वह समृद्धि टाउनशिप में भी रुके थे। आठ साल में राजू तीन दफा अलीगढ़ आए थे।
ताला और तालीम की थी तारीफ तो सड़क पर किया था तंज
बात 2014 की है, जब राजू श्रीवास्तव की कोहिनूर के मंच पर रंग-बिरंगी और तेज ध्वनि में आमद होती थी। कार्यक्रम था लॉ टर शो, जिनको सुनने के लिए प्रशंसकों को काफी भीड़ थी। जैसे चिर-परिचित अंदाज में गजोधर भैया ने अलीगढ़ वालों को नमस्ते सलाम किया। वैसे ही राजू-राजू की आवाज प्रशंसक करने लगे। यह उनकी प्रसिद्धि की दलील थी, जिसे उन्होंने कमाया था। संयोग से उस कार्यक्रम में शामिल होने का सौभाग्य मुझे यानी विष्णु कुमार बंटी को भी मिला। विष्णु कुमार ने बताया कि राजू श्रीवास्तव ने अलीगढ़ की ताला-तालीम की तारीफ की थी और जर्जर सड़क को लेकर तंज भी किया था। उन्होंने कहा कि वह बहुत जिंदाजिल दिल इंसान थे, जब उनके निधन की खबर आई तो वह दृश्य फिर से आंखों के सामने आ गया।
आखिरी मुलाकात में फिल्म से जुड़ीं खूब बातें की थीं
फिल्म निर्माता व ऑलिवुड फिल्म फेडरेशन के अध्यक्ष पंकज ने कहा कि हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव के बीमार होने से पहले लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में यूपी में फिल्म निर्माण व विकास पर उनसे चर्चा की की थी। पंकज ने बताया कि यह उनकी आखिरी मुलाकात रही। वह उनसे फिर मिलकर उन्हें अलीगढ़ आमंत्रित करना चाहते थे, जो उनके दुनिया से रुख्सत होने के बाद केवल एक सपना रह गया।
जब राजू ने कबूतर को किया था आजाद
टेलीविजन के पटकथा लेखक मनोज संतोषी हर साल हवन-यज्ञ और भंडारा करते हैं। उन्होंने हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव को 17 नवंबर 2018 को अपने यहां आमंत्रित किया था। इसके बाद वह समृद्धि टाउनशिप में भी रुके थे। रियल इस्टेट कारोबारी सुमित सराफ व माहेश्वरी क्रिएटिव क्लब के संरक्षक संजय माहेश्वरी ने बताया कि राजू करीब 15-16 घंटे अलीगढ़ में थे। उन्होंने करीब दो घंटे टाउनशिप के जिम में पसीना बहाया था। फिर कचौड़ी और जलेबी भी खाई थी। इसके बाद उन्होंने कबूतर को खुले आसमान में छोड़ा था। संजय माहेश्वरी ने उन्हें स्मृति चिह्न के रूप में ताला भी भेंट किया था।
इन्होंने जताया दुख
राजू श्रीवास्तव एक बहुत ही सज्जन और नेक इंसान थे। अभिनेता के साथ वह एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। -मनोज सक्सेना, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा
टेलीविजन के प्रसिद्ध हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव अपनी अदाकारी से लोगों के दिलों पर राज कर रहे थे। उनके निधन से फिल्मी दुनिया को भारी क्षति पहुंची है। -विवेक बंसल, कांग्रेस प्रदेश प्रभारी हरियाणा
राजू श्रीवास्तव को भावभीनी श्रद्धांजलि। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। किसी इंसान को खुशी के लिए कुछ ल हे मुहैया कराना इबादत से कम नहीं है और ये काम राजू ने बखूबी अंजाम दिया। -जॉनी फॉस्टर, गीतकार व संगीतकार
हास्य कलाकार कास्यथ शिरोमणि राजू श्रीवास्तव जी के दुखद निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। हास्य जगत के लिए उनका जाना एक अपूर्णीय क्षति है। -राज सक्सेना, पश्चिमी प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा
कभी हाथरस में गजोधर ने बिखेरा था हास्यरस
कॉमेडी किंग राजू श्रीवास्तव का हास्य के पितामह काका हाथरसी की नगरी से गहरा नाता रहा है। उन्होंने यहां भी हास्यरस की फुहारें बिखेरीं थीं। उनके निधन के समाचार ने यहां उनके प्रशंसकों और परिचितों को आंसुओं में डुबो दिया है।
राजू कई बार हाथरस आए थे। वर्ष 2019 में वह मेला श्रीदाऊजी महाराज के लाफ्टर शो में आए थे। भारी भीड़ जुटी थी। कॉमेडी के अपने विशिष्ट अंदाज से उन्होंने हंसा-हंसा कर दर्शकों को लोट-पोट कर दिया था। उन्होंने इस कार्यक्रम में समां बांध दिया था। घंटों लोगों को हंसाते रहे। इस कार्यक्रम के तत्कालीन संयोजक भाजयुमो के तत्कालीन जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह थे।
तीन जनवरी 2015 को वह जब वृंदावन में एक कार्यक्रम से लौट रहे थे तो वह और उनकी पत्नी शिखा श्रीवास्तव भाजपा नेता रविंद्र शर्मा उर्फ मुन्ना प्रधान के मथुरा रोड स्थित कार्यालय पर रुके थे। उस समय इनके साथ मुरसान के गांव खुटीपुरी निवासी बृजमोहन कौशिक भी थे। हाथरस के कई लोगों ने राजू के निधन पर शोक जताया है।
हाथरस के लोग राजू को मानते थे दामाद, पत्नी शिखा यहीं जन्मीं थीं
राजू श्रीवास्तव की पत्नी शिखा श्रीवास्तव का जन्म हाथरस में ही दिल्ली वाला मोहल्ला में एक घर में हुआ था। इस मोहल्ले के निवासी गोपाल शर्मा उर्फ देवदत्त ने बताया राजू श्रीवास्तव की पत्नी शिखा श्रीवास्तव का जन्म उनके घर में ही हुआ था। इसी रिश्ते से यहां के लोग राजू को दामाद का दर्जा देते थे। राजू के जाने का गम सभी को सता रहा है।
उनका कहना है कि शिखा श्रीवास्तव के पिता हाथरस में ही व्यापार कर विभाग में कार्यरत थे और उनके घर में परिवार सहित किराये पर रहते थे। हालांकि दो साल बाद ट्रांसफर होने पर शिखा के पिताजी व पूरा परिवार कानपुर शिफ्ट हो गया था।
गोपाल ने बताया कि शिखा उनके घर पर आई थीं और राजू श्रीवास्तव भी उनके घर आए थे। तब दामाद के रूप राजू का उनके पिता शिवचरनलाल शर्मा उर्फ शिब्बो गुरु ने स्वागत व सत्कार किया था। चांदी का सिक्का व गोला देकर सम्मान किया था। उनके बेटे केशव को राजू श्रीवास्तव ने 500 रुपये दिए थे। उनसे काफी आत्मीय लगाव था और हम उन्हें दामाद का दर्जा देते थे। अक्सर शिखा व अन्य परिजनों से फोन पर बातचीत होती रहती थी। गोपाल शर्मा व अन्य परिजनों ने उनके निधन पर काफी दुख जताया है।
डालचंद्र पालीवाल के घर भी आए थे राजू
दिल्ली वाला मोहल्ला में ही गोपाल के घर के निकट ही रहने वाले डालचंद्र पालीवाल भी व्यापार कर विभाग में तैनात रहे हैं। उनका कहना है कि राजू श्रीवास्तव के ससुर ने उनके साथ हाथरस में ही नौकरी की है। राजू उनके निवास पर भी आए थे। डालचंद्र अग्रवाल के अलावा उनकी पुत्रवधू ललिता पालीवाल व परिवार के अन्य सदस्यों ने भी राजू श्रीवास्तव के निधन पर काफी शोक व्यक्त किया है। इधर, वर्ष 2019 में मेला श्रीदाऊजी महाराज में लाफ्टर शो के संयोजक रहे चंद्रवीर सिंह, सह संयोजक प्रदीप गुप्ता सहित कई लोगों ने शोक व्यक्त किया है और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है।