Chicory coffee: 12 देशों की कॉफी में घुल रही अलीगढ़ और एटा की चिकोरी, बढ़ा रही स्वाद
अलीगढ़ और एटा में पैदा होने वाली चिकोरी यूक्रेन, ताइवान, तुर्किए, वियतनाम, इंडोनेशिया, बेलारूस, अल्जेरिया, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, मलयेशिया सहित 12 देशों में भेजी जा रही है।
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विदेशों में बनने वाली कॉफी में अलीगढ़ मंडल की चिकोरी भी घुल रही रही है। यहां की चिकोरी 12 देशों में कॉफी के स्वाद और खुशबू को बढ़ा रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसका 184 करोड़ रुपये का बड़ा निर्यात हुआ है। स्थानीय स्तर पर भी देश की नामीगिरामी कॉफी निर्माता कंपनियां इसकी खरीदारी कर रही हैं। जिससे इसका कारोबार 200 करोड़ रुपये के पार पहुंच रहा है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में एटा से 122 करोड़ रुपये की चिकोरी का निर्यात हुआ है। 15 हजार 197 मीट्रिक टन चिकोरी विदेशों में भेजी गई है। चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में अप्रैल से अगस्त के बीच 1514 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में अलीगढ़ जिले से पहली बार 62 करोड़ रुपये की चिकोरी विदेश भेजी गई है।
चिकोरी प्रोटीन और विटामिन से भरपूर होती है। इसको कॉफी में मिलाया जाता है। जिससे कॉफी की खुशबू और स्वाद बढ़ जाता है। चिकोरी का तैयार पाउडर 100 रुपये, कच्चा फल 37 रुपये और रोस्टेड फल 54 रुपये किलो के भाव से निर्यात किया जा रहा है। अलीगढ़ के छर्रा, अतरौली और इगलास में किसान इसकी पैदावार करते हैं। अतरौली और इगलास में इसके 15 प्लांट स्थापित हैं।
अलीगढ़ जिले से पहली बार 62 करोड़ रुपये की चिकोरी का निर्यात इस वर्ष हुआ है। अब इसके आगे बढ़ने की उम्मीद है।-वीरेंद्र, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र।
पहली अक्तूबर से चिकोरी का बीज मिलना शुरू हो जाएगा। इसका बीज विदेशों से यहां आता है।-जयप्रकाश, चिकोरी उत्पादक छर्रा।
चिकोरी का निर्यात शुरू हो गया है। हम इसको आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। विदेशों में अच्छी मांग हो रही है।-गौरव वार्ष्णेय, निर्यातक।
इन देशों में हो रहा है निर्यात
यहां पैदा होने वाली चिकोरी यूक्रेन, ताइवान, तुर्किए, वियतनाम, इंडोनेशिया, बेलारूस, अल्जेरिया, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, मलयेशिया सहित 12 देशों में भेजी जा रही है।
पौधे की जड़ है चिकोरी
चिकोरी एक पौधे की जड़ है। इस पौधे का वानस्पतिक नाम चिकोरियम एंटीबस है। इसका बीज थाईलैंड से आता है। जिसे अक्तूबर में बोया जाएगा। इसकी फसल मार्च में तैयार होगी। इसकी जड़ में विषाक्तता मुक्त करने के लक्षण होते हैं। ये वजन कम करने और किडनी की पथरी के उपचार में भी मदद करता है। इसमें जिंक, मैग्नीशियम, कैल्शियम, लौह, फोलिक पोटेशियम, विटामिन, ए, बी-6 सी, ई और के होता है। इसकी जड़ को सुखाकर रोस्ट कर काॅफी में मिलाया जाता है।
एटा से 122 करोड़ रुपये की चिकोरी गई विदेश
अलीगढ़। एटा में इसके निर्यात की शुरुआत वर्ष 2007 से हुई थी। उस वक्त एक ही फर्म मुरली कृष्णा चिकोरी ने यह काम शुरू किया था। इसके बाद वर्ष 2015 में मुरली कृष्ण फूड और वर्ष 2016 में जूपिटर फूड प्राइवेट लिमिटेड भी निर्यात में उतर आई है। जिले में लगभग 85 चिकोरी के प्लांट स्थापित है। दस बड़ी कंपनियां इसका पाउडर बना कर निर्यात कर रही हैं।
मुख्य बिंदु
- चिकोरी का 200 करोड़ रुपये का कारोबार
- 184 करोड़ रुपये का निर्यात, 16 करोड़ रुपये की स्थानीय बिक्री
- 04 कॉफी निर्माता कंपनियां स्थानीय स्तर पर कर रही हैं खरीदारी
- 15 चिकोरी प्लांट स्थापित हैं अलीगढ़ के छर्रा और इगलास में
- 3500 बीघा में अलीगढ़ में हो रही है इसकी खेती
- 85 चिकोरी प्लांट स्थापित हैं एटा के अलग-अलग इलाकों में
- 200 हेक्टेयर में हो रही है एटा जनपद में इसकी खेती