Chhath: आस्था का महापर्व छठ आज से, नहाय-खाय के साथ होगा शुरू, चार दिन तक उत्सव की रहेगी धूम
पहले दिन व्रती महिलाएं चने की दाल, लौकी और भात प्रसाद में ग्रहण करेंगी। दूसरे दिन खरना होगा। इस दिन गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाएगा। इसी के साथ लगातार 36 घंटे का निर्जला व्रत प्रारंभ होगा।
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आस्था का महापर्व छठ 25 अक्तूबर से नहाय-खाय के साथ शुरू हो रहा है। शहर में रहने वाले पूर्वांचल, बिहार और छत्तीसगढ़ के निवासियों में छठ पर्व को लेकर खासा उत्साह है। सूर्यदेव और छठी माता के पूजन के इस महापर्व पर सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बदरबाग, टीकाराम मंदिर, क्वार्सी, कुलदीप बिहार, सारसौल, सासनीगेट सहित कई स्थानों पर अस्थाई तालाब का निर्माण कराया गया है।
इन्हीं तालाबों में अस्त होते सूर्य और उदय होते सूर्य को व्रती महिलाएं अर्घ्य देंगी। टीकाराम मंदिर के पुजारी राजू पंडित ने बताया कि पहले दिन व्रती महिलाएं चने की दाल, लौकी और भात प्रसाद में ग्रहण करेंगी। दूसरे दिन खरना होगा। इस दिन गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाएगा। इसी के साथ लगातार 36 घंटे का निर्जला व्रत प्रारंभ होगा। तीसरे दिन अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। चाैथे दिन उदय होते सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ व्रत का परायण होगा।
छठ पर नदी, तालाब, जलाशय में अर्घ्य देने की परंपरा है, इसलिए लोगों का जुड़ाव नदियों से होता है। छठ महापर्व लोगों को प्रकृति के करीब ले जाने का पर्व है। -शकुंतला देवी
छठ महापर्व पर सफाई की का विशेष ध्यान दिया जाता है, इसलिए प्रसाद की तैयारियों में व्रती महिलाएं खास ध्यान रखती हैं। ठेकुआ के प्रसाद की विशेष महत्ता रहती है।- सुनीता देवी
छठ महापर्व पूरी धरती को अपने प्रकाश से आलोकित करने वाले सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ प्रकृति के संरक्षण का भी सभी संकल्प लेते हैं। - सुधा झा
छठ महापर्व में बांस से बनी डलिया सूर्यदेव को अर्घ्य देने के उपयोग में लाई जाती है। इसमें ठेकुआ, गन्ना, सिंघाड़ा, मूली, शकरकंद, मौसमी सब्जियां और फल होते हैं।-नीलिमा चाैधरी
छठी माई के करब हम बरतिया...
लोक आस्था का महापर्व छठ लोकगीतों के बिना अधूरा है। रेलवे ने छठ के इस अवसर को इन लोकगीतों के प्रसारण से और भी खास बना दिया है। मंगीला हम वरदान हे गंगा मइया..., छठी माई के करब हम बरतिया..., कांच ही बांस के बहंगिया...,केलवा के पात पर उगेलन सुरुजदेव..., पहिले- पहिल हम कईनी छठ के बरतिया..., पटना के घाट पर हमहूं अरगिया देहब हे छठी मैया... जैसे छठ पूजा के लोकगीत शुक्रवार को अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर दिन भर गूंजते रहे।
महिला यात्रियों को इन गीतों को गुनगुनाते हुए भी देखा जा सकता है। उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे का यह प्रयास पहली बार लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ पर यात्रियों के मन को छूने वाला अनुभव बन रहा है, बल्कि उन्हें बिहार की सोंधी संस्कृति से भी जोड़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रयागराज मंडल के अलीगढ़ समेत 39 स्टेशनों पर स्टेशन उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से छठ के गीतों के प्रसारण के साथ यात्रियों का स्वागत किया जा रहा है।
छठ पूजा पर सुरक्षा व्यवस्था को चलाया चेकिंग अभियान
छठ पूजा पर घर जाने वाले यात्रियों के सकुशल सफर के लिए शुक्रवार को रेलवे स्टेशन पर अभियान चलाकर जागरूक किया गया। पोस्ट कमांडर अमित कुमार सिंह ने प्लेटफॉर्म पर रहकर विशेषकर बिहार की ओर जाने वाली गाड़ियों व अन्य भीड़भाड़ वाली गाड़ियों को अलीगढ़ स्टेशन से पास कराया। अभियान में यात्रियों को गेट पर बैठकर, लटककर सफर न करने के लिए समझाया गया। स्टेशन व गाड़ियों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चेकिंग अभियान भी चलाया गया। पोस्ट कमांडर अमित कुमार सिंह के अनुसार यह अभियान लगातार जारी रहेगा।