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सावधान! कैंसर की गिरफ्त में नहीं आए किसी का बचपन

Sun, 20 Sep 2020 01:51 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2020 01:51 AM IST
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careful Nobody's childhood caught in cancer
बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति और अधिक सावधान रहने की आवश्यकता होती है। बच्चे भी कैंसर जैसी घातक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में सावधानी ही बचाव का तरीका है।
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सितंबर माह को राष्ट्रीय बचपन कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मेहरोत्रा कहते हैं कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों में सामान्य दो तरह के कैंसर पाए जाए जाते हैं। पहला ल्यूकेमिया और दूसरा ब्रेन ट्यूमर। बच्चों में 80 प्रतिशत कैंसर ल्यूकेमिया के होते हैं, जो कि एक प्रकार का ब्लड कैंसर है। इसके अतिरिक्त लिंफोमा, किडनी आदि के कैंसर होते हैं। डॉ. विकास कहते हैं कि किसी तरह का लक्षण होने पर डरने या घबराने की जरूरत नहीं है।
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जरूरी नहीं कि लक्षण का मतलब कैंसर ही है। कोई दूसरी बीमारी भी हो सकती है। चिकित्सक से परामर्श कर जांच करा ले तो बेहतर होगा। समय पर पता लगने पर 80 प्रतिशत मामले में उपचार के बाद सकारात्मक परिणाम आते हैं। डॉ. विकास कहते हैं कि हिंदुस्तान में पांच से चौदह साल की उम्र में मौत के कारणों में कैंसर नौ वे स्थान पर है।
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कैंसर के लक्षण
- दो सप्ताह तक शरीर के किसी भी हिस्से में असामान्य गांठ या सूजन का रहना
- बच्चा पीला या सफेद पड़ रहा हो
- मलमूत्र में खून आना
- हड्डियों दर्द
- असामान्य रूप से वजन कम होना
- सफेद परछाई दिखना, आंखों में अचानक उभार, अचानक नजर कमजोर होना
- दौरे की शिकायत
- आवाज में परिवर्तन
कैसे पता लगाएं
असामान्य लक्षण दिखने पर चिकित्सक से संपर्क करें। चिकित्सक के परामर्श पर सीबीसी जांच, जीबीपी जांच कराकर पता लगाया जाता है। चिकित्सक एमआईआई भी कराते हैं। सीबीसी जांच एवं जीबीपी जांच बहुत सस्ती है।

बचपन में हेपेटाइटिस बी के तीन टीके लगाने से जीवन में कभी भी लीवर कैंसर नहीं हो सकता है। इसी तरह नौ साल से अधिक उम्र की बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर का टीका लगवाने से जीवन में बच्चेदानी का कैंसर नहीं होगा। कैंसर से बचाव के लिए ये दो टीके बेहद महत्वपूर्ण है।
- डॉ. विकास मेहरोत्रा, बाल रोग विशेषज्ञ
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