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बुर्कानशीं इंजीनियर दबोचा, खुफिया तंत्र चौकन्ना
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Mon, 03 Jul 2017 12:50 AM IST
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बुर्कानशीं इंजीनियर दबोचा, खुफिया तंत्र चौकन्ना
- फोटो : Rupesh
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रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर रविवार दोपहर घूम रहे हरदुआगंज स्थित तापीय विद्युत परियोजना के बुर्का पहने इंजीनियर को भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने दबोच लिया। जीआरपी ने सख्ती से पूछताछ की, तो वह खुद के खतरे में होने से जुड़ी कहानियां सुनाने लगा। इस खबर पर खुफिया एजेंसियों के भी होश उड़ गए। एटीएस सहित कई एजेंसियां जीआरपी थाने पहुंच गईं। जहां देर रात तक पूछताछ जारी थी। वहीं, भाजयुमो नेता ने आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका जताकर जीआरपी में कार्रवाई के लिए तहरीर दे दी है। उसका पूरा बायोडाटा खंगाला जा रहा है।
वाकया दोपहर करीब दो बजे का है, जब दिल्ली जाने वाली ईएएमयू पैसेंजर में सवार होने के लिए भाजपा युवा मोर्चा के कुछ कार्यकर्ता स्टेशन पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि एक बुर्काधारी पुरुष संदिग्ध हालत में प्लेटफार्म पर घूम रहा है। उसे देख जब संदेह गहराया तो युवक उसके पास गए तो वह भाग खड़ा हुआ। इस पर उन्होंने युवा मोर्चा नेता योगेश वार्ष्णेय आदि को बुला लिया। बाद में उसे दबोचकर जीआरपी के सुपुर्द कर दिया।
बुरका पहने पुरुष को देख जीआरपी भी सकते में आ गई। भाजयुमो नेता योगेश वार्ष्णेय ने आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका जाहिर करते हुए थाने में तहरीर दे दी। इसी बीच शहर विधायक संजीव राजा ने भी जीआरपी से जानकारी की। बाद में पूछताछ में उसने अपना नाम नजमुल हसन पुत्र अब्दुल हसन निवासी सुल्तानगढ़ पटना बिहार बताया है। उसने बताया कि वह 2009 से कासिमपुर पॉवर हाउस में सहायक अभियंता के पद पर तैनात है और परिवार के साथ पॉवर हाउस की कालोनी के टाइप-4/56 में रहता है।
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नाम-पता तो ठीक, पर कहानी उलझी
बुर्काधारी इंजीनियर नजमुल हसन ने अपना जो नाम, पता और पहचान बताई है, वह सब तो जांच में ठीक मिली है। इंजीनियर की आम शोहरत भी कासिमपुर पावर हाउस में ठीकठाक है। मगर वह खुद या उनके जवाब यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे कि उन्होंने बुर्का क्यों पहना?
कभी वह बताता है कि पूर्व में एक मर्तबा स्टेशन पर उसका झगड़ा हुआ था। वह यह सोचकर बुर्का पहनकर आया कि कोई उसे पहचान नहीं पाएगा और झगड़ा भी नहीं होगा। जब सवाल खड़ा हुआ कि हमला कब और किसने किया तो चुप्पी साध ली। कभी कहते हैं कि आपके सामने नाम उजागर कर दिया तो वह लोग मार डालेंगे। वह कभी कहता है कि पैसेंजर ट्रेनों में महिलाओं को आसानी से सीट मिल जाती है, इसलिए यह वेष धारण किया था। कुल मिलाकर वह तरह-तरह की कहानियां पूछताछ में सुना रहा है। इसलिए अभी उसे क्लीनचिट नहीं दी गई है।
ईद पर बच्चों को छोड़ आया घर
नजमुल ने बताया वह कासिमपुर पावर हाउस में मेंटीनेंस डिवीजन में है। ईद पर वह छुट्टी लेकर 21 जून को घर गया था। अपने परिवार को वहीं छोड़ आया। उसने शनिवार को ड्यूटी भी की। वहीं उसके साथी इंजीनियरों ने जानकारी पर बताया कि वह बेहद शांत स्वभाव का व्यक्ति है। अभी तक उसकी किसी से कहासुनी भी नहीं हुई है। उसने बुर्का क्यों पहना? यह बात तो वही बता सकता है। देर शाम जब यह खबर पावर हाउस में पहुंची तो जानकारी पर पता चला कि सुबह से उनके आवास पर ताला लटका है।
सवालों की झड़ी पर रोया
जब एटीएस सहित अन्य एजेंसियां उससे पूछताछ में जुटीं और सवालों की झड़ी लगी तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। कभी कहता कि उसने यूं ही यह पहना है। कभी इधर-उधर की बातें करता। एजेंसी सूत्रों के अनुसार देर रात तक उसने स्पष्ट नहीं किया है। इसलिए अभी क्लीन चिट नहीं मिली है। वह जीआरपी की हिरासत में है। सर्विलांस से लेकर अन्य सभी माध्यमों से उसकी जांच कराई जा रही है।
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वाकया दोपहर करीब दो बजे का है, जब दिल्ली जाने वाली ईएएमयू पैसेंजर में सवार होने के लिए भाजपा युवा मोर्चा के कुछ कार्यकर्ता स्टेशन पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि एक बुर्काधारी पुरुष संदिग्ध हालत में प्लेटफार्म पर घूम रहा है। उसे देख जब संदेह गहराया तो युवक उसके पास गए तो वह भाग खड़ा हुआ। इस पर उन्होंने युवा मोर्चा नेता योगेश वार्ष्णेय आदि को बुला लिया। बाद में उसे दबोचकर जीआरपी के सुपुर्द कर दिया।
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बुरका पहने पुरुष को देख जीआरपी भी सकते में आ गई। भाजयुमो नेता योगेश वार्ष्णेय ने आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका जाहिर करते हुए थाने में तहरीर दे दी। इसी बीच शहर विधायक संजीव राजा ने भी जीआरपी से जानकारी की। बाद में पूछताछ में उसने अपना नाम नजमुल हसन पुत्र अब्दुल हसन निवासी सुल्तानगढ़ पटना बिहार बताया है। उसने बताया कि वह 2009 से कासिमपुर पॉवर हाउस में सहायक अभियंता के पद पर तैनात है और परिवार के साथ पॉवर हाउस की कालोनी के टाइप-4/56 में रहता है।
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नाम-पता तो ठीक, पर कहानी उलझी
बुर्काधारी इंजीनियर नजमुल हसन ने अपना जो नाम, पता और पहचान बताई है, वह सब तो जांच में ठीक मिली है। इंजीनियर की आम शोहरत भी कासिमपुर पावर हाउस में ठीकठाक है। मगर वह खुद या उनके जवाब यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे कि उन्होंने बुर्का क्यों पहना?
कभी वह बताता है कि पूर्व में एक मर्तबा स्टेशन पर उसका झगड़ा हुआ था। वह यह सोचकर बुर्का पहनकर आया कि कोई उसे पहचान नहीं पाएगा और झगड़ा भी नहीं होगा। जब सवाल खड़ा हुआ कि हमला कब और किसने किया तो चुप्पी साध ली। कभी कहते हैं कि आपके सामने नाम उजागर कर दिया तो वह लोग मार डालेंगे। वह कभी कहता है कि पैसेंजर ट्रेनों में महिलाओं को आसानी से सीट मिल जाती है, इसलिए यह वेष धारण किया था। कुल मिलाकर वह तरह-तरह की कहानियां पूछताछ में सुना रहा है। इसलिए अभी उसे क्लीनचिट नहीं दी गई है।
ईद पर बच्चों को छोड़ आया घर
नजमुल ने बताया वह कासिमपुर पावर हाउस में मेंटीनेंस डिवीजन में है। ईद पर वह छुट्टी लेकर 21 जून को घर गया था। अपने परिवार को वहीं छोड़ आया। उसने शनिवार को ड्यूटी भी की। वहीं उसके साथी इंजीनियरों ने जानकारी पर बताया कि वह बेहद शांत स्वभाव का व्यक्ति है। अभी तक उसकी किसी से कहासुनी भी नहीं हुई है। उसने बुर्का क्यों पहना? यह बात तो वही बता सकता है। देर शाम जब यह खबर पावर हाउस में पहुंची तो जानकारी पर पता चला कि सुबह से उनके आवास पर ताला लटका है।
सवालों की झड़ी पर रोया
जब एटीएस सहित अन्य एजेंसियां उससे पूछताछ में जुटीं और सवालों की झड़ी लगी तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। कभी कहता कि उसने यूं ही यह पहना है। कभी इधर-उधर की बातें करता। एजेंसी सूत्रों के अनुसार देर रात तक उसने स्पष्ट नहीं किया है। इसलिए अभी क्लीन चिट नहीं मिली है। वह जीआरपी की हिरासत में है। सर्विलांस से लेकर अन्य सभी माध्यमों से उसकी जांच कराई जा रही है।