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मेडिकल कॉलेज की लैब में नहीं मिला ब्लैक फंगस
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जिले में पैर पसार चुके ब्लैक फंगस को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जेएन मेडिकल कॉलेज में भी विशेष सावधानी बरती जा रही है। इसी क्रम में मेडिकल कॉलेज की माइक्रो बायोलॉजी विभाग की लैब की सघन जांच की गई, जिसे ब्लैक फंगस से मुक्त पाया गया। कर्मचारियों और स्टाफ के लोगों को इससे बचाव के संबंध में निर्देशित किया गया है। मेडिकल कॉलेज में इसकी जांच और उपचार की पूरी सुविधा मौजूद है।
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी ने बताया कि ब्लैक फंगस के मामले अलीगढ़ में भी सामने आने लगे हैं। इसको लेकर मेडिकल कॉलेज में विशेष सावधानी बरती जा रही है। ब्लैक फंगस का मुख्य स्रोत मरीज को ऑक्सीजन देते समय इस्तेमाल किए जाने वाला पानी है।
जब मरीज को ऑक्सीजन दी जाती है, तब उस ऑक्सीजन में नमी बनाए रखने के लिए एक पोर्ट में पानी भरा जाता है। मेडिकल कॉलेज में स्टाफ को निर्देशित किया गया है कि उसमें केवल रिवर्स ऑस्मोसिस का पानी भरा जाए। लेकिन कुछ जगह वहां के स्टाफ की लापरवाही के चलते साधारण पानी भर दिया जाता है, जिसमें कई केमिकल और ऐसे तत्व होते हैं, जिनसे ब्लैक फंगस पनपती है।
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प्रोफेसर सिद्दीकी ने बताया कि ब्लैक फंगस की आशंका के चलते मेडिकल कॉलेज की माइक्रो बायोलॉजी विभाग की लैब में सघनता से जांच कराई गई, क्योंकि सभी सैंपल यहां इकट्ठा किए जाते हैं। राहत की बात है कि यहां पर ब्लैक फंगस नहीं मिला।
- ब्लैक फंगस के मामले अलीगढ़ में पाए जाने की सूचना मिली। इसके बाद हम बेहद सतर्क हो गए हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज में अभी तक किसी भी मरीज में ब्लैक फंगस के कोई लक्षण नहीं पाए गए। बाहर से भी नया मामला ब्लैक फंगस का मेडिकल कॉलेज में नहीं आया है। - प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी, प्रिंसिपल, जेएन मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी ने बताया कि ब्लैक फंगस के मामले अलीगढ़ में भी सामने आने लगे हैं। इसको लेकर मेडिकल कॉलेज में विशेष सावधानी बरती जा रही है। ब्लैक फंगस का मुख्य स्रोत मरीज को ऑक्सीजन देते समय इस्तेमाल किए जाने वाला पानी है।
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जब मरीज को ऑक्सीजन दी जाती है, तब उस ऑक्सीजन में नमी बनाए रखने के लिए एक पोर्ट में पानी भरा जाता है। मेडिकल कॉलेज में स्टाफ को निर्देशित किया गया है कि उसमें केवल रिवर्स ऑस्मोसिस का पानी भरा जाए। लेकिन कुछ जगह वहां के स्टाफ की लापरवाही के चलते साधारण पानी भर दिया जाता है, जिसमें कई केमिकल और ऐसे तत्व होते हैं, जिनसे ब्लैक फंगस पनपती है।
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प्रोफेसर सिद्दीकी ने बताया कि ब्लैक फंगस की आशंका के चलते मेडिकल कॉलेज की माइक्रो बायोलॉजी विभाग की लैब में सघनता से जांच कराई गई, क्योंकि सभी सैंपल यहां इकट्ठा किए जाते हैं। राहत की बात है कि यहां पर ब्लैक फंगस नहीं मिला।
- ब्लैक फंगस के मामले अलीगढ़ में पाए जाने की सूचना मिली। इसके बाद हम बेहद सतर्क हो गए हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज में अभी तक किसी भी मरीज में ब्लैक फंगस के कोई लक्षण नहीं पाए गए। बाहर से भी नया मामला ब्लैक फंगस का मेडिकल कॉलेज में नहीं आया है। - प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी, प्रिंसिपल, जेएन मेडिकल कॉलेज