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10 घन मीटर से अधिक पानी खर्च करने पर देना होगा बिल
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पानी की बर्बादी रोकने के लिए बने भूगर्भ जल प्रबंधन अधिनियम 2019 के तहत अब कारखाना चलाने वालों से भी पानी का बिल वसूला जाएगा। हालांकि इसमें नियम है कि 10 घन मीटर से अधिक पानी प्रतिदिन खर्च होता है तभी पानी के बिल की वसूली होगी। सूक्ष्म व लघु इकाई वाले कारखानों को इसमें छूट दी गई है, मगर प्रत्येक इकाई को जिला स्तर पर गठित भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद में इसके लिए पंजीकरण कराना होगा। एनओसी भी लेनी होगी, जिसमें लघु-सूक्ष्म इकाइयों को एनओसी से भी छूट की व्यवस्था की गई है।
इस बाबत जारी नियम के अनुसार सभी प्रकार की औद्योगिक इकाइयों, घरेलू व कृषि पेयजल संसाधन शुरू करने के लिए भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद में पंजीकरण कराने व एनओसी लेने की व्यवस्था की गई है। हालांकि लघु-सूक्ष्म इकाई व घरेलू-कृषि संसाधन में एनओसी नहीं लेनी पड़ेगी।
इसके बाद पंजीकरण कराने वाली सभी इकाइयों में एक-एक मीटर भी लगाया जाएगा। इस मीटर के अनुसार उनको बिल का भुगतान करना होगा। बिल का सालाना भुगतान होगा। यह व्यवस्था ऑनलाइन रहेगी। वहीं एनओसी व पंजीकरण की व्यवस्था 1 से 5 साल तक के लिए मान्य रहेगी। इसके पीछे मकसद पानी की बर्बादी रोकना है।
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-उद्योग केंद्र के माध्यम से सभी इकाइयों को सूचना भिजवाई जा रही है। अब तक 40 आवेदन एनओसी व 30 पंजीकरण के लिए आए हैं। आधा दर्जन आवेदन कृषि के संबंध में आए थे, मगर उनमें तकनीकी कमी थी, इसलिए निरस्त किए गए हैं। पानी की बर्बादी रोकने के लिए बनाए गए कानून के तहत यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है। समय-समय पर जांच भी होगी। अगर संबंधित जगहों पर एनओसी/पंजीयन न पाया गया तो कार्रवाई भी होगी। -बीएस सुमन, नोडल जिला भूगर्भ प्रबंधन परिषद/जेई लघु सिंचाई।
-औद्योगिक इकाइयों को पानी खपत के संबंध में एनओसी व पंजीयन के बाबत सूचनाएं भिजवाई जा रही हैं। बैठकों में भी अवगत कराया जा रहा है। जनपद में चूंकि ताला हार्डवेयर की इकाई अधिक हैं, इसलिए उनमें पानी का कम काम है। -श्रीनाथ पासवान, उपायुक्त उद्योग केंद्र।
जनपद में भूजल स्तर की स्थिति
-अलीगढ़ नगर क्षेत्र 28 मीटर।
-इगलास ब्लॉक क्षेत्र 12.98 मीटर।
-चंडौस ब्लॉक क्षेत्र 15.48 मीटर।
-गंगीरी ब्लॉक क्षेत्र 16.79 मीटर।
-जवां ब्लॉक क्षेत्र 23.36 मीटर।
-खैर ब्लॉक क्षेत्र 8.12 मीटर।
-लोधा ब्लॉक क्षेत्र 19.84 मीटर।
-बिजौली ब्लॉक क्षेत्र 14.54 मीटर।
-अतरौली ब्लॉक क्षेत्र 13.26 मीटर।
-धनीपुर ब्लॉक क्षेत्र 17.09 मीटर।
-अकराबाद ब्लॉक क्षेत्र 05.44 मीटर।
-गोंडा ब्लॉक क्षेत्र 9.52 मीटर।
-टप्पल ब्लॉक क्षेत्र 15.92 मीटर।
---
जिला उद्योग केंद्र में पंजीकृत इकाइयां
-20 बड़े कारखाने।
-110 मध्यम कारखाने।
-300 छोटे कारखाने।
-16000 सूक्ष्म-लघु उद्योग।
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इस बाबत जारी नियम के अनुसार सभी प्रकार की औद्योगिक इकाइयों, घरेलू व कृषि पेयजल संसाधन शुरू करने के लिए भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद में पंजीकरण कराने व एनओसी लेने की व्यवस्था की गई है। हालांकि लघु-सूक्ष्म इकाई व घरेलू-कृषि संसाधन में एनओसी नहीं लेनी पड़ेगी।
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इसके बाद पंजीकरण कराने वाली सभी इकाइयों में एक-एक मीटर भी लगाया जाएगा। इस मीटर के अनुसार उनको बिल का भुगतान करना होगा। बिल का सालाना भुगतान होगा। यह व्यवस्था ऑनलाइन रहेगी। वहीं एनओसी व पंजीकरण की व्यवस्था 1 से 5 साल तक के लिए मान्य रहेगी। इसके पीछे मकसद पानी की बर्बादी रोकना है।
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-उद्योग केंद्र के माध्यम से सभी इकाइयों को सूचना भिजवाई जा रही है। अब तक 40 आवेदन एनओसी व 30 पंजीकरण के लिए आए हैं। आधा दर्जन आवेदन कृषि के संबंध में आए थे, मगर उनमें तकनीकी कमी थी, इसलिए निरस्त किए गए हैं। पानी की बर्बादी रोकने के लिए बनाए गए कानून के तहत यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है। समय-समय पर जांच भी होगी। अगर संबंधित जगहों पर एनओसी/पंजीयन न पाया गया तो कार्रवाई भी होगी। -बीएस सुमन, नोडल जिला भूगर्भ प्रबंधन परिषद/जेई लघु सिंचाई।
-औद्योगिक इकाइयों को पानी खपत के संबंध में एनओसी व पंजीयन के बाबत सूचनाएं भिजवाई जा रही हैं। बैठकों में भी अवगत कराया जा रहा है। जनपद में चूंकि ताला हार्डवेयर की इकाई अधिक हैं, इसलिए उनमें पानी का कम काम है। -श्रीनाथ पासवान, उपायुक्त उद्योग केंद्र।
जनपद में भूजल स्तर की स्थिति
-अलीगढ़ नगर क्षेत्र 28 मीटर।
-इगलास ब्लॉक क्षेत्र 12.98 मीटर।
-चंडौस ब्लॉक क्षेत्र 15.48 मीटर।
-गंगीरी ब्लॉक क्षेत्र 16.79 मीटर।
-जवां ब्लॉक क्षेत्र 23.36 मीटर।
-खैर ब्लॉक क्षेत्र 8.12 मीटर।
-लोधा ब्लॉक क्षेत्र 19.84 मीटर।
-बिजौली ब्लॉक क्षेत्र 14.54 मीटर।
-अतरौली ब्लॉक क्षेत्र 13.26 मीटर।
-धनीपुर ब्लॉक क्षेत्र 17.09 मीटर।
-अकराबाद ब्लॉक क्षेत्र 05.44 मीटर।
-गोंडा ब्लॉक क्षेत्र 9.52 मीटर।
-टप्पल ब्लॉक क्षेत्र 15.92 मीटर।
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जिला उद्योग केंद्र में पंजीकृत इकाइयां
-20 बड़े कारखाने।
-110 मध्यम कारखाने।
-300 छोटे कारखाने।
-16000 सूक्ष्म-लघु उद्योग।