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AMU: 890 बकरों का कोरमा, 35 क्विंटल बिरयानी, 90 क्विंटल शाही टुकड़ा, 45 हजार ने खाई दावत

Fri, 17 Oct 2025 10:22 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Fri, 17 Oct 2025 10:22 PM IST
सार

अब्दुल्ला हॉल में छात्राओं की संख्या करीब 1500 है जिनके लिए इस हॉल में दो क्विंटल बकरे के गोश्त की बिरयानी, चार क्विंटल गोश्त का कोरमा और 4.5 क्विंटल शाही टुकड़े की दावत की गई। इसमें ही करीब 40-42 बकरे काटे गए। इस तरह से सभी दस्तरखान में करीब 890 बकरों से कोरमा और बिरयानी बनी।

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Big meal at AMU
एएमयू का बड़ा खाना - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

अपने विशालतम भोज के लिए दुनियाभर में मशहूर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के सर सैयद डे पर होने वाले डिनर के लिए इंतजाम भी भारी भरकम रहते हैं। एएमयू में पढ़ने वाले 37 हजार छात्र-छात्राओं और आठ हजार स्टाफ व अन्य लोगों के भोजन के लिए इस बार 890 बकरों के गोश्त से कोरमा और बिरयानी को तैयार किया गया। इस खास दावत को एएमयू बिरादरी बड़ा खाना (विशाल भोज) के नाम से भी जानती है। भोज की यह परंपरा 111 साल से चली आ रही है। यूनिवर्सिटी के 20 हॉलों में इस डिनर का आयोजन किया जाता है। खाने के बाद मिठाई के तौर पर शाही टुकड़े (ब्रेड, मलाई और चासनी से होता तैयार) से मुंह मीठा किया जाता है। इसकी खपत भी करीब 90 क्विंटल तक हुई है।

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17 अक्तूबर की शाम छह बजे से शेरवानी-पायजामा पहने छात्र, सफेद सलवार, कमीज और दुपट्टे में छात्राएं पहुंचने लगी थीं। करीब सात बजे से दावत शुरू हो गई। एक हॉल में करीब 800-900 छात्र-छात्राएं रहते हैं। अब्दुल्ला हॉल में छात्राओं की संख्या करीब 1500 है जिनके लिए इस हॉल में दो क्विंटल बकरे के गोश्त की बिरयानी, चार क्विंटल गोश्त का कोरमा और 4.5 क्विंटल शाही टुकड़े की दावत की गई। इसमें ही करीब 40-42 बकरे काटे गए। इस तरह से सभी दस्तरखान में करीब 890 बकरों से कोरमा और बिरयानी बनी।

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37 हजार विद्यार्थी और आठ हजार से ज्यादा शिक्षक-स्टाफ व मेहमानों के लिए खाना बनता है। इसलिए खपत भी अधिक होती है। यूनिवर्सिटी के इस डिनर के लिए देश विदेश से पूर्व छात्र भी शामिल होने के लिए आते हैं और फख्र की बात मानी जाती है। - प्रो. वसीम अली, प्रॉक्टर, एएमयू

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सर सैयद डे पर हॉल में छात्रों को दावत दी गई। बकरे का कोरमा और बिरयानी खिलाई गई। मटर पनीर, दाल, सब्जी का भी इंतजाम भी रहा।-प्रो. बीबी सिंह, प्रोवोस्ट, एनआरएसी हॉल, एएमयू।

 

1913-14 में शुरु हुई थी परंपरा

एएमयू के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी और उर्दू एकेडमी के निदेशक डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि सर सैयद डे पर डिनर की परंपरा वर्ष 1913-14 में शुरू हुई थी। पहले एसएस हॉल में सामूहिक दावत होती थी। 90 के दशक में विद्यार्थियों की तादाद बढ़ने से सामूहिक दावत एएमयू के क्रिकेट पवेलियन पर होने लगी। जहां हॉल के नाम से अलग-अलग पंडाल लगते थे। विद्यार्थियों की संख्या और हॉल बढ़ने से करीब वर्ष 2000 के बाद हॉल में ही खाना खाने की परंपरा शुरू हुई। कोरोना काल में दो साल तक हॉल में भोजन नहीं हो सका।

बड़ा खाना की खास बातें
- 20 हॉल में दस्तरखान
- 890 बकरे कटे
- 65 क्विंटल बकरे का कोरमा
- 35 क्विंटल बकरे की बिरयानी
- 7 क्विंटल मुर्गे का कोरमा (गर्ल्स हॉस्टल)
- 90 क्विंटल शाही टुकड़ा बना
- 45 हजार विद्यार्थी और शिक्षक व मेहमान हुए शामिल

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