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बरौली... यहां चुनाव में नहीं लगा सका कोई भी हैट्रिक

Mon, 17 Jan 2022 12:54 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 17 Jan 2022 12:54 AM IST
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Barauli... could not put any hat-trick in the election here
रिंकू शर्मा
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चुनाव में जनता का रुख और उसकी कसौटियों पर खरा उतरना ही किसी प्रत्याशी की जीत का आधार बनती है। ऐसी ही स्थिति जिले की अतरौली सीट के बाद सबसे वीआईपी सीट कही जाने वाली बरौली विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की भी है। यहां के मतदाताओं का चुनावी रुख भी हर बार बदलता है।
देश को आजादी मिलने के बाद से इसका अपना अलग ही इतिहास रहा है। इस विधानसभा से लगातार जीत की हैट्रिक यानी तीन बार जीतने का रिकॉर्ड किसी भी प्रत्याशी के नाम नहीं है। इस बार भी यह मिथक कायम रहने की संभावना है। सबसे खास बात यह है कि यहां से कभी किसी महिला को विधायक बनने का भी गौरव नहीं मिल सका है। यही कारण है कि अधिकांश दल यहां से महिलाओं को मैदान में उतारने से परहेज करते रहे हैं।
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मोहनलाल गौतम व राजा चैतन्य राज भी यहां से रहे विधायक
वर्ष 1952 व 1957 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व कांग्रेस नेता पंडित मोहनलाल गौतम, स्वराज पार्टी के प्रत्याशी व गभाना राजघराने के राजा कुंवर चैतन्य राज सिंह जैसे दिग्गज यहां से विधायक रह चुके हैं। वर्ष 1962 में निर्दल केशव सिंह हरियाणा, वर्ष 1969 मेें भारतीय क्रांति दल के महावीर सिंह भी विधायक रहे। वर्ष 1974 में पहली बार सुरेंद्र सिंह चौहान ने जीत हासिल की, लेकिन वर्ष 1977 में हुए चुनाव में वे जेएनपी के बाबू संग्राम सिंह से मात खा बैठे ।
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यहां से तीसरी बार में शुरू हुई हार
वर्ष 1985 व 1989 के चुनाव में सुरेंद्र सिंह चौहान लगातार जीते और मंत्री भी बने लेकिन, वर्ष 1991 के कांटेदार मुकाबले में जनता दल के ठा. दलवीर सिंह ने उनकी हैट्रिक लगाने की मंशा पूरी न होने दी। वर्ष 1993 में हुए मध्यावधि चुनाव में रामलहर के बीच भाजपा प्रत्याशी मुनीष गौड़ ने ठा. दलवीर सिंह को शिकस्त दे दी।
वर्ष 1996 के चुनाव में कांग्रेस से मैदान में उतरे ठा. दलवीर सिंह ने मुनीष गौड़ को हराकर फिर जीत हासिल की, लेकिन वर्ष 2002 व 2007 में बसपा के ठा. जयवीर सिंह ने लगातार ठा. दलवीर सिंह को शिकस्त देकर अपना जलवा कायम किया। दोनों ही बार वह बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने। 2012 के चुनाव में वह फिर मैदान में थे लेकिन अबकी बार चिर प्रतिद्वंद्वी रालोद से मैदान में उतरे ठा. दलवीर सिंह ने उनके हैट्रिक का सपना चूर-चूर कर दिया।

वर्ष 2017 के चुनाव में बरौली विधायक ठा. दलवीर सिंह ने पार्टी बदलकर भाजपा से चुनाव लड़ा। सत्ता विरोधी रुझान व मोदी लहर में वह फिर अपने प्रतिद्वंद्वी ठा. जयवीर सिंह को करारी मात देकर विधायक बने। वर्ष 2022 के चुनाव में वह हैट्रिक लगाने की ओर अग्रसर थे किंतु स्वास्थ्य कारणों के चलते पार्टी ने इस बार उन्हें उम्मीदवार ही नहीं बनाया।
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