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जीडी की मनमानी पर लगाम लगाएगी ऑटोमेटिक फीडिंग
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Tue, 21 Nov 2017 02:03 AM IST
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पुलिस महकमे में लगे क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के परियोजना के तहत कोर एप्लीकेशन साफ्टवेयर (सीएएस) का एडवांस वर्जन आने जनरल डायरी (जीडी) में होने वाली मनमानी पर अंकुश लग जाएगा। अब इस साफ्टवेयर के चलते जीडी की तिथि और समय ऑटोमेटिक आएगा। हालांकि, पहले जीडी पर लोग स्वयं इंद्राज कर लेते थे।
इस नए वर्जन के तमाम फायदे हैं। मसलन, जीडी के चयन फील्ड में 20 अन्य प्रकार के विकल्प जोड़े गए हैं, जबकि एक या एक अधिक जीडी लिखने के लिए अलग से विकल्प दिया गया है।
यही नहीं एफआईआर के मामले में आमूल-चूल परिवर्तन किए गए हैं। रिपोर्ट संख्या ऑटोमेटिक आएगी। पहले जीडी पर स्वयं इंद्राज किया जा सकता था। रिपोर्ट को वेब पोर्टल/इंटरनेट से जोड़ने के लिए पूर्व में दिए गए विकल्पों में भी परिवर्तन किया गया है।
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रिपोर्ट की श्रेणी को भी इस नए वर्जन में अलग कर दिया गया है। जघन्य अपराध व संवदेनशील अपराधों को अलग किया गया है।
पहले यह सुविधा नहीं थी। खास बात यह है कि पहले रिपोर्ट की फाइल सेव करने से पहले रिपोर्ट की समीक्षा नहीं की जा सकती थी, लेकिन अब एसओ/एसएचओ फाइल सेव करने से पहले समीक्षा कर सकते हैं। इसमें डिजिटल हस्तक्षार की भी सुविधा दी गई है। गवाहों के प्रकार की सूची में अन्य आठ प्रकार के विकल्प जोड़े गए हैं, जबकि अभियुक्त की गिरफ्तारी के कॉलम में ब्लड ग्रुप जोड़ा गया है।
नए वर्जन के साफ्टवेयर से निसंदेह पुलिस अधिकारियों को सहूलियत मिलेगी। पहले इसकी कमी महसूस की जा रही थी। जीडी को लेकर अक्सर सवाल उठते थे। मगर, अब इस साफ्टवेयर से मनमानी पर रोक लगेगी।
-राजेश पांडेय, एसएसपी
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इस नए वर्जन के तमाम फायदे हैं। मसलन, जीडी के चयन फील्ड में 20 अन्य प्रकार के विकल्प जोड़े गए हैं, जबकि एक या एक अधिक जीडी लिखने के लिए अलग से विकल्प दिया गया है।
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यही नहीं एफआईआर के मामले में आमूल-चूल परिवर्तन किए गए हैं। रिपोर्ट संख्या ऑटोमेटिक आएगी। पहले जीडी पर स्वयं इंद्राज किया जा सकता था। रिपोर्ट को वेब पोर्टल/इंटरनेट से जोड़ने के लिए पूर्व में दिए गए विकल्पों में भी परिवर्तन किया गया है।
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रिपोर्ट की श्रेणी को भी इस नए वर्जन में अलग कर दिया गया है। जघन्य अपराध व संवदेनशील अपराधों को अलग किया गया है।
पहले यह सुविधा नहीं थी। खास बात यह है कि पहले रिपोर्ट की फाइल सेव करने से पहले रिपोर्ट की समीक्षा नहीं की जा सकती थी, लेकिन अब एसओ/एसएचओ फाइल सेव करने से पहले समीक्षा कर सकते हैं। इसमें डिजिटल हस्तक्षार की भी सुविधा दी गई है। गवाहों के प्रकार की सूची में अन्य आठ प्रकार के विकल्प जोड़े गए हैं, जबकि अभियुक्त की गिरफ्तारी के कॉलम में ब्लड ग्रुप जोड़ा गया है।
नए वर्जन के साफ्टवेयर से निसंदेह पुलिस अधिकारियों को सहूलियत मिलेगी। पहले इसकी कमी महसूस की जा रही थी। जीडी को लेकर अक्सर सवाल उठते थे। मगर, अब इस साफ्टवेयर से मनमानी पर रोक लगेगी।
-राजेश पांडेय, एसएसपी