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AMU: खाली जेब से कैसे चलाएं भरा-पूरा परिवार, राशन, दूध विक्रेता मांग रहे रुपये, दवा भी नहीं ले पा रहे

Sat, 07 Jan 2023 03:29 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sat, 07 Jan 2023 03:29 PM IST
सार

दिसंबर महीने की तनख्वाह न मिलने पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अस्थायी कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। अब खाली जेब से भरा-पूरा परिवार चलाना चुनौती बन गई है।

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anger of the temporary employees of AMU erupted due to non-payment of salary
इंजीनियरिंग कॉले के सामने बैठे एएमयू के अस्थायी कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एएमयू के अस्थायी कर्मचारियों को दिसंबर की तनख्वाह न मिलने से, हर कर्मचारी इंतजामिया से यही कहते नजर आ रहे हैं कि राशन, दूध विक्रेता रुपये मांग रहे हैं, मरीज के लिए दवा भी नहीं ले पा रहे हैं, बच्चों की फीस भी जमा नहीं हो पा रही। खाली जेब से कैसे भरा-पूरा परिवार चलाएं।

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खाली जेब से कैसे चलाएं भरा-पूरा परिवार
दिसंबर महीने की तनख्वाह न मिलने पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अस्थायी कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। जुमे की नमाज के बाद शिक्षा विभाग के मैदान में कर्मचारी एकजुट होकर अपने हक की आवाज बुलंद की। कर्मचारियों का कहना है कि सेवा विस्तार के बाद उम्मीद बंधी थी कि जल्द ही उन्हें तनख्वाह मिल जाएगी, लेकिन उम्मीदें कानून की पेचीदियों में उलझकर रह गई हैं। अब खाली जेब से भरा-पूरा परिवार चलाना चुनौती बन गई है।
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कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने आधी से ज्यादा उम्र इस इदारे की खिदमत करने में गुजार दी, लेकिन पिछले कई दिनों से नौकरी और तनख्वाह को लेकर जो उधेड़बुन चल रहा है, वह किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि मजलूमों की आह से ऊंचे ओहदों पर विराजमान बच नहीं पाएंगे। कर्मचारियों के परिवार में गम का माहौल है। उन्होंने 1559 अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने और दिसंबर महीने की तनख्वाह खाते में भेजने की मांग की है। 
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इन कर्मचारियों को देने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये की तनख्वाह बन रही है। देर शाम कर्मचारियों का समूह वीसी लॉज पहुंचा, जहां उन्होंने ‘आवाज दो, हम एक हैं’ के नारे लगाए गए। इससे पहले अस्थायी कर्मचारियों ने अपने सेवा विस्तार के लिए 30 व 31 दिसंबर को जबरदस्त प्रदर्शन किया था। उसके बाद उनका सेवा विस्तार छह महीने के लिए कर दिया गया था, जो पहले एक साल का होता था। अब तनख्वाह का मसला फंसा है। 

राशन, दूध विक्रेता मांग रहे रुपये, दवा भी नहीं ले पा रहे हैं

दिसंबर महीने की तनख्वाह अस्थायी कर्मचारियों की क्या रुक गई, मानो उनकी जिंदगी थम सी गई। राशन, दूध विक्रेता अब रुपये के लिए तकादा करने लगे हैं। घर में बीमार परिजनों के लिए रुपये के अभाव में दवा भी नहीं ला पा रहे हैं। बच्चों की फीस के लिए स्कूल वाले बार-बार रिमाइंडर भेज रहे हैं। 

यह कर्मचारी खुद भी नहीं समझ पा रहे हैं कि उनके साथ क्या हो रहा है। एक तरफ तनख्वाह की चिंता तो दूसरी तरफ घर, परिवार की। कर्मचारियों ने बताया कि ईएमआई भी बाउंस हो रही है। बताते हैं कि करीब 80 फीसदी कर्मचारियों ने अलग-अलग तरीके से ब्याज और बैंक से ऋण ले रखे हैं।

अस्थायी कर्मचारियों के साथ मेरी और यूनिवर्सिटी इंतजामिया की पूरी हमदर्दी है। तनख्वाह के लिए कोशिश की जा रही है। कोई दो-चार लाख का मसला तो है नहीं, जो इंतजाम करके दे दिया जाए, बल्कि जब सरकार, यूजीसी और कोई फंडिंग एजेंसी धनराशि भेजेगी, तभी उन्हें तनख्वाह मिलेगी। बहरहाल, कुलपति भी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि जल्द ही कर्मचारियों के चेहरे पर मुस्कान लौट आए। -प्रो. मोहम्मद वसीम अली, प्रॉक्टर, एएमयू

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