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Aligarh News: गोलीबारी और गुंडई से एएमयू का दामन दागदार

Fri, 08 Dec 2023 12:21 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Dec 2023 12:21 AM IST
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AMU's face tainted by firing and hooliganism
विश्वविद्यालय परिसर में जांच करती एएमयू प्रॉक्टोरियल टीम। संवाद - फोटो : Samvad
आखिर बाहरियों के प्रभाव और परिसर में प्रवेश से देश के उच्च प्रतिष्ठित संस्थान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पर कब तक दाग लगता रहेगा। हालात ये हैं कि एएमयू परिसर में हर दो दिन में फायरिंग, मारपीट, चाकूबाजी की घटनाएं हो रही हैं। मगर, एएमयू इंतजामिया के स्तर से इन घटनाओं को बाहरियों द्वारा अंजाम दिया जाना बताकर टाल-मटोल की जा रही है।
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लगातार हो रही वारदातों से कैंपस में अराजकता व गुंडई का माहौल बन रहा है। दूर दराज से पढ़ने आने वाले छात्र-छात्रा डर व दहशत में जीने को मजबूर हैं। इंतजामिया इन वारदातों पर अंकुश लगाने की बात तो दूर बाहरियों पर रोक नहीं लगा पा रही, जबकि वे खुलेआम कैंपस में घूमते हैं और कैंपस के ही हॉस्टलों में रहते हैं। जिसे लेकर इंतजामिया के अधिकारियों व छात्र नेताओं पर सरपरस्ती को लेकर सवाल भी उठते हैं।
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ये पहला मौका नहीं, जब एएमयू में आपराधिक वारदातों का क्रम चला हो। अब से पहले भी अनगिनत बार इस तरह की वारदातें होती रही हैं। मगर सीएए-एनआरसी विरोधी उपद्रव में बाहरियों द्वारा कैंपस में उपद्रव की बात आई। पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। जिसमें कुछ छात्र भी जख्मी हुए। बाद में छात्र गुट पुलिस बल प्रयोग के खिलाफ हाईकोर्ट गया। जिस पर हाईकोर्ट ने छात्र गुट की याचिका खारिज करते हुए नसीहत दी कि एएमयू में बाहरियों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए। कुछ नियमावली बनाने का इशारा पुलिस सुझावों पर किया। मगर आज तक उस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी का परिणाम है कि गुंडई करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
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आखिर क्यों नहीं हो रहे कुछ ऐसे इंतजाम

पुलिस सुझाव व हाईकोर्ट की नसीहत के बाद भी बाहरियों के प्रवेश, हॉस्टलों में बाहरियों के रहने पर रोकथाम, कैंपस में प्रवेश के समय जांच, हॉल-हॉस्टलों में आने वालों का रिकार्ड रखा जाए। कौन किसके पास आ रहा है, कितने दिन तक रह रहा है। इसका भी ब्योरा रखा जाए। समय समय पर हॉल-हॉस्टलों की चेकिंग की जाए और सालाना हॉस्टल में रहने वाले छात्रों का आवंटन भी बदला जाए। ताकि उनकी मॉनोपॉली न रह सके। मगर सरपरस्ती के चलते ये सब नहीं हो पाता है और एएमयू इंतजामिया के लोग कुछ बोल नहीं पाते।


- एएमयू में बाहरियों के प्रवेश, हॉस्टलों में रुकने पर इंतजामिया का अंकुश क्यों नहीं
- हाईकोर्ट की नसीहत के बावजूद ऐसी वारदातों पर नियंत्रण के लिए तैयारी क्यों नहीं
- बाहरियों पर एएमयू इंतजामिया और छात्र नेताओं की सरपरस्ती पर उठते हैं सवाल
-ये थी हाईकोर्ट की नसीहत-
-15 दिसंबर 2019 की रात सीएए-एनआरसी विरोधी उपद्रव के दौरान भी बाहरियों द्वारा फैलाई गई अफवाह और उनके द्वारा कैंपस में घुसकर बखेड़ा खड़ा करने पर उपद्रव की बात उठी थी। जिसमें पुलिस फोर्स को बल प्रयोग करना पड़ा था। बल प्रयोग के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए सितंबर 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इसी बात को बल दिया था। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि एएमयू में शांति के लिए बाहरियों का प्रभाव रोका जाए। इसके लिए पुलिस जवाब में दिए गए सुझावों को अमल करने की नसीहत दी गई थी।



-एएमयू में ताजा आपराधिक घटनाएं-
- एएमयू में दो अक्टूबर की रात दो छात्र गुटों के बीच जमकर फायरिंग हुई। जिसमें यूनानी चिकित्सा की तैयारी कर रहे छात्र सहित तीन लोग घायल हुए। जिन्हें इलाज के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।

-एएमयू में आठ नवंबर को एसएस हॉल नार्थ में फायरिंग हुई। इसमें एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया था। जांच में सामने आया था कि जेल से छूटकर आया पूर्व छात्र ने हर्ष फायरिंग की थी।
- होटल संचालक को एएमयू छात्रावास में ले जाकर बाहरी तत्वों ने बेरहमी से मारपीट की। वारदात में कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
-चार दिन पूर्व कैंपस में कैंटीन पर चाय पी रहे छात्र पर कई लोगों ने फायरिंग कर दी। मामले में पुलिस की ओर से कोई गिरफ्तार नहीं की गई थी।
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