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गंगा की सफाई में सहयोगी बनेगी एएमयू
अलीगढ़।
Updated Mon, 28 Sep 2015 02:23 AM IST
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गंगा की सफाई में सहयोगी बनेगी एएमयू
कौशल कुमार ओझा
अलीगढ़। गंगा को स्वच्छ बनाने में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी में है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के कहने पर एएमयू सिविल इंजीनियरिंग विभाग के इंजीनियर गंगा को मैली होने से बचाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने में जुटे हैं। खास बात यह है कि नालों के प्रदूषित पानी को स्वच्छ कर गंगा में पहुंचाने के लिए एएमयू में चल रहे स्विंग्स प्रोजेक्ट की मदद ली जाएगी। यह शोध प्रोजेक्ट यूरोपियन यूनियन एवं भारत सरकार के सहयोग से चल रहा है और इसकी खासियत यह है कि वाटर ट्रीटमेंट में कहीं भी बिजली का प्रयोग नहीं किया जाता है और गंदे व प्रदूषित पानी की सफाई पौधे करेंगे।
हरिद्वार से हुबली (पश्चिम बंगाल) तक करीब 144 छोटे-बड़े नाले हैं, जो गंगा को प्रदूषित करते हैं। इसमें बिजनौर में छोईया नाला, गढ़ मुक्तेश्वर में फुल देहड़ा, कानपुर में सीसामऊ, बनारस में अस्सीनाला के अतिरिक्त कानपुर देहात, बिल्हौर, बिठूर आदि के समीप के नाले प्रमुख हैं। कुछ महीने पूर्व एएमयू सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. नदीम खलील ने गंगा को प्रदूषित करने वाले नालो से संबंधित प्रजेंटेशन वैज्ञानिकों के साथ-साथ केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के समक्ष दिया था। प्रो. नदीम खलील एएमयू में चल रहे स्विंग्स शोध प्रोजेक्ट (सेफगार्डिंग वाटर रिसोर्सेज इन इंडिया विद ग्रीन एंड सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी) के इंचार्ज भी है। मंत्रालय को एएमयू का प्रोजेक्ट बेहद पसंद आया और गंगा मिशन से संबंधित अधिकारियों ने प्रो. नदीम खलील से चुनिंदा नालों का प्रस्ताव मांगा। एएमयू द्वारा प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा रहा है और तैयार होने के बाद उसे मिशन के पास भेज दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि स्विंग्स प्रोजेक्ट के अंतर्गत कुछ किस्म के पौधे गंदे व प्रदूषित पानी को स्वच्छ करते है। भारत में सामान्यत: यमुना तट पर पाए जाने वाले फ्रेगमाईटिस नामक पौधे की इसमें बड़ी भूमिका होगी। यूरोपीय देशों में यह काफी सफलता से कार्य कर रहा है। कुछ माह पूर्व एएमयू कुलपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गंगा की सफाई में सहयोग देने की इच्छा व्यक्त की थी।
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कौशल कुमार ओझा
अलीगढ़। गंगा को स्वच्छ बनाने में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी में है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के कहने पर एएमयू सिविल इंजीनियरिंग विभाग के इंजीनियर गंगा को मैली होने से बचाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने में जुटे हैं। खास बात यह है कि नालों के प्रदूषित पानी को स्वच्छ कर गंगा में पहुंचाने के लिए एएमयू में चल रहे स्विंग्स प्रोजेक्ट की मदद ली जाएगी। यह शोध प्रोजेक्ट यूरोपियन यूनियन एवं भारत सरकार के सहयोग से चल रहा है और इसकी खासियत यह है कि वाटर ट्रीटमेंट में कहीं भी बिजली का प्रयोग नहीं किया जाता है और गंदे व प्रदूषित पानी की सफाई पौधे करेंगे।
हरिद्वार से हुबली (पश्चिम बंगाल) तक करीब 144 छोटे-बड़े नाले हैं, जो गंगा को प्रदूषित करते हैं। इसमें बिजनौर में छोईया नाला, गढ़ मुक्तेश्वर में फुल देहड़ा, कानपुर में सीसामऊ, बनारस में अस्सीनाला के अतिरिक्त कानपुर देहात, बिल्हौर, बिठूर आदि के समीप के नाले प्रमुख हैं। कुछ महीने पूर्व एएमयू सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. नदीम खलील ने गंगा को प्रदूषित करने वाले नालो से संबंधित प्रजेंटेशन वैज्ञानिकों के साथ-साथ केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के समक्ष दिया था। प्रो. नदीम खलील एएमयू में चल रहे स्विंग्स शोध प्रोजेक्ट (सेफगार्डिंग वाटर रिसोर्सेज इन इंडिया विद ग्रीन एंड सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी) के इंचार्ज भी है। मंत्रालय को एएमयू का प्रोजेक्ट बेहद पसंद आया और गंगा मिशन से संबंधित अधिकारियों ने प्रो. नदीम खलील से चुनिंदा नालों का प्रस्ताव मांगा। एएमयू द्वारा प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा रहा है और तैयार होने के बाद उसे मिशन के पास भेज दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि स्विंग्स प्रोजेक्ट के अंतर्गत कुछ किस्म के पौधे गंदे व प्रदूषित पानी को स्वच्छ करते है। भारत में सामान्यत: यमुना तट पर पाए जाने वाले फ्रेगमाईटिस नामक पौधे की इसमें बड़ी भूमिका होगी। यूरोपीय देशों में यह काफी सफलता से कार्य कर रहा है। कुछ माह पूर्व एएमयू कुलपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गंगा की सफाई में सहयोग देने की इच्छा व्यक्त की थी।
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