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एएमयू : पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. मोहम्मद शब्बीर का निधन
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लॉ फैकल्टी के पूर्व डीन और कार्यवाहक कुलपति रहे प्रोफेसर मोहम्मद शब्बीर का निधन हो गया है। वह मधुमेह से पीड़ित थे जांच में उनके करोना पॉजिटिव होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा प्रख्यात नाटककार आलोचक और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय उर्दू विभाग के पूर्व फैकल्टी मेंबर प्रोफेसर शमीम हनफी का भी निधन हो गया है।
एएमयू के जनसंपर्क अधिकारी उमर सलीम पीरजादा ने बताया कि प्रोफेसर शब्बीर का नाम देश के नामी कानून जानकारों में गिना जाता है। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किए गए। उनके पढ़ाए गए कई छात्रों में आज कई सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता हैं। कई छात्र देश के विभिन्न राज्यों में न्यायाधीश के पद पर हैं।
दूसरी और प्रोफेसर शमीम हनफी एएमयू उर्दू डिपार्टमेंट में फैकल्टी मेंबर रहते हुए यहां साहित्यिक गतिविधियों में बहुत सक्रिय रहे थे। 1939 में सुल्तानपुर में पैदा हुए प्रोफेसर शमीम हनफी ने एएमयू के बाद दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया में अपनी सेवाएं दीं। उन्हें 2015 में भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा अलकनंदा अवार्ड दिया गया। साथ ही ग़ालिब अवार्ड भी प्रदान किया गया। उनकी नाट्य कृतियों में मिट्टी का बुलावा और बाजार नींद में शामिल हैं। जिनको कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।
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एएमयू के जनसंपर्क अधिकारी उमर सलीम पीरजादा ने बताया कि प्रोफेसर शब्बीर का नाम देश के नामी कानून जानकारों में गिना जाता है। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किए गए। उनके पढ़ाए गए कई छात्रों में आज कई सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता हैं। कई छात्र देश के विभिन्न राज्यों में न्यायाधीश के पद पर हैं।
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दूसरी और प्रोफेसर शमीम हनफी एएमयू उर्दू डिपार्टमेंट में फैकल्टी मेंबर रहते हुए यहां साहित्यिक गतिविधियों में बहुत सक्रिय रहे थे। 1939 में सुल्तानपुर में पैदा हुए प्रोफेसर शमीम हनफी ने एएमयू के बाद दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया में अपनी सेवाएं दीं। उन्हें 2015 में भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा अलकनंदा अवार्ड दिया गया। साथ ही ग़ालिब अवार्ड भी प्रदान किया गया। उनकी नाट्य कृतियों में मिट्टी का बुलावा और बाजार नींद में शामिल हैं। जिनको कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।
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