फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   AMU Department of Physics and Muon

AMU: म्यूऑन की रफ्तार प्रकाश के बराबर, अध्ययन में लग रहा वक्त, 2035 तक बढ़ा प्रोजेक्ट

Thu, 19 Dec 2024 11:49 AM IST
चमन शर्मा आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़
आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 19 Dec 2024 11:49 AM IST
सार

म्यूऑन की खोज के लिए जिनेवा में महामशीन के पास ही एलिश प्रोजेक्ट के तहत एक साढ़े तीन मंजिला ऊंचाई का म्यूऑन स्पेक्ट्रोस्कोप बनाया गया है। इस स्पेक्ट्रोस्कोप के लिए बनाए गए पांच डिटेक्टरों में से एक डिटेक्टर को एएमयू ने ही बनाया है। इससे मिलने वाले डाटा का अध्ययन भी एएमयू में ही होता है।

विज्ञापन
AMU Department of Physics and Muon
एएमयू का भौतिक विज्ञान विभाग - फोटो : संवाद

विस्तार

स्विटजरलैंड के जिनेवा में महामशीन के जरिए ब्रह्मांड के रहस्यों से पर्दा उठाया जा रहा है। इसमें ब्रह्मांड के निर्माण में शामिल बेहद सूक्ष्म कण म्यूऑन की प्रकृति, गति और उनके असर का अध्ययन किया जा रहा है। एएमयू के भौतिक विज्ञानी भी इसमें लगे हैं। म्यूऑन एक इलेक्ट्रॉन से 200 गुना भारी होता है। इसकी गति प्रकाश की गति के बराबर होती है। इसलिए अध्ययन में ज्यादा वक्त लग रहा है। इसीलिए केंद्र सरकार से इस प्राेजेक्ट को वर्ष 2035 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। जिससे युवा विज्ञानियों में उत्साह बढ़ गया है। एएमयू को इसके लिए 5.4 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है।

विज्ञापन


म्यूऑन की खोज के लिए जिनेवा में महामशीन के पास ही एलिश प्रोजेक्ट के तहत एक साढ़े तीन मंजिला ऊंचाई का म्यूऑन स्पेक्ट्रोस्कोप बनाया गया है। इस स्पेक्ट्रोस्कोप के लिए बनाए गए पांच डिटेक्टरों में से एक डिटेक्टर को एएमयू ने ही बनाया है। इससे मिलने वाले डाटा का अध्ययन भी एएमयू में ही होता है। अध्ययन के बाद इसकी रिपोर्ट सर्न कंपनी को जिनेवा भेजी जाती है। इस डिटेक्टर की मरम्मत एएमयू के भौतिक विज्ञान विभाग के मो. मोहसिन खान और दानिश आजमी करते हैं। इनका अक्सर जिनेवा आना-जाना बना रहता है।
विज्ञापन


विभाग की श्वेता सिंह, उमामा, निदा मलिक और बुशरा अली भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ी हैं। बुशरा अली हाल ही में जिनेवा से लौटी हैं। उन्होंने बताया कि अभी म्यूऑन की प्रकृति और उसकी गति का अध्ययन हो रहा है। इसकी गति प्रकाश के बराबर यानी बहुत तेज है, इसलिए अध्ययन में समय लग रहा है। इससे क्या-क्या और पता चलेगा यह अभी कहा नहीं जा सकता है। केंद्र सरकार से इस प्राेजेक्ट को वर्ष 2035 तक बढ़ाने की मंजूरी मिल चुकी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

म्यूऑन कण के अध्ययन के लिए प्रयोग जारी है। अभी इसकी कुछ-कुछ जानकारी मिली है। बहुत कुछ पता करना बाकी है। एएमयू भी इसमें लगातार काम कर रहा है।-प्रो. शकील अहमद, भौतिक विज्ञान विभाग एएमयू।

प्रकृति में मौजूद बेहद सूक्ष्म कणों में से एक म्यूऑन है। इसका अध्ययन जारी है। इसमें अभी और वक्त लगेगा। यह बहुत धैर्य और मेहनत का प्रोजेक्ट है। इसकी खोज पूरी होने के बाद पूरी दुनिया बहुत कुछ जान सकेगी।-प्रो.अनीसुल एन उस्मानी, चेयरमैन भौतिक विज्ञान विभाग एएमयू।

Trending Videos

एएमयू और म्यूऑन का अध्ययन

  • 1996 से एएमयू म्यूऑन कणों का अध्ययन कर रहा है
  • 2008 से म्यूऑन कणों के अध्ययन के लिए जिनेवा में अध्ययन शुरू हुआ
  • एएमयू के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो.मो. इरफान, प्रो.मो.जफर, प्रो.तुफैल अहमद, प्रो.शकील अहमद, डॉ.नजीर ने इसके अध्ययन को आगे बढ़ाया
  • म्यूऑन के अध्ययन को लेकर दो छात्र पीएचडी कर चुके हैं। 
  • दो छात्र वर्तमान में पीएचडी कर रहे हैं। 
  • दो छात्र पीएचडी के बाद आगे का अध्ययन कर रहे हैं।
एएमयू भौतिक विज्ञान विभाग
म्यूऑन को ऐसे समझिए
  • महामशीन प्रोजेक्ट में ब्रह्मांड की उत्पति को समझने के लिए प्रयोग हो रहे हैं
  • इसमें एक बेहद महत्वपूर्ण और सूक्ष्म कण म्यूऑन है, जिसका अध्ययन जारी है
  • म्यूऑन एक इलेक्ट्राॅन से 200 गुना भारी होता है, इसकी गति इलेक्ट्रॉन के बराबर है
  • जिनेवा में तीन मंजिल ऊंचाई वाला एक विशाल म्यूऑन स्पेक्ट्रोस्कोप बनाया गया है
  • इस स्पेक्ट्रोस्कोप में पांच डिटेक्टर बनाए गए हैं, इनमें से एक एएमयू ने बनाया है
  • एएमयू ने कोलकाता के संस्थान के साथ इसको कड़ी मेहनत के बाद तैयार किया
  • तब से एएमयू ही इस डिटेक्टर की देखरेख और मरम्मत का काम करता आ रहा है
  • जिनेवा से मिलने वाले डाटा का अध्ययन एएमयू के भौतिक विज्ञान विभाग में होता है
  • डाटा अध्ययन के बाद इसकी पूरी रिपोर्ट जिनेवा की सर्न कंपनी को भेजी जाती है
  • म्यूऑन का अध्ययन एलिश प्रोजेक्ट का हिस्सा है, एलिश प्रोजेक्ट महामशीन की खोजों से जुड़ा है

महामशीन और म्यूऑन प्रोजेक्ट
  • वर्ष 2008 में स्विटजरलैंड के जिनेवा में महामशीन के साथ गाॅड पार्टीकल का प्रयोग शुरू हुआ
  • 1600 से ज्यादा भौतिक वैज्ञानिक और इंजीनियर इस प्रोजेक्ट में खोज व अध्ययन कर रहे हैं
  • अमेरिका, जापान, रूस, यूरोप, भारत सहित 24 देशों के वैज्ञानिक इस प्रोजेक्ट में हैं शामिल
  • इसके एलिश प्रोजेक्ट में भारत के लगभग 16 उच्च शिक्षण संस्थानों के वैज्ञानिक कार्यरत
  • डिपार्टमेंट ऑफ एटामिक एनर्जी और डिपार्टमेंट ऑफ साइंस से 100 करोड़ रुपये मिले
  • एएमयू को इससे 5.4 करोड़ रुपये दिए गए, हाल ही में एएमयू के छात्र जिनेवा से लौटे
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed