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कालेज से विश्वविद्यालय के सफर में पूर्व छात्रों का बड़ा योगदान : कुलपति
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एएमयू कुलपति तारिक मंसूर।
- फोटो : CITY OFFICE
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्चुअल समारोह में शामिल कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि एक कॉलेज से विश्वविद्यालय बनने के सफर में किसी एक व्यक्ति का योगदान नहीं है बल्कि उन सैकड़ों पूर्व छात्रों और बुद्धिजीवियों का बड़ा योगदान है, जो शिक्षा की मुहिम से जुड़े रहे।
उन्होंने शताब्दी वर्ष समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरे विश्वविद्यालय परिवार की ओर से स्वागत किया और कहा कि यह एक ऐतिहासिक मौका है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में वह दो बिंदुओं की तरफ ध्यान दिलाना चाहेंगे। पहला सन 1961 में पहले शिक्षा मंत्री रहे मौलाना अबुल कलाम आजाद ने कहा था कि एएमयू केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखने वाला स्थान है। दूसरी बात यह कि अंग्रेज विद्वान सर हैमिल्टन ने इसको आधुनिक शिक्षा का पहला इस्लामिक संस्थान कहा था। यह दोनों ही बातें आज शताब्दी वर्ष समारोह में ताजा हो चली हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों ने इसके विकास में बड़ा योगदान दिया है।
विश्वविद्यालय ने केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि सर सैयद हिंदू मुस्लिम एकता के बड़े पक्षधर थे। विश्वविद्यालय की स्थापना की मुहिम में उनका हिंदू सहयोगियों ने भी बड़ा साथ दिया। आज भी इस विश्वविद्यालय के दरवाजे बिना किसी धार्मिक भेदभाव के सभी के लिए समान रूप से खुले हुए हैं। आज हम भविष्य के मुताबिक स्वयं को ढालने में जुटे हैं। यहां पर न्यूक्लियर फिजिक्स, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैज्ञानिक शोध, डाटा साइंस, मेडिकल एडवांसमेंट आदि अन्य संस्थानों की दिशा में बड़ा काम होने जा रहा है।
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कुरान ख्वानी से शुरुआत, तराना-राष्ट्रगान से समापन
एएमयू के प्रशासनिक ब्लाक के सभा कक्ष में वर्चुअल कार्यक्रम में कुलपति प्रो. तारिक मंसूर के साथ सह कुलपति प्रो. जहीरुद्दीन, रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद, मानद कोषाध्यक्ष पद्मश्री हकीम जिल्लुर्रहमान, नबाव इब्ने सईद खां छतारी प्रमुख रूप से मौजूद थे। कार्यक्रम का शुभारंभ कारी मोहम्मद आजम ने कुरान ख्वानी के साथ किया। सर सैयद एकेडमी के निदेशक प्रो. अली मोहम्मद नकवी ने विश्वविद्यालय के सौ वर्ष के सफर में उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। वीमेंस कालेज की प्रिंसिपल प्रो. नईमा खातून ने महिलाओं की शिक्षा में एएमयू के योगदान विषय पर अपना संबोधन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. फायजा अब्बासी ने किया। समापन एएमयू के तराना व राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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उन्होंने शताब्दी वर्ष समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरे विश्वविद्यालय परिवार की ओर से स्वागत किया और कहा कि यह एक ऐतिहासिक मौका है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में वह दो बिंदुओं की तरफ ध्यान दिलाना चाहेंगे। पहला सन 1961 में पहले शिक्षा मंत्री रहे मौलाना अबुल कलाम आजाद ने कहा था कि एएमयू केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखने वाला स्थान है। दूसरी बात यह कि अंग्रेज विद्वान सर हैमिल्टन ने इसको आधुनिक शिक्षा का पहला इस्लामिक संस्थान कहा था। यह दोनों ही बातें आज शताब्दी वर्ष समारोह में ताजा हो चली हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों ने इसके विकास में बड़ा योगदान दिया है।
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विश्वविद्यालय ने केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि सर सैयद हिंदू मुस्लिम एकता के बड़े पक्षधर थे। विश्वविद्यालय की स्थापना की मुहिम में उनका हिंदू सहयोगियों ने भी बड़ा साथ दिया। आज भी इस विश्वविद्यालय के दरवाजे बिना किसी धार्मिक भेदभाव के सभी के लिए समान रूप से खुले हुए हैं। आज हम भविष्य के मुताबिक स्वयं को ढालने में जुटे हैं। यहां पर न्यूक्लियर फिजिक्स, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैज्ञानिक शोध, डाटा साइंस, मेडिकल एडवांसमेंट आदि अन्य संस्थानों की दिशा में बड़ा काम होने जा रहा है।
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कुरान ख्वानी से शुरुआत, तराना-राष्ट्रगान से समापन
एएमयू के प्रशासनिक ब्लाक के सभा कक्ष में वर्चुअल कार्यक्रम में कुलपति प्रो. तारिक मंसूर के साथ सह कुलपति प्रो. जहीरुद्दीन, रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद, मानद कोषाध्यक्ष पद्मश्री हकीम जिल्लुर्रहमान, नबाव इब्ने सईद खां छतारी प्रमुख रूप से मौजूद थे। कार्यक्रम का शुभारंभ कारी मोहम्मद आजम ने कुरान ख्वानी के साथ किया। सर सैयद एकेडमी के निदेशक प्रो. अली मोहम्मद नकवी ने विश्वविद्यालय के सौ वर्ष के सफर में उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। वीमेंस कालेज की प्रिंसिपल प्रो. नईमा खातून ने महिलाओं की शिक्षा में एएमयू के योगदान विषय पर अपना संबोधन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. फायजा अब्बासी ने किया। समापन एएमयू के तराना व राष्ट्रगान के साथ हुआ।