अमर उजाला अभियान: पढ़ना-पढ़ाना है, कोरोना को हराना है, स्कूलों में प्रवेश द्वार से लेकर क्लास रूम तक दिख रही जागरूकता
स्कूल प्रबंधन ने कोरोना-ओमिक्रॉन से बचाव के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं। विद्यार्थियों, शिक्षकों से लेकर कर्मचारियों को शत-प्रतिशत कोविड-19 की दोनों डोज लग चुकी हैं। प्रबंधन का मानना है कि उन्हें अब क्लास रूम में बच्चों की ऑफलाइन पढ़ाई से खुशी मिल रही है।
विस्तार
कोरोना महामारी के चलते लंबे समय तक स्कूल बंद रहे, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई जारी रही। उधर, कोरोना-ओमिक्रॉन संक्रमण की दर में गिरावट आती गई। लंबे समय के बाद स्कूल खुल तो गए, लेकिन व्यापक बदलाव के साथ। स्कूल के प्रवेश द्वार से लेकर क्लास रूम तक कोविड-19 के प्रति जागरूकता दिख रही है।
स्कूल प्रबंधन ने कोरोना-ओमिक्रॉन से बचाव के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं। विद्यार्थियों, शिक्षकों से लेकर कर्मचारियों को शत-प्रतिशत कोविड-19 की दोनों डोज लग चुकी हैं। इनके सुरक्षा कवच में आने से स्कूल प्रबंधन का मानना है कि उन्हें कोरोना से रोना नहीं आएगा, बल्कि अब क्लास रूम में बच्चों की ऑफलाइन पढ़ाई से खुशी मिल रही है। एक सुखद अनुभूति हो रही है। ऐसा ही रहे यही ईश्वर से कामना करते हैं।
ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी, शिक्षक व कर्मचारी सुरक्षा कवच में
कोराना-ओमिक्रॉन के बाद ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। स्कूल में 1500 विद्यार्थी, 50 शिक्षक व 20 कर्मचारी हैं। स्कूल में कोरोना महामारी से पहले विद्यार्थी एक साथ प्रवेश करते थे। मगर अब ऐसा नहीं है। एक-एक विद्यार्थी को प्रवेश कराया जाता है। पहले उनकी थर्मल स्कैनर से स्कैनिंग होती है। अगर मास्क नहीं पहने हैं, तो स्कूल की तरफ से मुहैया कराया जाता है। इसके बाद बड़े बच्चों और छोटे बच्चों के लिए अलग-अलग प्रार्थना सभा होती है। सभा में दो-तीन मिनट कोविड-19 के बारे में जानकारी दी जाती है। अलीगढ़ से लेकर दुनिया में कोरोना के कितने मामले हैं, बताया जाता है।
क्लास रूम में हर बच्चे के स्वास्थ्य पर शिक्षक की नजर होती है। हर बच्चे से पूछा जाता है कि किसी को खांसी और बुखार तो नहीं है। स्कूल प्रबंधन ने कोविड हेल्थ कार्ड बनाया है, जिसमें शिक्षकों व विद्यार्थियों को बुखार, खांसी आदि की जानकारी भरनी होती है। इस कार्ड को सीएमओ ने भी सराहा। विद्यार्थी, शिक्षक व कर्मचारी को कोविड-19 का डबल डोज लग चुका है। सभी सुरक्षा कवच में हैं। स्कूल के हर एंट्री प्वाइंट पर सैनिटाइजर मशीन लगी है। छुट्टी होने के बाद और क्लास शुरू होने से पहले क्लास रूम को सैनिटाइज किया जाता है। सभी बच्चे अपनी पानी की बोतल लाते हैं। उन्हें किसी को बोतल देने और हाथ मिलाने से मना किया गया है। लाइब्रेरी में भी अलग-अलग समय में बच्चों को एंट्री दी जाती है। पिछले दिनों हुई परीक्षा जिस कमरे में होती, उस कमरे में अगली परीक्षा नहीं होती थी। क्लास रूम को हाईटेक बनाया गया है। स्कूल में कोविड हेल्प डेस्क भी बनी है।
स्कूल में हर 15 दिन में कोविड कमेटी की बैठक होती है, जिसमें शिक्षक व बच्चे शामिल हैं। बच्चों को कोविड के बारे में पता हो, यही बताने का प्रयास किया जाता है। समझाया जाता है कि सावधानी से संक्रमण को रोका जा सकता है। स्कूल में जनरल नॉलेज विषय में जो किताबें लगाई गईं, उसमें भी कोविड-19 और ओलंपिक-2021 का चैप्टर है, ताकि बच्चे उससे जागरूक हो सकें। कोविड-19 को पढ़-समझकर उसकी परीक्षा दें। बच्चों में विश्वास पैदा करना है। बच्चों का बीमारी से मृत्यु का डर खत्म होना भी जरूरी है।
-श्याम कुंतैल, प्रधानाचार्य, ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल
अलबरकात स्कूल में मेडिकल सुविधा
कोविड-19 महामारी के बाद अलबरकात स्कूल में हेल्थ क्लीनिक की स्थापना की गई है। रोजाना क्लास रूम में फॉगिंग होती है। स्कूल प्रबंध समिति के संयुक्त सचिव डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी ने बताया कि स्कूल में परामर्शदाता तैनात है। कोविड से बचाव के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब स्कूल को नियमित, मानक, अनुशासन और समर्पण के साथ चलाना होगा। बच्चों को अलग-अलग गतिविधियों से जोड़े रखना होगा। स्कूल का जो पहले वातावरण था, वह ढाई साल पीछे जा चुका है।
उन्होंने बताया कि स्कूल, किताब व स्पोर्ट्स को भूलकर मोबाइल से बच्चे चिपक गए हैं। अब बच्चों को स्कूल वापस लाना होगा, जिसमें थोड़ा वक्त लगेगा। कोरोना काल में माता-पिता का भी बच्चों की पढ़ाई पर कम तव्वजो रहा है, इसलिए स्कूल और शिक्षकों को बहुत काम करना होगा। स्कूल की जो जिंदगी थी, उसे वापस लौटाकर लाना होगा। दुनिया भर में तमाम एप मौजूद हैं, लेकिन क्लास ही है, जो इंसान के व्यक्तित्व को बदलता है। आदतों को सीखने का मौका मिलता है। जुबान, ड्रेस सेंस, सेवा भाव स्कूल में ही पैदा होता है। सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक बच्चा स्वयं अपनी जिंदगी नियंत्रित करता है। वह आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करता है।
विजडम पब्लिक स्कूल में सिटिंग प्लान में बदलाव
कोरोना के बाद विजडम पब्लिक स्कूल की क्लास में सिटिंग प्लान में बदलाव किया गया है। प्रधानाचार्या निर्मल अग्रवाल ने बताया कि कोरोना-ओमिक्रॉन संक्रमण से पहले क्लास में 40-50 सिटिंग प्लान होता था, जो अब 24 का हो गया है। बच्चों को कोविड-19 का डबल डोज टीका लग चुका है। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने में असहज महसूस कर रहे थे, जो धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। क्लास रूम का रोजाना सैनिटाइजेशन होता है। बच्चों में फिजिकल डिस्टेसिंग बनाने के लिए अनुशासन समिति के लोगों को मैदान, कोरिडोर, प्रार्थना सभा की ड्यूटी लगा रखी है।
कोरोना काल के बाद डीपीएस में बच्चों की तादाद बढ़ी
डीपीएस की प्रिंसिपल आरती झा ने बताया कि कोरोना काल में ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। हालांकि, स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा की खातिर रोजाना स्कूल को सैनिटाइज करा रहा था। तमाम प्रोटोकॉल का पालन कर रहा था। अभिभावकों को जागरूक भी कर रहा था। लेकिन जैसे-जैसे हालात सामान्य होने लगे, वैसे-वैसे स्कूल में बच्चों की तादाद बढ़ने लगी। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के प्रति शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ गई। सैनिटाइजेशन, मास्क आदि प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।