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अलीगढ़ः शांति निकेतन कॉलोनी के चार सौ मकानों का आवंटन निरस्त

Mon, 02 Aug 2021 12:09 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Aug 2021 12:09 AM IST
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Allotment of four hundred houses of Shantiniketan Colony canceled
आशीष श्रीवास्तव
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विकास प्राधिकरण ने शांति निकेतन कॉलोनी के ईडब्ल्यूएस मकानों के 400 आवंटियों के आवंटन निरस्त कर दिए हैं। यह कार्रवाई आवंटियों द्वारा बकाया जमा न करने पर की गई है। शेष बचे 50 आवंटियों के भी आवंटन निरस्त करने की तैयारी है। दरअसल, किस्त का बकाया करीब तीन करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
अलीगढ़ विकास प्राधिकरण की शांति निकेतन कॉलोनी में दुर्बल आय वर्ग के 450 मकान हैं। इन मकानों के आवंटी करीब 20 सालों से मकान की किस्तें जमा नहीं कर रहे थे। इन पर करीब तीन करोड़ रुपये का बकाया चल रहा है। तमाम नोटिसों के बावजूद बकाया जमा न करने पर प्राधिकरण ने 400 आवंटियों के आवंटन निरस्त कर दिए हैं। इन आवंटियों ने एक भी किस्त जमा नहीं की थी। एक-दो किस्त जमा करने वाले 50 अन्य आवंटियों को पूर्व में अंतिम नोटिस जारी किया जा चुका है। अब इनके भी आवंटन निरस्त किए जाने की तैयारी है। विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता देवेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि किस्त जमा न करने पर शांति निकेतन कॉलोनी के ईडब्ल्यूएस मकानों के 400 आवंटियों के आवंटन निरस्त किए गए हैं। शेष 50 के आवंटन निरस्त किए जाने की तैयारी है। इसके बाद नए सिरे से इन मकानों के आवंटन किए जाएंगे।
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1990 में विकसित की गई थी कॉलोनी
शांति निकेतन कॉलोनी के आवंटियों का विवाद करीब 31 वर्ष पुराना है। बताया जाता है कि वर्ष 1990 में प्राधिकरण ने यह कॉलोनी विकसित की थी। लेकिन आवंटन होने से पहले अलीगढ़ में दंगा हो गया था। पार्षद मुशर्रफ हुसैन ने बताया कि उस समय बड़ी संख्या में लोग घर से बेघर हो गए थे और उनमें से कुछ लोग शांति निकेतन कॉलोनी में खाली पड़े ईडब्ल्यूएस मकानों में रहने लगे। वर्ष 1993 में यह मामला उठने पर तत्कालीन डीएम तुलसी गौड़ ने सर्वे कराया और जिस मकान में जो व्यक्ति या परिवार रह रहा था, उसकी एक-एक हजार रुपये की पंजीकरण रसीद कटवाई गई।
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इसके बाद करीब 27 हजार रुपये की कीमत वाले मकानों की किस्तें 20 साल में जमा करना निर्धारित कर आवंटियों से प्रति माह 150 रुपये के हिसाब से किस्त जमा कराने का प्रावधान किया गया। इसके बाद कई लोगों ने अपने आवास दोगुनी या तीन गुनी कीमत लेकर दूसरों को बेच दिए। खरीद बिक्री का यह सिलसिला लगातार चलता रहा, लेकिन किसी ने किस्त जमा नहीं की। इससे किस्त का बकाया करीब तीन करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
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