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Aligarh: मरीज को चढ़ा दिया गलत खून, अब कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना

Sun, 07 Aug 2022 10:50 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Sun, 07 Aug 2022 10:50 AM IST
सार

एक युवती को इलाज के दौरान गलत ग्रुप का खून चढ़ाने के बाद उसकी हालत बिगड़ने मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने महानगर के प्रख्यात सर्जन, निजी पैथोलॉजी और जिला अस्पताल के ब्लड बैंक के प्रभारी के खिलाफ भारी जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। 

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District Consumer Commission imposed fine for giving blood of wrong group to girl during treatment
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

महानगर के प्रख्यात सर्जन, निजी पैथोलॉजी और जिला अस्पताल के ब्लड बैंक के प्रभारी के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग ने 45 लाख रुपये जुर्माने का आदेश जारी किया है। यह आदेश एक युवती को इलाज के दौरान गलत ग्रुप का खून चढ़ाने के बाद उसकी हालत बिगड़ने संबंधी प्रकरण में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। साथ ही, युवती के इलाज पर हुए खर्च आदि का भी हर्जाना देने के आदेश दिए हैं।

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यह आदेश जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश हसनैन कुरैशी, सदस्य आलोक उपाध्याय व पूर्णिमा सिंह ने संयुक्त रूप से दिया है। इस संबंध में हाथरस जिले के सिकंदराराऊ नगला शीशघर के रामजीलाल ने अर्जी दायर की थी, जिसमें गांधी पार्क चौराहा स्थित अशोका पैथॉलाजी के संचालक डॉ. अशोक कुमार, सर्जन डॉ. ज्ञान कुमार व मलखान सिंह जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी को आरोपी बनाया गया।
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अर्जी में पीड़ित ने कहा कि उनकी 19 वर्षीय बेटी के 26 फरवरी 2009 को छत से गिरने के कारण पैर में फ्रैक्चर हो गया था, जिसे इलाज के लिए डॉ. ज्ञान कुमार के यहां लाया था। डॉक्टर ज्ञान कुमार ने कहाकि 28 फरवरी को इसका ऑपरेशन करना पड़ेगा। इसके लिए खून की जरूरत पड़ सकती है। इसी क्रम में बेटी के खून का नमूना लेकर उसको अशोका पैथोलॉजी भेजा, वहां जांच में खून एबी पॉजिटिव बताया गया। जबकि वास्तव में खून का ग्रुप एबीओ-बी पॉजिटिव है। अशोका पैथोलॉजी की इस रिपोर्ट के आधार पर 27 फरवरी को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से निर्धारित शुल्क जमा कर एबी पॉजिटिव ग्रुप का खून लिया।
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वही, खून डॉ. ज्ञान कुमार ने ऑपरेशन के दौरान जरूरत पड़ने पर चढ़ा दिया। खून चढ़ते ही बेटी की हालत बिगड़ने लगी। इस पर डॉक्टर के कहने पर पुन: खून की जांच कराई तो फिर वही रिपोर्ट दी गई। इस पर डॉक्टर ने दो मार्च को दूसरी पैथोलॉजी से जांच कराई तो वहां ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव बताया गया। इस पर डॉक्टर ने बेटी को आगरा रेफर कर दिया। आयोग ने कहा कि पहले तो डॉ. ज्ञान कुमार को अपने यहां जांच करनी चाहिए थी या अपने कर्मचारी को सैंपल लेकर भेजना चाहिए था और खून भी अपने कर्मचारी से मंगवाना चाहिए था।

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को भी खून देते समय अपने यहां मरीज के सैंपल की जांच करनी थी। इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने आदेश दिया है कि एक लाख रुपया उपचार खर्च नौ फीसदी ब्याज दर से तीनों लोग पीड़ित को भुगतान करेंगे। साथ में 25 हजार रुपया वाद खर्च दें। इसके अलावा, इतनी बड़ी लापरवाही पर तीनों लोग 45 लाख रुपया उपभोक्ता वेलफेयर फंड में जमा करेंगे।

बमुश्किल बची युवती की जान, बेचने पड़े जेवर 
आगरा के पुष्पांजलि हॉस्पिटल के निर्देश पर अलग-अलग पैथॉलॉजी से जांच कराई तो वहां ब्लड ग्रुप एबीओ-बी पॉजिटिव बताया गया। कई दिन के इलाज के बाद युवती की जान बच सकी। इस दौरान अलीगढ़ में ही उसकी किडनी पर असर पढ़ने लगा था। पीड़ित के अनुसार, जेवर बेचकर व कर्ज लेकर पीड़ित ने बेटी का इलाज कराया। इस याचिका पर जिला उपभोक्ता आयोग ने अशोका पैथोलॉजी के साथ-साथ डॉ. ज्ञान कुमार व जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी को दोषी माना है। 

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