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अलीगढ़ ः कुशल कारीगरों की है दरकरार... कम वेतन बना दीवार

Fri, 16 Jul 2021 12:45 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jul 2021 12:45 AM IST
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Aligarh: There is a need for skilled craftsmen... the wall built on low wages
आशीष श्रीवास्तव, अलीगढ़।
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अलीगढ़ के विश्व प्रसिद्ध ताला एवं हार्डवेयर उद्योग को कड़ी प्रतिस्पर्धा में कदम ताल करने के लिए हजारों प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत है। लेकिन यहां कुशल कारीगरों की बेहद कमी है। आलम यह है कि स्थानीय फैक्टरियों को जरूरत पांच कुशल कारीगरों की है तो उन्हें एक से ही काम चलाना पड़ रहा है। ऐसे में यहां के उद्योग अभी भी पुराने कारीगरों के कौशल के दम पर चल रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण कम वेतन है। महंगाई के दौर में युवा कम वेतन पर इस क्षेत्र में हाथ नहीं आजमा रहे हैं।
कौशल विकास मिशन में प्रशिक्षण और रोजगार के आंकड़े इस बात के प्रत्यक्ष गवाह हैं। पिछले चार साल में जिले की राजकीय आईटीआई से 27728 युवाओं ने विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण लिया है। सेवायोजन विभाग की ओर से लगाए गए रोजगार मेलों में 10985 युवाओं का चयन हुआ है। इनमें से 80 फीसदी का चयन बाहरी कंपनियों ने किया।
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स्थानीय उद्योगों में प्रशिक्षित व कुशल कारीगरों की कमी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फैक्ट्रियों को यदि पांच कुशल कारीगरों की आवश्यकता है तो एक ही मिल रहा है। वह भी पारंपरिक रूप से इस कारोबार से जुड़ा हुआ। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक श्रीनाथ पासवान ने बताया कि ताला एवं हार्डवेयर उद्योग में प्रशिक्षित व कुशल लेबर की कमी का मुख्य कारण कम तनख्वाह है। इस वजह से युवा दिल्ली एवं एनसीआर समेत अन्य बड़े शहरों में रोजगार की तलाश करते हैं और वहीं पर नौकरी करते हैं।
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कोरोना महामारी से प्रशिक्षण की योजना खटाई में
पिछले साल यूपीआईडी नोएडा ने लॉक इंडस्ट्रीज ऑफ अलीगढ़ पर एक वेबिनार का आयोजन किया था। ओडीओपी पर चर्चा के दौरान लॉक इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिये आधुनिक तकनीकी सहायता, प्रोडक्ट डिस्प्ले एंड नालेज सेंटर, आन लाइन मार्केटिंग की जरूरत बताई गई।
सबसे ज्यादा जरूरत प्रशिक्षित लेबर की बताई गई। इस बात की भी योजना बनी कि निकट भविष्य में एकेटीयू और सृजन संचार मिलकर ताला उद्योग को स्किल्ड लेबर उपलब्ध कराने के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेंगे। लेकिन कोरोना महामारी के चलते बात आगे नहीं बढ़ सकी।
व्यवसायी बोले - कुशल कारीगरों की बेहद जरूरत
- आज मोबाइल व इंटरनेट का जमाना है। नई पीढ़ी इन्हीं क्षेत्रों में काम तलाश रही है। ताला या हार्डवेयर जैसे मेहनतकश उद्योगों में रुचि कम है। पुराने कुशल कामगार भी नहीं चाहते कि उनके बच्चे इस क्षेत्र में आएं। इ स वजह से स्थानीय ताला एवं हार्डवेयर फैक्ट्रियों में स्किल्ड लेबर की कमी लगातार बनी हुई है। यदि पांच की आवश्यकता है तो एक ही कुशल कारीगर उपलब्ध हो पा रहा है। उद्यमी अत्याधुनिक मशीनों का सहारा लेकर काम चला रहे हैं। - गौरव मित्तल, लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष
- सरकारी आईटीआई या अन्य संस्थान युवाओं को बेसिक ट्रेनिंग देते हैं। अलीगढ़ में ताला एवं हार्डवेयर की छोटी यूनिटें होने के कारण उद्यमियों के लिये युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देना संभव नहीं है। दिल्ली एवं एनसीआर की बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में प्रशिक्षण की व्यवस्था होने के कारण युवा वहीं ट्रेनिंग और नौकरी करता है। अलीगढ़ की फैक्ट्रियों में तो कुशल कारीगरों की भूमिका पुश्तैनी है। हजारों कुशल कारीगरों की दरकार है, लेकिन उपलब्धता बहुत कम।
सुनील दत्ता, महामंत्री, तालानगरी औद्योगिक विकास एसोसिएशन
यहां मिलते थे 15 हजार... दिल्ली में 50 हजार
नई बस्ती निवासी शाकिर ने बताया कि उसने राजकीय आईटीआई से मैकेनिकल ट्रेड से आईटीआई की थी। शुरूआत में तालानगरी स्थित एक फैक्टरी में 15 हजार रुपये प्रति माह पर नौकरी की। दो साल पहले दिल्ली में फैक्टरी में नौकरी मिली है। यहां 50 हजार से अधिक तनख्वाह मिल रही है। तनख्वाह का यह अंतर ही युवाओं को दिल्ली एवं एनसीआर जाने पर मजबूर करता है। वरना कौन अपने परिजन और शहर को छोड़कर जाना चाहता है।
- मैंने ग्रामीण विकास एवं सामाजिक सेवा संस्था द्वारा संचालित कौशल विकास केंद्र, रजा नगर से फैशन डिजाइनिंग व कंप्यूटर में प्रशिक्षण लिया था। अब अलीगढ़ की एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हूं। -सना सैफी, निवासी जाकिर नगर

- मैंने ग्रामीण विकास एवं सामाजिक सेवा संस्थान द्वारा संचालित कौशल विकास केंद्र से फैशन डिजाइनिंग का प्रशिक्षण लिया था। निजी संस्थान में खासी मशक्कत के बाद डिजाइनर की नौकरी मिली है।
मोहम्मद स्वालीन, निवासी निशात बाग
पिछले चार साल में लगे रोजगार मेलों की स्थिति
- वर्ष 2017-18 में 18 रोजगार मेले लगे। 72 कंपनियां आईं, 664 युवा चयनित
- वर्ष 2018-19 में 20 रोजगार मेले लगे। 147 कंपनियां आईं, 2424 युवा चयनित
- वर्ष 2019-20 में 15 रोजगार मेले लगे। 147 कंपनियां आईं, 3595 युवा चयनित
- वर्ष 2020-21 में 24 रोजगार मेले लगे। 225 कंपनियां आईं, 4302 युवा चयनित
राजकीय आईटीआई में वर्षवार प्रशिक्षण
- वर्ष 2017-18 में 3228 युवाओं ने लिया प्रशिक्षण
- वर्ष 2018-19 में 8832 युवाओं ने लिया प्रशिक्षण
- वर्ष 2019-20 में 3558 युवाओं ने लिया प्रशिक्षण
- वर्ष 2020-21 में 9000 युवाओं ने लिया प्रशिक्षण
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