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अलीगढ़ : धार्मिक सहिष्णु के साथ हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू के जानकार थे राजा
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राजा महेन्द्र प्रताप विजयलक्ष्मी पंडित और डॉक्टर राधाकृष्णन के साथ।
- फोटो : CITY OFFICE
दीपक शर्मा, अलीगढ़।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अफगानिस्तान में पहली निर्वासित सरकार बनाने वाले राजा महेंद्र प्रताप न सिर्फ सर्वधर्म सद्भाव के लिए जाने जाते हैं, बल्कि वह हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं के भी जानकार थे। उनके लिखे पत्र और संदेश अभी भी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और उनके प्रशंसकों के पास सुरक्षित हैं। उन पत्रों में उनके सद्भाव और सहिष्णु विचारों की झलक मिलती है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व संगीतकार और शायर जॉनी फास्टर के पिता जॉन फास्टर बन्नादेवी स्थित चर्च में पादरी थे और राजा महेंद्र प्रताप के अच्छे परिचित थे। जॉनी फास्टर को पुरानी चीजों के सामान से राजा महेंद्र प्रताप सिंह के हाथ का लिखा एक पत्र मिला है।
अंग्रेजी में यह पत्र 1969 में लिखा गया है। यह पत्र क्रिसमस और नव वर्ष के लिए बधाई संदेश के रूप में है। जॉनी फास्टर कहते हैं कि उनके पिता के निधन के बाद राजा महेंद्र प्रताप ने एक पत्र उर्दू में उनकी माताजी को लिखा था।
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इसके साथ एक फोटो भी है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति राधाकृष्णन और विजयलक्ष्मी पंडित के साथ राजा महेंद्र प्रताप दिखाई दे रहे हैं। जॉनी फॉस्टर इस दुर्लभ पत्र को और फोटो को अब विशेष रूप से अपने संग्रह के लिए संरक्षित कर रहे हैं।
जॉन फास्टर के निधन के बाद उनकी पत्नी को लिखा गया उर्दू पत्र का हिंदी में अनुवाद
अजीज बेगम फास्टर साहिबा,
दुआ, निहायत अफसोस हुआ कि मेरे अजीज दोस्त फास्टर साहब इस दुनिया में नहीं रहे। ख़ालिक उनकी रूह को राहत बख्शे। बहरकैफ़ हमको यही समझना चाहिए, वो बेहतर जानता है, जिसमें उसकी रज़ा उसी में हमारी ख़ुशी है।
ख़ैर ख्वाहा ए आलम
(दस्तख़त)
एएमयू के म्यूजियम में रखा राजा का उर्दू में लिखा पत्र
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मूसा डाकरी म्यूजियम में 22 अक्टूबर 1976 को उर्दू में लिखा गया राजा महेंद्र प्रताप का एक पत्र रखा है। वह पत्र राजा महेंद्र प्रताप ने अपने लेटर पैड पर लिखा है। इस लेटर पैड पर देहरादून का फोन नंबर और ऑफिस का पता है। यह पत्र विश्वविद्यालय के संग्रहालय में सुरक्षित रखा हुआ है।
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भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अफगानिस्तान में पहली निर्वासित सरकार बनाने वाले राजा महेंद्र प्रताप न सिर्फ सर्वधर्म सद्भाव के लिए जाने जाते हैं, बल्कि वह हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं के भी जानकार थे। उनके लिखे पत्र और संदेश अभी भी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और उनके प्रशंसकों के पास सुरक्षित हैं। उन पत्रों में उनके सद्भाव और सहिष्णु विचारों की झलक मिलती है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व संगीतकार और शायर जॉनी फास्टर के पिता जॉन फास्टर बन्नादेवी स्थित चर्च में पादरी थे और राजा महेंद्र प्रताप के अच्छे परिचित थे। जॉनी फास्टर को पुरानी चीजों के सामान से राजा महेंद्र प्रताप सिंह के हाथ का लिखा एक पत्र मिला है।
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अंग्रेजी में यह पत्र 1969 में लिखा गया है। यह पत्र क्रिसमस और नव वर्ष के लिए बधाई संदेश के रूप में है। जॉनी फास्टर कहते हैं कि उनके पिता के निधन के बाद राजा महेंद्र प्रताप ने एक पत्र उर्दू में उनकी माताजी को लिखा था।
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इसके साथ एक फोटो भी है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति राधाकृष्णन और विजयलक्ष्मी पंडित के साथ राजा महेंद्र प्रताप दिखाई दे रहे हैं। जॉनी फॉस्टर इस दुर्लभ पत्र को और फोटो को अब विशेष रूप से अपने संग्रह के लिए संरक्षित कर रहे हैं।
जॉन फास्टर के निधन के बाद उनकी पत्नी को लिखा गया उर्दू पत्र का हिंदी में अनुवाद
अजीज बेगम फास्टर साहिबा,
दुआ, निहायत अफसोस हुआ कि मेरे अजीज दोस्त फास्टर साहब इस दुनिया में नहीं रहे। ख़ालिक उनकी रूह को राहत बख्शे। बहरकैफ़ हमको यही समझना चाहिए, वो बेहतर जानता है, जिसमें उसकी रज़ा उसी में हमारी ख़ुशी है।
ख़ैर ख्वाहा ए आलम
(दस्तख़त)
एएमयू के म्यूजियम में रखा राजा का उर्दू में लिखा पत्र
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मूसा डाकरी म्यूजियम में 22 अक्टूबर 1976 को उर्दू में लिखा गया राजा महेंद्र प्रताप का एक पत्र रखा है। वह पत्र राजा महेंद्र प्रताप ने अपने लेटर पैड पर लिखा है। इस लेटर पैड पर देहरादून का फोन नंबर और ऑफिस का पता है। यह पत्र विश्वविद्यालय के संग्रहालय में सुरक्षित रखा हुआ है।

एएमयू के संग्रहालय में उर्दू में लिखा हुआ राजा महेन्द्र प्रताप का पत्र।- फोटो : CITY OFFICE