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अलीगढ़ शराब कांडः मिलावट दिलाएगी उम्रकैद की सजा.. पेश करने होंगे मजबूत सुराग
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अभिषेक शर्मा
जहरीली शराब कांड में बुधवार शाम तक 89 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। देश-दुनिया की सुर्खियां बने इस कांड को लेकर एक ही आवाज उठ रही है कि आरोपियों को ऐसी सजा मिले, जो जहरीली शराब बेचने वालों के लिए नजीर बने। इसी सोच के साथ पुलिस-प्रशासन भी मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई कर रहा है। मगर कानून कहता है कि जितने मजबूत साक्ष्य पुलिस जुटा लेगी, उतना मजबूत मुकदमा न्यायालय में लड़ा जा सकेगा और आरोपियों को उम्रकैद तक की सजा दिलाई जा सकेगी।
इस तरह दर्ज हुए क्रमवार मुकदमे
इस प्रकरण में अब तक कुल 12 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जिसमें सात मौतों के संबंध में और पांच जहरीली शराब कारोबार के सिंडिकेट, शराब फैक्टरी, जानलेवा रसायनों के भंडारण से संबंधित हैं। मौतों को लेकर मुकदमे लोधा, खैर, जवां, टप्पल, पिसावा, क्वार्सी, महुआखेड़ा में दर्ज हुए हैं। इसके अलावा हरदुआगंज, अकराबाद, जवां, क्वार्सी, लोधा और खैर में मिलावटी शराब बेचने, जहरीला रसायन भंडारण करने और बेचने और नकली शराब की फैक्टरी बरामद होने के मामले दर्ज हुए हैं।
मजबूत साक्ष्य जुटाना और कड़ी जोड़ना चुनौती
अब पुलिस के सामने चुनौती है कि इन मुकदमों को अदालत में भी मजबूती से पेश करना होगा। पुलिस के सामने साक्ष्य सहित मजबूत विवेचना करने, चार्जशीट दाखिल करने, अदालत में साक्ष्यों को पूरी मजबूती के साथ पेश करना एक बड़ी चुनौती है। ये काम कहने सुनने में जितना सहज लगता है उतना ही मुश्किल है, क्योंकि कमजोर साक्ष्य होने पर कई बार अपराधी बड़े से बड़े अपराधों को अंजाम देकर आसानी से बच निकलते हैं। इस रैकेट से जुड़े मुख्य सरगना अनिल चौधरी, ऋषि को भी पहले इस तरह के लाभ मिलते रहे हैं।
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एसएसपी खुद कर रहे साक्ष्य संकलन की निगरानी
हालांकि एसएसपी कलानिधि नैथानी ने इस प्रकरण के मुकदमों में मजबूत साक्ष्य के साथ कड़ी पैरवी कराने पर पूरा ध्यान दिया है। वे खुद प्रयास कर रहे हैं कि मजबूत से मजबूत साक्ष्य पेश हों और आरोपियों को सजा मिले। इसलिए ये देखना दिलचस्प होगा कि देश भर सुर्खियां बटोर चुके इस गंभीर प्रकरण में पुलिस किस तरह की रणनीति से काम लेती है कि दोषी बच न पाएं और निर्दोष फंस न जाए। पुलिस सभी मुकदमों में मजबूत साक्ष्य जुटा रही है, ताकि अदालत में शराब माफिया को ऐसा सबक सिखाया जा सके जिससे भविष्य में कोई ऐसा करने के लिए सोच भी न पाए। लेकिन पुलिस की राह भी आसान नहीं है।
क्या कहता है कि कानून
आपराधिक मामलों के जानकार वकीलों ने बताया कि उक्त मुकदमों में आईपीसी की धारा 272, 273 के गैर इरादतन हत्या की धारा 304, नकली मिलावटी सामान बेचने के आरोप में धोखाधड़ी की धारा 420, फर्जी दस्तावेज बनाने की धारा 467, 468, 471 और आबकारी की धारा 60 ए, 60-1 बी लगाई गई हैं। जिसमें गैर इरादतन हत्या के साथ लगी आईपीसी की धारा 272, 273 में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। धारा 272 और 273 जानबूझ कर अपमिश्रित वस्तु खिलाकर मानव जीवन को खत्म करने से संबंधित है। ये धारा बहुत सख्त है, जिसमें जमानत होना भी आसान नहीं है। इसी तरह नकली माल बनाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के संबंध में 420 के साथ लगी धारा 467 में भी उम्रकैद तक का प्रावधान है।
ये तथ्य जुटाना सबसे जरूरी
1-अपमिश्रित शराब बनाने और बेचने का पूरा नेटवर्क साबित करना है, जैसे आरोपियों से और उनकी निजी संपत्तियों से अपमिश्रण करने के साक्ष्य संकलित करना। उनकी निशानदेही या उनके खुद के पास से ऐसी मिलावटी वस्तुएं मिलना। एक दूसरे से कड़ी जुड़ना।
2-सीसीटीवी या वीडियोग्राफी के ऐसे साक्ष्य मददगार होंगे। जिसमें आरोपियों की निजी संपत्ति, या उनके ठिकानों पर मिलावटी शराब या उसके बनाने की फैक्टरी आदि पकड़ना हो। आरोपियों की गिरफ्तारी आदि के वीडियो।
3-जालसाजी के लिए पुलिस को ये भी साबित करना होगा कि आरोपी मिलावटी शराब बनाते थे। उनके कब्जे से मिलावटी शराब, उसको बनाने का सामान और नकली पैकिंग उत्पाद आदि साक्ष्य सहित बरामद हुए हैं।
-जहरीले शराब कांड में मिलावट कर आम जनमानस को जान का नुकसान पहुंचाने के आरोप तक शामिल है, लेकिन इसके लिए अदालत में उतने ही मजबूत साक्ष्य चाहिए। जिससे आरोपी हर हाल में सजा भुगते। उनके बचने की सूरत न हो।
नीरज चौहान, आपराधिक मामलों के अधिवक्ता।
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जहरीली शराब कांड में बुधवार शाम तक 89 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। देश-दुनिया की सुर्खियां बने इस कांड को लेकर एक ही आवाज उठ रही है कि आरोपियों को ऐसी सजा मिले, जो जहरीली शराब बेचने वालों के लिए नजीर बने। इसी सोच के साथ पुलिस-प्रशासन भी मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई कर रहा है। मगर कानून कहता है कि जितने मजबूत साक्ष्य पुलिस जुटा लेगी, उतना मजबूत मुकदमा न्यायालय में लड़ा जा सकेगा और आरोपियों को उम्रकैद तक की सजा दिलाई जा सकेगी।
इस तरह दर्ज हुए क्रमवार मुकदमे
इस प्रकरण में अब तक कुल 12 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जिसमें सात मौतों के संबंध में और पांच जहरीली शराब कारोबार के सिंडिकेट, शराब फैक्टरी, जानलेवा रसायनों के भंडारण से संबंधित हैं। मौतों को लेकर मुकदमे लोधा, खैर, जवां, टप्पल, पिसावा, क्वार्सी, महुआखेड़ा में दर्ज हुए हैं। इसके अलावा हरदुआगंज, अकराबाद, जवां, क्वार्सी, लोधा और खैर में मिलावटी शराब बेचने, जहरीला रसायन भंडारण करने और बेचने और नकली शराब की फैक्टरी बरामद होने के मामले दर्ज हुए हैं।
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मजबूत साक्ष्य जुटाना और कड़ी जोड़ना चुनौती
अब पुलिस के सामने चुनौती है कि इन मुकदमों को अदालत में भी मजबूती से पेश करना होगा। पुलिस के सामने साक्ष्य सहित मजबूत विवेचना करने, चार्जशीट दाखिल करने, अदालत में साक्ष्यों को पूरी मजबूती के साथ पेश करना एक बड़ी चुनौती है। ये काम कहने सुनने में जितना सहज लगता है उतना ही मुश्किल है, क्योंकि कमजोर साक्ष्य होने पर कई बार अपराधी बड़े से बड़े अपराधों को अंजाम देकर आसानी से बच निकलते हैं। इस रैकेट से जुड़े मुख्य सरगना अनिल चौधरी, ऋषि को भी पहले इस तरह के लाभ मिलते रहे हैं।
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एसएसपी खुद कर रहे साक्ष्य संकलन की निगरानी
हालांकि एसएसपी कलानिधि नैथानी ने इस प्रकरण के मुकदमों में मजबूत साक्ष्य के साथ कड़ी पैरवी कराने पर पूरा ध्यान दिया है। वे खुद प्रयास कर रहे हैं कि मजबूत से मजबूत साक्ष्य पेश हों और आरोपियों को सजा मिले। इसलिए ये देखना दिलचस्प होगा कि देश भर सुर्खियां बटोर चुके इस गंभीर प्रकरण में पुलिस किस तरह की रणनीति से काम लेती है कि दोषी बच न पाएं और निर्दोष फंस न जाए। पुलिस सभी मुकदमों में मजबूत साक्ष्य जुटा रही है, ताकि अदालत में शराब माफिया को ऐसा सबक सिखाया जा सके जिससे भविष्य में कोई ऐसा करने के लिए सोच भी न पाए। लेकिन पुलिस की राह भी आसान नहीं है।
क्या कहता है कि कानून
आपराधिक मामलों के जानकार वकीलों ने बताया कि उक्त मुकदमों में आईपीसी की धारा 272, 273 के गैर इरादतन हत्या की धारा 304, नकली मिलावटी सामान बेचने के आरोप में धोखाधड़ी की धारा 420, फर्जी दस्तावेज बनाने की धारा 467, 468, 471 और आबकारी की धारा 60 ए, 60-1 बी लगाई गई हैं। जिसमें गैर इरादतन हत्या के साथ लगी आईपीसी की धारा 272, 273 में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। धारा 272 और 273 जानबूझ कर अपमिश्रित वस्तु खिलाकर मानव जीवन को खत्म करने से संबंधित है। ये धारा बहुत सख्त है, जिसमें जमानत होना भी आसान नहीं है। इसी तरह नकली माल बनाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के संबंध में 420 के साथ लगी धारा 467 में भी उम्रकैद तक का प्रावधान है।
ये तथ्य जुटाना सबसे जरूरी
1-अपमिश्रित शराब बनाने और बेचने का पूरा नेटवर्क साबित करना है, जैसे आरोपियों से और उनकी निजी संपत्तियों से अपमिश्रण करने के साक्ष्य संकलित करना। उनकी निशानदेही या उनके खुद के पास से ऐसी मिलावटी वस्तुएं मिलना। एक दूसरे से कड़ी जुड़ना।
2-सीसीटीवी या वीडियोग्राफी के ऐसे साक्ष्य मददगार होंगे। जिसमें आरोपियों की निजी संपत्ति, या उनके ठिकानों पर मिलावटी शराब या उसके बनाने की फैक्टरी आदि पकड़ना हो। आरोपियों की गिरफ्तारी आदि के वीडियो।
3-जालसाजी के लिए पुलिस को ये भी साबित करना होगा कि आरोपी मिलावटी शराब बनाते थे। उनके कब्जे से मिलावटी शराब, उसको बनाने का सामान और नकली पैकिंग उत्पाद आदि साक्ष्य सहित बरामद हुए हैं।
-जहरीले शराब कांड में मिलावट कर आम जनमानस को जान का नुकसान पहुंचाने के आरोप तक शामिल है, लेकिन इसके लिए अदालत में उतने ही मजबूत साक्ष्य चाहिए। जिससे आरोपी हर हाल में सजा भुगते। उनके बचने की सूरत न हो।
नीरज चौहान, आपराधिक मामलों के अधिवक्ता।