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जहरीली शराब कांडः मछली पकड़ने गए थे... उठा लाए मौत का सामान, मचा कोहराम

Fri, 04 Jun 2021 12:07 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jun 2021 12:07 AM IST
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Aligarh Poisonous Case
जवां क्षेत्र के गांव रोहेरा के पास ईंट-भट्ठे पर बिहार के करीब 150 श्रमिकों की टोली होली के बाद से यहां डेरा डाले हैं। इनमें महिलाएं व बच्चे भी शामिल हैं। सभी लोग आपस में रिश्तेदार, परिचित या पड़ोसी हैं। बुधवार दोपहर इसी टोली में शामिल राजू गंग नहर में मछली पकड़ने गया था और वहां उसे नहर पटरी के जवां से बरौली के रास्ते पर झाड़ियों में शराब की पेटी दिखीं तो लालच जाग गया। वह साथियों की मदद से तीन पेटी उठा लाया। रात में मछली पकाई गई और शराब पी गई। उसके कुछ देर बाद ही शराब पीने वालों की तबियत बिगड़ने लगी और भट्ठे पर कोहराम मच गया। किसी ने नहीं सोचा कि शराब यहां क्यों पड़ी है, किसने फेंकी है? मन में आए लालच ने अब तक दंपती सहित आठ लोगों को मौत के मुंह में पहुंचा दिया।
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पड़ोसी गांव दवथला के अकील और चमन खां के ईंट-भट्ठे पर बिहार का ही ठेकेदार इन मजदूरों को लेकर आया था। भट्ठा स्वामी द्वारा दी गई जमीन पर ही उन्होंने अपनी झुग्गियां बना ली हैं। वहीं पर उनका रहना और ईंट की पथाई का काम होता है। मौके पर मिले साक्ष्यों और बुधवार रात जिला अस्पताल में इलाज कराते समय राजू ने यह बात स्वीकारी थी कि उसे यह शराब पड़ी मिली और वही उठाकर लाया। उसी के पीने से सभी बीमार हुए हैं। बाद में राजू की मौत हो गई। सुबह जब एसएसपी कलानिधि नैथानी मौके पर गए तो उन्होंने वहां नहर पटरी की झाड़ियों में तलाश कराया तो वहां कुछ पेटियां और मिलीं, जिन्हें बाद में नष्ट करा दिया गया। इधर, ईंट-भट्ठा संचालक चमन खां की तहरीर पर शराब से मौतों के मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
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कोहराम के बीच सांत्वना देने नेता भी पहुंचे
मौके से पुलिस ने करीब दो दर्जन महिला-पुरुषों को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेज दिया था। दोपहर होते-होते उनमें से आठ की मौत हो गई। वहीं, दिन में बरौली विधायक पौत्र विजय सिंह, विधायक प्रतिनिधि सुशील गुप्ता सहित तमाम लोग वहां पहुंचे और पीड़ित परिवारों को सांत्वना देते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
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डरे सहमे श्रमिकों ने नहीं किए अपनों के अंतिम संस्कार
दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद आठों शव वापस मौके पर पहुंच गए थे। मगर वहां खुद उनके परिवार के सदस्यों ने उन्हें छूना गवारा नहीं समझा। उन्होंने उनके अंतिम संस्कार तक नहीं किए। बाद में पुलिस ने गांव के लोगों की मदद से शवों के अंतिम संस्कार की औपचारिकताएं निभाईं और मजदूरों में से कुछ लोगों को जैसे तैसे आगे लाकर अंतिम संस्कार कराया। उनको डर था कि कहीं बाकी लोगों को भी किसी तरह की बीमारी न लग जाए और उन्हें भी कोई दिक्कत न हो जाए।
मीडिया के सामने साधे रहे चुप्पी, ठेकेदार के भरोसे सभी
इस दौरान मीडियाकर्मियों ने भी उनसे बातचीत का प्रयास किया। मगर उन्होंने कुछ भी बोलने के बजाय एक ही बात कही कि अब जो उनका ठेकेदार कहेगा, वही तय होगा। अभी बारिश का मौसम आने तक उनका काम बचा है।
जहरीली शराब पीने से इनकी हुई मौत
01- सुरेश कुमार ठेकेदार (65) पुत्र जानकी
02- शारदा देवी (60) पत्नी सुरेश कुमार ठेकेदार निवासी कुरफतेहपुर थाना बेला जनपद गया (बिहार)
03- मिश्री (50) पुत्र रामबली निवासी सुंदरपुर थाना काकू जहानाबाद (बिहार)
04- उषा देवी (40 ) पत्नी भगवान सिंह उर्फ छोटेलाल निवासी किंजर थाना अकाल जहानाबाद (बिहार)
05- राजा (42 ) पुत्र गिरानी निवासी जहानाबाद, बिहार
06- कैलाश (52) पुत्र पीरुमल निवासी बारहचढ़ी, गया बिहार
07- भगवान सिंह उर्फ छोटेलाल (52) पुत्र मांझी राम निवासी किंजर, थाना अकाल, जहानाबाद (बिहार)
08- नीरू (28) पत्नी राजकुमार निवासी बीबीपुर, काकू , जहानाबाद, बिहार
ये हैं अभी अस्पताल में--
- रमेश, विजय, चिंटू, साजन, मृत कैलाश की पत्नी, राजकुमार व उसकी पत्नी, उमेश, मृत मिश्री की पत्नी व उसका छोटा भाई, छोटे भाई की पत्नी, श्रीभगवान, धनीश, लाला।
ऋषि ने तो नहीं फिंकवाया ये माल, एक प्रधान भी फरार
जवां क्षेत्र में हुई घटना के बाद पुलिस ये मानकर चल रही है कि यह क्षेत्र 50 हजारी इनामी ऋषि शर्मा का है। यह माल हो न हो ऋषि ने ही यहां फिंकवाया होगा। घटनास्थल के पास के गांव दवथला का प्रधान शमशेर भी उसका बेहद करीबी है और उस पर लोगों ने ऋषि के लिए काम करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद से वह भी फरार हो गया है। इसको लेकर पुलिस का शक गहराता जा रहा है। अब सच्चाई तो ऋषि और शमशेर के पकड़े जाने के बाद ही उजागर होगी।
खुद एसएसपी कलानिधि नैथानी स्वीकारते हैं कि यह किसी से छिपा नहीं है कि जवां के ही रहने वाले ऋषि का इस इलाके में शराब सिंडिकेट पर कब्जा है। सरकारी ठेकों से लेकर अवैध रूप से भी वह नकली व जहरीली शराब बिकवाता है। हो न हो, जहरीली शराब कांड के बाद पुलिस प्रशासनिक स्तर से शुरू हुई कार्रवाई के चलते यह शराब यहां फेंकी गई है। जब इसकी गहराई से जांच शुरू की गई तो सामने आया कि दवथला का प्रधान शमशेर ऋषि के लिए काम करता है और सुबह घटना का शोर मचने के बाद से वह भी फरार है। इसके बाद से यह शक ऋषि द्वारा शराब फिंकवाए जाने पर पुख्ता होता जा रहा है। इसे लेकर ऋषि के साथ-साथ शमशेर की तलाश शुरू करा दी गई है।
लोगों से अपील, न पीएं पुरानी रखी हुई शराब : एसएसपी
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने जिलेभर के लोगों के साथ-साथ ईंट-भट्ठा मजदूरों, होटल, ढाबों पर रहने वाले लोगों या अन्य तरह के सभी मजदूरों से अपील की है कि वैसे तो पुलिस का ऑपरेशन क्लीन जारी है। फिर भी कहीं लोगों को पुरानी रखी हुई शराब मिल रही है या बिक रही है तो उसे किसी कीमत पर न पीएं, बल्कि पुलिस को सूचना दें। ताकि उसे नष्ट कराया जा सके और बेचने वाले को पकड़वाया जा सके। इससे लोगों की जान बचाई जा सकती है।
कमाने आए थे जिंदगी, हिस्से में आई मौत
बुधवार रात को जवां के खुशी ईंट भट्टा पर काम करने वाले आठ मजदूरों की जहरीली शराब से मौत हो गई। उनमें से कई को तो अपनों का कंधा मिला और न ही उनके हाथों मुखाग्नि। कई के परिवार के सदस्य बिहार में रहते हैं। उनका इतनी जल्दी अलीगढ़ तक पहुंचना संभव नहीं था। इसके चलते ईंट भट्टा मालिक चमन और शकील ने मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार कराया। जिसने भी यह घटना सुनी उसका दिल दहल गया। हर किसी के मुंह से एक ही बात निकली की यह मजदूर सैकड़ों मील का सफर करके अलीगढ़ में दो वक्त की रोटी कमाकर अपनी जिंदगी का गुजारा करने आए थे। मगर, मुफ्त की शराब का लालच लगा और इनके हिस्से में मौत आ गई। इस घटना से जिला प्रशासन और पुलिस भी हिल गई।

मौतों का आंकड़ा पहुंचा 97 पर, कई गंभीर हालत में भर्ती
जहरीली शराब के सेवन से 28 मई को शुरू हुआ मौतों का सिलसिला लगातार सातवें दिन जारी रहा। बुधवार को मौतों का आंकड़ा गिरने से प्रशासन को अंदाजा था कि अब इस संख्या में वृद्धि नहीं होगी। मगर, प्रशासन के सामने ईंट भट्टा मजदूरों ने फिर से चुनौती खड़ी कर दी। इन लोगों ने गंग नहर के किनारे मिली शराब का सेवन कर लिया। अगर, यह लोग पुलिस को इस बाबत जानकारी उपलब्ध करा देते तो शायद इनका जीवन बच जाता। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि जिले के सभी ईंट भट्टा मजदूरों को जागरूक करने के लिए एसडीएम को निर्देश दिए हैं।
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