मजबूर मजदूर...? अलीगढ़। ये तस्वीर नि:शब्द है। आप खुद तय कीजिए कि इसके लिए किन शब्दों का प्रयोग किया जाए, जो इसकी कहानी को बयां कर सकें। पर, इतना जरूर है कि यह तस्वीर उस व्यवस्था पर करारा तमाचा जरूर है, जो सिर्फ खोखले दावों की बुलंद इमारत भर है। दो वक्त की रोटी और परिवार की जिम्मेदारी ने इस मजदूर की आंखों के आंसू तक सुखा दिए हैं।
बीवी और बच्ची के पैरों ने जब जवाब दे दिया तो उन्हें अपने कंधे पर उठा लिया। ये अंतहीन दर्द की कहानी यहीं पर खत्म नहीं होती है। हाईवे हो या फिर रोडवेज बस, ट्रक.. आप जिधर भी निगाह दौड़ाएंगे, उधर ही बेचैन कर देने वाले दृश्य दिखाई देंगे। इन गरीबों की बेबस निगाहें सिर्फ सवाल करती हैं... आखिर मेरा क्या कसूर है। हम भी इंसान है। फोटो नीरज कुमार।

घर जाने की खुशी।- फोटो : CITY OFFICE

गुजरात आई श्रमिक ट्रेन से उतकर अपने बच्चों के साथ गंतव्य का जाता युवक।- फोटो : CITY OFFICE

गुजरात से आई श्रमिक ट्रेन से उतरने के बाद बस पकड़ने के लिए जाते प्रवासी मजदूर।- फोटो : CITY OFFICE

मजबूर मजदूर...?- फोटो : CITY OFFICE