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अलीगढ़: कीटनाशक बन रहे घातक, ले रहे किसानों की जान

Sat, 20 Aug 2022 11:46 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Aug 2022 11:46 PM IST
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Aligarh: Pesticides are becoming deadly, taking lives of farmers
रिंकू शर्मा, अलीगढ़।
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फसलों पर कीटनाशकों का छिड़काव करते समय उनके जहरीले प्रभाव की चपेट में आने से चार दिन में अतरौली, टप्पल एवं पिसावा के तीन किसानों की मौत हो चुकी है। यह जिले का पहला मामला नहीं है, बल्कि सुरक्षा किट और जागरूकता के अभाव में लगातार किसान इस तरह के हादसों के शिकार हो रहे हैं। इसके बाद भी कृषि विभाग की तरफ से जानलेवा बन रहे कीटनाशकों से बचाव के ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
जानलेवा साबित हो रहे हैं पेस्टीसाइड्स
फसलें चाहे रबी सीजन की हों, खरीफ की या फिर जायद की। बुवाई से लेकर सिंचाई तक उन्हें कीट - रोगों से बचाने को जहरीले रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करना जरूरी होता है, लेकिन फसलों की हिफाजत करने वाले यही पेस्टीसाइड्स जागरुकता के अभाव में किसानों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।
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कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कीटनाशकों का स्प्रे करते समय सुरक्षा निर्देश और सावधानियां नहीं बरतने के कारण किसानों को चक्कर आने या फिर गश खाकर उनके बेहोश होने की घटनाएं हो रही हैं। चूंकि, फसलों की बुवाई के बाद अंकुरण शुरू होने या फिर धान की रोपाई के बाद खेतों में भरा पानी सूखने पर कीटनाशकों के छिड़काव का दौर शुरू हो जाता है। इसलिए इन दिनों धान में पेस्टीसाइड का छिड़काव करते किसानों पर बेहोशी छाने या फिर उनकी सांसें थमने की घटनाएं प्रकाश में ज्यादा आ रही हैं।
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सजा का भी प्रावधान
कीटनाशकों के आयात, उत्पादन, परिवहन, बिक्री, बंटवारे एवं अंधाधुंध इस्तेमाल को काबू में करने और गड़बड़ियों पर नकेल कसने के लिए 1968 में कीटनाशक अधिनियम बनाया गया था। इसके तहत गड़बड़ी साबित होने पर लाइसेंस रद्द करने के साथ ही दो साल कैद और जुर्माने का भी नियम है। ज्यादातर मामलों में किसान इसकी शिकायत नहीं करते और अगर करते भी हैं तो मामले अपील में छूट जाते हैं।
स्वास्थ्य पर दूरगामी परिणाम
जिला अस्पताल के डॉ. अभिषेक गुप्ता का कहना है कि मनुष्य पर होने वाले कीटनाशकों के दुष्परिणाम तत्कालिक एवं दूरगामी होते हैं। जिसके कारण सिर एवं सीने में दर्द, बुखार, सांस लेने में परेशानी, त्वचा रोग, आंखों की रोशनी कम होना शामिल हैं। ऐसी हालात में किसान की जान पर भी बन आ सकती है। उधर दूरगामी नतीजे तो और घातक हैं। मस्तिष्क कैंसर, हाई ब्लडप्रेशर, उदर कैंसर, अंधापन, गुर्दे में परेशानी आदि का पूरा खतरा बना रहता है।
यह बरतें सावधानी
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार कीटनाशक छिड़काव के लिए उपयुक्त समय सुबह या शाम होता है। फसलों को रोगों से बचाव के लिये किसानों को छिड़काव करते समय मुंह व नांक को किसी कपड़े से ढ़क कर रखना चाहिए। साथ ही आंखों पर चश्मा एवं हाथ में दस्ताने पहनना अति आवश्यक है। जिससे दवाओं में मौजूद हानिकारक तत्व शरीर के अंदर न जाएं। दवा छिड़काव करते समय हमेशा ही हवा के बहाव को ध्यान में रखें। छिड़काव के बाद हाथ व पैर को साबुन से अच्छी तरह धोयें तब फिर स्नान करें।

- किसानों को गोष्ठियों के माध्यम से पेस्टीसाइड का उपयोग करते समय सावधानियों के बारे में लगातार जागरूक किया जाता है। इस अभियान में किसानों की अशिक्षा बाधक बन रही है। कम जोत वाले छोटे किसानों की संख्या 50 फीसद से ज्यादा है। इसी वर्ग के किसान कीटनाशकों के इस्तेमाल में लापरवाही बरतते पाए जा रहे हैं।
- यशराज सिंह, उप कृषि निदेशक
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