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अलीगढ़ : मापने के नहीं इंतजाम, फिर प्रदूषण पर कैसे लगेगी लगाम

Sat, 06 Aug 2022 11:58 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Aug 2022 11:58 PM IST
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Aligarh: No arrangements to measure, then how will pollution be controlled
अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
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अपने शहर और जिले की आबोहवा कैसी है? यह सवाल अनसुलझा है। पहले तो आबोहवा दुरुस्त नहीं है। ऊपर से हम ये न जान पाएं कि ताजा हालात क्या हैं तो कैसे इससे निजात पा सकेंगे? प्रदूषण पर कैसे लगाम लगा सकेंगे? ऐसे में बस कागजों में ही कारगुजारियां छिपाने का प्रयास होता रहता है, मगर प्रदूषण से आजादी कब और कैसे मिलेगी? इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
ये हैं अपने शहर में प्रदूषण मापक इंतजाम
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक कार्यालय शहर के ज्ञान सरोवर-मान सरोवर इलाके में है, जहां कार्यालय पर प्रदूषण मापक यंत्र लगा हुआ है। हर दिन अधिकारी उस यंत्र में दर्ज होने वाले एक्यूआई को अलीगढ़ का मानक मानकर रिकार्ड दर्ज करते हैं। इसके अलावा शहर में कहीं दूसरा यंत्र नहीं है। हां, एएमयू में जरूर यंत्र लगा है, जो विवि के निजी शोध के प्रयोग के लिए है। इसके अलावा शहर या जिले में कहीं भी प्रदूषण मापने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम मोबाइल वैन लेकर जाती है।
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साथा के ग्रामीण आठ अगस्त को देंगे प्रदूषण विभाग के कार्यालय पर धरना
कासिमपुर से सटे साथा गांव के पास दो सीमेंट फैक्ट्रियां पिछले करीब एक दशक से चल रही हैं। यहां आने वाली फ्लाईएश की लोडिंग-अनलोडिंग प्रदूषण का बड़ा कारण है। इसे मालगाड़ी के जरिये लाया जाता है और हरदुआगंज स्टेशन से ट्रकों के जरिये फैक्टरी पहुंचाया जाता है। इस दौरान नियम उसे ढककर और पानी से भिगोकर ले जाने का है।
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मगर ऐसा होता नहीं है। पिछले एक दशक से उड़ने वाली फ्लाईएश से आसपास की कृषि भूमि बंजर हो रही है और लोग बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। इसके चलते कृषि भूमि का प्रयोग अब प्लाटिंग में करने लगे हैं। शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। इससे आजिज लोग अब 8 अगस्त को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय पर धरना देने की तैयारी में हैं।

लॉकडाउन के बाद 361 तक पहुंचा पीएम10 का स्तर
लॉकडाउन के बाद शहर में प्रदूषण का स्तर 361 तक पहुंच गया था। जनवरी में 161 था। वर्तमान में पीएम 10 में गिरावट दर्ज की जा रही है।
जेके सीमेंट को शासन से लीगल नोटिस, तीन अन्य को नोटिस
पिछले दिनों जेके सीमेंट को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कारण बताओ नोटिस दिया गया था। अब इसी कंपनी को शासन स्तर से लीगल नोटिस दिया गया है। जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि क्यों न आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसी तरह प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय से मंगलम सीमेंट, टाटा व हिंद एग्रो तीन कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं। इसे लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी सिंह बताते हैं कि हम लगातार नोटिस जारी कर रहे हैं। मानक के विपरीत संचालन कर प्रदूषण फैला रहे ईंट भट्ठों से वसूली की तैयारी है। हां, शहर में बस हमारे कार्यालय पर मापक यंत्र लगा है। मगर हमारी टीमें घूमकर माप करती रहती हैं।
ये हैं प्रदूषण के प्रमुख कारण--
- जिले की सीमेंट फैक्ट्रियों में प्रदूषण रोकने के इंतजाम नहीं है।
- सड़क किनारे बालू-बदरपुर के ढेर बिक्री के लिए लगे हैं।
- सड़क निर्माण के समय पानी छिड़काव न कराया जाना।
- शहर में नाला सफाई के दौरान जगह जगह सड़क पर सिल्ट फेंक देना।
-वाहनों से निकलता धुआं, तेजाब छोड़तीं शहर में फैक्ट्रियां।
- आए दिन उठती चर्बी की दुर्गंध और मीट फैक्ट्रियों से नालियों में बहता खून।
ये इलाके स्थायी रूप से प्रभावित
- सासनी गेट, कोतवाली, देहली गेट के समस्त इलाके
- क्वार्सी का बाईपास का इलाका, जवां का साथा क्षेत्र
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