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शव के सामने किया वादा भूल गए अफसर, तीन साल बाद भी नहीं मिल सका मकान
Thu, 07 Jan 2021 01:50 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
जितेंद्र शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
जितेंद्र शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Jan 2021 01:50 AM IST
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तीन साल पहले गांव भुवनखेड़ा में कपड़ों के चंद टुकड़ों के जरिए बच्चाें को सर्दी से बचाने की कोशिश में ठिठुरकर मर गए जंगजीत के शव के सामने किया गया वादा भी अफसर न निभा सके। अधिकारियों एवं समाजसेवियों ने तब किए गए बड़े-बड़े वादों को भुला दिया। तीन साल बाद भी जंगजीत के बच्चों को एक अदद सरकारी मकान नहीं मिल सका। कभी भी गिरने के डर से जर्जर दीवारों वाले कमरे में सोना दूर, पास तक जाने लायक नहीं बचा।
जनवरी 2018 की एक रात भुवनखेड़ा निवासी 45 वर्षीय जंगजीत ने अपने कमरे में मौजूद सारे कपडे़ अपने दोनों नाबालिग बच्चों (बेटा और बेटी) को ओढ़ाकर खुद चारपाई पर डालकर इस तरह सोए थे कि सुबह उनका शव ही बरामद हुआ। तत्कालीन एसडीएम कोल पंकज वर्मा ने जंगजीत के बच्चों को कंबल भेजकर और अंत्योदय कार्ड व दरवाजे पर शौचालय निर्माण का निर्देश देकर वादा किया था कि आवास योजना से जंगजीत के बच्चों के लिए मकान बनवाया जाएगा।
तीन साल बाद आवास योजना की सूची ग्राम पंचायत में आई तो जंगजीत के बच्चों का नाम उसमें नहीं है। उस समय अतरौली के उद्योगपति समाजसेवी तुलसी प्रसाद अग्रवाल व जिला पंचायत सदस्य के पति सुबोध सिंह ने जंगजीत के तीनों बच्चों को रजाई, गद्दे, तकिया, राशन व जरूरत की सामग्री समेत कुछ रुपये देकर मदद का हाथ बढ़ाया था।
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घर की हालत देख चाचा ने कर दी थी नाबालिग द्रोपा की शादी
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता तथा घर की हालत को देखते हुए साल भर पहले जंगजीत के भाई चंद्रपाल ने अपनी नाबालिग भतीजी द्रोपा (15) का विवाह कर दिया था। जंगजीत के दोनों बेटे लालू 19 व धर्मपाल 17 रोटी रोटी की तलाश में मजदूरी करते हुए दिल्ली व पंजाब में भटक रहे हैं। लालू ने बताया कि वह पिछले माह गांव के लोगों के साथ पंजाब पहुंचा है जहां मजदूरी कर रहा है। धर्मपाल करीब दो माह से दिल्ली के नजफगढ़ इलाके की एक गोशाला में गोबर डालने का काम कर रहा है।
- बेटा तो चला गया। अब ये कोठरी किसी दिन बच्चों की जान ले सकती है, इसीलिए बच्चे बाहर चले गए हैं, गरीब की कोई सुनने वाला नहीं है। मकान बन जाए तो बच्चों की शादी भी हो सकेगी। - श्यामा देवी, जंगजीत की मां।
- कमरा गिरासू है। फ्री के राशन से पेट भर सकता है जरूरत का कोई और सामान नहीं आ सकता। मैं और मेरा छोटा भाई मजदूरी करकुछ कमाएंगे और अपना कमरा सही कराएंगे। - लालू, जंगजीत का बड़ा बेटा।
- आवास सूची में जंगजीत के बच्चों का नाम भेजा था। चयनित सूची में उनका नाम क्यों नहीं आया इसकी जानकारी नहीं है। ग्राम पंचायत सचिव से पूछना पडे़गा। - तहसील खां, ग्राम प्रधान, भुवनखेड़ा।
- जंगजीत के परिवार से वाकिफ नहीं हूं। यदि सूची में नाम गया है और वह पात्र हैं तो आवास का लाभ जरूर मिलेगा। इस सूची में न सही तो अगली सूची में नाम जरूर आयेगा। - रोशनी सिंह, ग्राम पंचायत सचिव।
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जनवरी 2018 की एक रात भुवनखेड़ा निवासी 45 वर्षीय जंगजीत ने अपने कमरे में मौजूद सारे कपडे़ अपने दोनों नाबालिग बच्चों (बेटा और बेटी) को ओढ़ाकर खुद चारपाई पर डालकर इस तरह सोए थे कि सुबह उनका शव ही बरामद हुआ। तत्कालीन एसडीएम कोल पंकज वर्मा ने जंगजीत के बच्चों को कंबल भेजकर और अंत्योदय कार्ड व दरवाजे पर शौचालय निर्माण का निर्देश देकर वादा किया था कि आवास योजना से जंगजीत के बच्चों के लिए मकान बनवाया जाएगा।
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तीन साल बाद आवास योजना की सूची ग्राम पंचायत में आई तो जंगजीत के बच्चों का नाम उसमें नहीं है। उस समय अतरौली के उद्योगपति समाजसेवी तुलसी प्रसाद अग्रवाल व जिला पंचायत सदस्य के पति सुबोध सिंह ने जंगजीत के तीनों बच्चों को रजाई, गद्दे, तकिया, राशन व जरूरत की सामग्री समेत कुछ रुपये देकर मदद का हाथ बढ़ाया था।
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घर की हालत देख चाचा ने कर दी थी नाबालिग द्रोपा की शादी
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता तथा घर की हालत को देखते हुए साल भर पहले जंगजीत के भाई चंद्रपाल ने अपनी नाबालिग भतीजी द्रोपा (15) का विवाह कर दिया था। जंगजीत के दोनों बेटे लालू 19 व धर्मपाल 17 रोटी रोटी की तलाश में मजदूरी करते हुए दिल्ली व पंजाब में भटक रहे हैं। लालू ने बताया कि वह पिछले माह गांव के लोगों के साथ पंजाब पहुंचा है जहां मजदूरी कर रहा है। धर्मपाल करीब दो माह से दिल्ली के नजफगढ़ इलाके की एक गोशाला में गोबर डालने का काम कर रहा है।
- बेटा तो चला गया। अब ये कोठरी किसी दिन बच्चों की जान ले सकती है, इसीलिए बच्चे बाहर चले गए हैं, गरीब की कोई सुनने वाला नहीं है। मकान बन जाए तो बच्चों की शादी भी हो सकेगी। - श्यामा देवी, जंगजीत की मां।
- कमरा गिरासू है। फ्री के राशन से पेट भर सकता है जरूरत का कोई और सामान नहीं आ सकता। मैं और मेरा छोटा भाई मजदूरी करकुछ कमाएंगे और अपना कमरा सही कराएंगे। - लालू, जंगजीत का बड़ा बेटा।
- आवास सूची में जंगजीत के बच्चों का नाम भेजा था। चयनित सूची में उनका नाम क्यों नहीं आया इसकी जानकारी नहीं है। ग्राम पंचायत सचिव से पूछना पडे़गा। - तहसील खां, ग्राम प्रधान, भुवनखेड़ा।
- जंगजीत के परिवार से वाकिफ नहीं हूं। यदि सूची में नाम गया है और वह पात्र हैं तो आवास का लाभ जरूर मिलेगा। इस सूची में न सही तो अगली सूची में नाम जरूर आयेगा। - रोशनी सिंह, ग्राम पंचायत सचिव।

बंद कमरे से लगा हुआ ताला - फोटो : JALALI