वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर ने कहा कि सत्य धर्म की जब भी चर्चा होती है तो सत्य वचन को ही सत्य धर्म मान लिया जाता है। परंतु ऐसा नहीं है बल्कि उत्तम सत्य धर्म आत्मा ही निर्मल पर्याय है। सत्य धर्म आत्मीय गुण है, जबकि सत्य वचन जड़ है। हमें चाहिए कि हम इस अंतर को समझें, नहीं तो सत्य की खोज ही खत्म हो जाएगी। लोक कल्याण के लिए हमें सदा सत्य वचन का पालन करना चाहिए।
खिरनी गेट स्थित श्री लख्मीचंद पांड्या खंडेलवाल दिगंबर जैन मंदिर में दसलक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म पर धर्मसभा में आचार्य निर्भय सागर ने यह विचार रखे। इससे पूर्व मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा, सामूहिक पूजन आदि संपन्न हुई। पुष्प दंतनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर्व पर भगवान का प्रथम अभिषेक कलश करने का सौभाग्य कैलाश चंद्र जैन परिवार को प्रथम शांतिधारा करने, सुरेश कुमार जैन गढ़ी परिवार को द्वितीय कैलाश चंद्र जैन, ओमप्रकाश जैन परिवार को, भगवान के निर्वाण लाडू चढ़ाने का पूर्व शिक्षक विधायक जगवीर किशोर जैन परिवार को, द्वितीय प्रधानाचार्य अम्बुज जैन परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम बाल ब्रह्मचारी मनीष भैया के निर्देशन में संपन्न हुआ। आयोजन में सुरेश जैन, अम्बुज जैन, राजीव जैन, मयंक जैन, पवन जैन, हेमंत जैन, सुनील जैन, प्रवीण जैन, विनय जैन, पंकज जैन आदि का सहयोग रहा।