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अलीगढ़ : मेडिकल रोड पर आठ घंटे हुआ था उपद्रव, 15 साल बाद आरोपी बरी
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अभिषेक शर्मा
मेडिकल रोड का उपद्रव शायद ही लोग भूले हों। 15 बरस पहले इजलाल बिल्डर पक्ष से एएमयू छात्रों के बीच हुए झगड़े ने ऐसा रूप लिया था कि आठ घंटे तक मेडिकल रोड पर अराजकता हुई। जमकर फायरिंग, पथराव, आगजनी के चलते शहर भर में तनाव का माहौल रहा। इस दौरान मेडिकल चौकी, पुलिस बज्र वाहन, दुकानों तक में आग लगाई गई। दो पुलिसकर्मियों को चौकी में बंद कर दिया गया। इस उपद्रव कांड में पुलिस की ओर से लिखा गया मुकदमा अदालत में कमजोर साबित हुआ। इस मुकदमे में पुलिस के कमजोर साक्ष्य और गवाहों के पक्षद्रोही होने के कारण न्यायालय ने आरोपी बरी कर दिए गए हैं।
एडीजे तृतीय की अदालत से सोमवार को यह फैसला सुनाया गया है। जिसमें अदालत ने दो आरोपी मो.अली निवासी खलीलाबाद संत कबीर नगर व वसीम खान निवासी छर्रा को बरी किया है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि पब्लिक के साक्षी इमरान साबिर, निरंजन व परवेज अहमद के बयान अभियोजन (यानी पुलिस) के पक्ष का समर्थन नहीं करते हैं। इसलिए अभियोजन ने सभी गवाह पक्षद्रोही घोषित कराए हैं। पुलिस का एक मात्र गवाह पेश किया गया है। इस मुकदमे की एक पत्रावली में पूर्व में कुछ आरोपी बरी किए जा चुके हैं। इस आधार पर इस मुकदमे के आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न होने पर इन्हें बरी किया जाता है। इस बात की पुष्टि एडीजीसी कृष्ण कुमारी जौहरी ने करते हुए बताया कि गवाहों के पक्षद्रोही होने के आधार पर आरोपी बरी किए गए हैं।
- हमारे कर्मचारी से हुए झगड़े के बाद यह उपद्रव हुआ था, जिसमें हम लोगों ने भी मुकदमा कराया था और हम पर भी मुकदमा दर्ज हुआ था। छात्रों के भविष्य को देखते हुए दोनों पक्षों में सुलहनामा किया गया और दोनों ओर से मुकदमे खत्म कराए गए। उसी आधार पर कुछ लोग पूर्व में बरी हुए और अब अब पुलिस की ओर से लिखे मुकदमे में आरोपी बरी किए गए हैं।
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-परवेज अहमद, पूर्व महानगर अध्यक्ष कांग्रेस/बिल्डर के भाई
ये थे पुलिस की तहरीर में गंभीर आरोप
वादी मुकदमा तत्कालीन इंस्पेक्टर सिविल लाइंस रामपाल सिंह यादव के अनुसार 24 फरवरी 2007 की दोपहर 11:30 बजे वे वीवीआईपी ड्यूटी में व्यस्त थे। तभी उन्हें सूचना मिली कि मेडिकल रोड जकरिया मार्केट स्थित गुलजार रेजीडेंसी में एएमयू छात्रों व स्थानीय लोगों में विवाद हो रहा है। इस पर वे वहां पहुंचे तो 400-500 छात्र गुलजार अर्पाटमेंट की ओर बढ़ रहे थे। इस पर उन्होंने वायरलेस से सूचना प्रसारित की। इसी बीच छात्रों की संख्या बढ़ने लगी। पूछताछ में छात्रों की ओर से बताया गया कि अपार्टमेंट के मालिक व उसके आदमियों द्वारा उन पर फायरिंग की गई है। छात्रों को समझाने का प्रयास किया तो इसी बीच अल्लामा इकबाल हाल, मेडिकल कालेज व चारों तरफ से छात्रों की भीड़ कई हजार की संख्या में एकत्रित हो गई और गुलजार रेजीडेंसी व उसके आसपास के मकानों-दुकानों के शीशे पथराव कर तोड़ने लगे।
इस बीच आरएएफ, पीएसी, एसपी सिटी, एडीएम सिटी, शहर व देहात के तमाम थानेदार, क्षेत्राधिकारी आ गए। अधिकारियों के समझाने के बाद भी छात्र तोड़फोड़ व हिंसा पर उतारू रहे। छात्रों की भीड़ ने उग्र भीड़ का रूप ले लिया। पुलिस व नागरिकों पर पथराव शुरू कर दिया। कई दुकानों, वाहनों को आग लगा दी। इस पर चेतावनी देते हुए छात्रों पर पानी का फायर टैंकर से फेंका गया। इस पर पथराव के साथ अवैध असलहों से फायरिंग शुरू कर दी। मेडिकल चौकी के पास खडे़ वाहन में आग लगा दी। चौकी परिसर में खड़ी दो बाइक व एक स्कूटर फूंक दिए। चौकी के अंदर घुस कर चौकी में रखे वायरलेस को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। सामान में आग लगा दी। मौजूद एचसीपी शंभूदयाल व सिपाही अशोक को अंदर चौकी में बंद कर चौकी में आग लगा दी। इस पर मजबूरन टीयर गैस व रबर बुलट का प्रयोग किया गया। तब जाकर उपद्रवी भीड़ पीछे हटी और चौकी में फंसे कर्मचारियों को निकाला। बाहर जल से पुलिस बज्र वाहन व दुकानों की आग को बुझाया जा सका।
ये भी जानें--
- इन गंभीर धाराओं में मुकदमा:-147, 148, 149, 307, 323, 427, 504, 506, 186, 336, 435, 436 आईपीसी, 7 क्रिमिनल लॉ एक्ट, समान भाव की धारा 34।
- तत्कालीन इंस्पेक्टर सिविल लाइंस रामनाथ यादव की ओर से तत्कालीन एएमयू के नामजद व अज्ञात छात्रों के खिलाफ दर्ज कराया गया था मुकदमा।
- एएमयू छात्रों व बिल्डर पक्ष की ओर से भी दर्ज कराए गए थे दोनों के खिलाफ एक दूसरे पर मारपीट, हमला आदि धाराओं के मुकदमे।
- दोनों पक्षों में हुआ सुलहनामा। पुलिस मुकदमे की एक पत्रावली में 7 जून 2010 को आ चुका है फैसला, उसमें भी बरी किए गए थे सभी आरोपी।
यह था प्रकरण
- घटना के दिन सुबह बिल्डर के यहां काम चल रहा था। मजदूर द्वारा फेंके गए सामान से सड़क से गुजर रहा छात्र जख्मी हो गया था। इसी विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि पहले बिल्डर पक्ष व छात्रों के बीच मारपीट व हंगामा हुआ। बाद में छात्रों की भीड़ बिल्डर पक्ष पर फायरिंग का आरोप लगाकर आक्रामक हुई और पुलिस से भिड़ गई थी। यह उपद्रव 11 बजे से शुरू होकर करीब आठ बजे जाकर थमा था। तत्कालीन इंस्पेक्टर को निलंबित तक किया गया था।
कैंपस में थे लोकसभा अध्यक्ष
घटना के दिन विधि संकाय के एक आयोजन में शामिल होने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी एएमयू कैंपस में आए हुए थे। डीएम-एसएसपी सहित पूरा अमला वहां व्यस्त था। मगर छात्रों के रुख को देख आधा अमला यहां आया। किसी तरह आयोजन शांतिपूर्वक निपटने के बाद लोकसभा अध्यक्ष को वहां से रवाना कर डीएम एसएसपी भी मौके पर आए और तब जाकर हालात काबू किए गए।
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मेडिकल रोड का उपद्रव शायद ही लोग भूले हों। 15 बरस पहले इजलाल बिल्डर पक्ष से एएमयू छात्रों के बीच हुए झगड़े ने ऐसा रूप लिया था कि आठ घंटे तक मेडिकल रोड पर अराजकता हुई। जमकर फायरिंग, पथराव, आगजनी के चलते शहर भर में तनाव का माहौल रहा। इस दौरान मेडिकल चौकी, पुलिस बज्र वाहन, दुकानों तक में आग लगाई गई। दो पुलिसकर्मियों को चौकी में बंद कर दिया गया। इस उपद्रव कांड में पुलिस की ओर से लिखा गया मुकदमा अदालत में कमजोर साबित हुआ। इस मुकदमे में पुलिस के कमजोर साक्ष्य और गवाहों के पक्षद्रोही होने के कारण न्यायालय ने आरोपी बरी कर दिए गए हैं।
एडीजे तृतीय की अदालत से सोमवार को यह फैसला सुनाया गया है। जिसमें अदालत ने दो आरोपी मो.अली निवासी खलीलाबाद संत कबीर नगर व वसीम खान निवासी छर्रा को बरी किया है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि पब्लिक के साक्षी इमरान साबिर, निरंजन व परवेज अहमद के बयान अभियोजन (यानी पुलिस) के पक्ष का समर्थन नहीं करते हैं। इसलिए अभियोजन ने सभी गवाह पक्षद्रोही घोषित कराए हैं। पुलिस का एक मात्र गवाह पेश किया गया है। इस मुकदमे की एक पत्रावली में पूर्व में कुछ आरोपी बरी किए जा चुके हैं। इस आधार पर इस मुकदमे के आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न होने पर इन्हें बरी किया जाता है। इस बात की पुष्टि एडीजीसी कृष्ण कुमारी जौहरी ने करते हुए बताया कि गवाहों के पक्षद्रोही होने के आधार पर आरोपी बरी किए गए हैं।
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-परवेज अहमद, पूर्व महानगर अध्यक्ष कांग्रेस/बिल्डर के भाई
ये थे पुलिस की तहरीर में गंभीर आरोप
वादी मुकदमा तत्कालीन इंस्पेक्टर सिविल लाइंस रामपाल सिंह यादव के अनुसार 24 फरवरी 2007 की दोपहर 11:30 बजे वे वीवीआईपी ड्यूटी में व्यस्त थे। तभी उन्हें सूचना मिली कि मेडिकल रोड जकरिया मार्केट स्थित गुलजार रेजीडेंसी में एएमयू छात्रों व स्थानीय लोगों में विवाद हो रहा है। इस पर वे वहां पहुंचे तो 400-500 छात्र गुलजार अर्पाटमेंट की ओर बढ़ रहे थे। इस पर उन्होंने वायरलेस से सूचना प्रसारित की। इसी बीच छात्रों की संख्या बढ़ने लगी। पूछताछ में छात्रों की ओर से बताया गया कि अपार्टमेंट के मालिक व उसके आदमियों द्वारा उन पर फायरिंग की गई है। छात्रों को समझाने का प्रयास किया तो इसी बीच अल्लामा इकबाल हाल, मेडिकल कालेज व चारों तरफ से छात्रों की भीड़ कई हजार की संख्या में एकत्रित हो गई और गुलजार रेजीडेंसी व उसके आसपास के मकानों-दुकानों के शीशे पथराव कर तोड़ने लगे।
इस बीच आरएएफ, पीएसी, एसपी सिटी, एडीएम सिटी, शहर व देहात के तमाम थानेदार, क्षेत्राधिकारी आ गए। अधिकारियों के समझाने के बाद भी छात्र तोड़फोड़ व हिंसा पर उतारू रहे। छात्रों की भीड़ ने उग्र भीड़ का रूप ले लिया। पुलिस व नागरिकों पर पथराव शुरू कर दिया। कई दुकानों, वाहनों को आग लगा दी। इस पर चेतावनी देते हुए छात्रों पर पानी का फायर टैंकर से फेंका गया। इस पर पथराव के साथ अवैध असलहों से फायरिंग शुरू कर दी। मेडिकल चौकी के पास खडे़ वाहन में आग लगा दी। चौकी परिसर में खड़ी दो बाइक व एक स्कूटर फूंक दिए। चौकी के अंदर घुस कर चौकी में रखे वायरलेस को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। सामान में आग लगा दी। मौजूद एचसीपी शंभूदयाल व सिपाही अशोक को अंदर चौकी में बंद कर चौकी में आग लगा दी। इस पर मजबूरन टीयर गैस व रबर बुलट का प्रयोग किया गया। तब जाकर उपद्रवी भीड़ पीछे हटी और चौकी में फंसे कर्मचारियों को निकाला। बाहर जल से पुलिस बज्र वाहन व दुकानों की आग को बुझाया जा सका।
ये भी जानें--
- इन गंभीर धाराओं में मुकदमा:-147, 148, 149, 307, 323, 427, 504, 506, 186, 336, 435, 436 आईपीसी, 7 क्रिमिनल लॉ एक्ट, समान भाव की धारा 34।
- तत्कालीन इंस्पेक्टर सिविल लाइंस रामनाथ यादव की ओर से तत्कालीन एएमयू के नामजद व अज्ञात छात्रों के खिलाफ दर्ज कराया गया था मुकदमा।
- एएमयू छात्रों व बिल्डर पक्ष की ओर से भी दर्ज कराए गए थे दोनों के खिलाफ एक दूसरे पर मारपीट, हमला आदि धाराओं के मुकदमे।
- दोनों पक्षों में हुआ सुलहनामा। पुलिस मुकदमे की एक पत्रावली में 7 जून 2010 को आ चुका है फैसला, उसमें भी बरी किए गए थे सभी आरोपी।
यह था प्रकरण
- घटना के दिन सुबह बिल्डर के यहां काम चल रहा था। मजदूर द्वारा फेंके गए सामान से सड़क से गुजर रहा छात्र जख्मी हो गया था। इसी विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि पहले बिल्डर पक्ष व छात्रों के बीच मारपीट व हंगामा हुआ। बाद में छात्रों की भीड़ बिल्डर पक्ष पर फायरिंग का आरोप लगाकर आक्रामक हुई और पुलिस से भिड़ गई थी। यह उपद्रव 11 बजे से शुरू होकर करीब आठ बजे जाकर थमा था। तत्कालीन इंस्पेक्टर को निलंबित तक किया गया था।
कैंपस में थे लोकसभा अध्यक्ष
घटना के दिन विधि संकाय के एक आयोजन में शामिल होने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी एएमयू कैंपस में आए हुए थे। डीएम-एसएसपी सहित पूरा अमला वहां व्यस्त था। मगर छात्रों के रुख को देख आधा अमला यहां आया। किसी तरह आयोजन शांतिपूर्वक निपटने के बाद लोकसभा अध्यक्ष को वहां से रवाना कर डीएम एसएसपी भी मौके पर आए और तब जाकर हालात काबू किए गए।