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अलीगढ़ : पुलिस विवेचना में न जोड़ पाई कड़ी, हत्या जैसे अपराधों में आरोपी बरी
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अभिषेक शर्मा
कहने को अज्ञात में दर्ज होने वाले हत्या जैसे संगीन अपराध में पुलिस जी-तोड़ मेहनत कर उसका खुलासा करती है। मगर कभी-कभी विवेचना में कड़ियां जोड़ने में कुछ ऐसी कमी रह जाती हैं, जिसकी वजह से विवेचना अदालत की दहलीज पर दम तोड़ती नजर आती हैं। ऐसा ही कुछ अदालत में हाल ही में हत्या जैसे तीन संगीन अपराधों में हुआ है, जिनमें पुलिस की कमजोर कहानियों के चलते आरोपी बरी कर दिए गए। अदालत ने तीनों प्रकरणों में अपने फैसले में पुलिस की कमियों पर टिप्पणी करते हुए फैसला सुनाया है। हालांकि अभियोजन पक्ष की ओर से अब हाईकोर्ट में अपील की तैयारी है। मगर विवेचना के स्तर पर हुई कमियों के कारण पुराने मुकदमों में अभी तक न्याय न मिल पाना बड़ा सवाल बन रहा है।
केस:-1
हत्या-लूट में वादी को तलब नहीं करा पाई पुलिस
अकराबाद में दर्ज हत्या व लूट के इस मुकदमे के फ्लैशबैक पर गौर करें तो घटना 19/20 सितंबर 2003 की है। ट्रक नंबर एचआर 55/3483 में माल गाजियाबाद से पटना बिहार जा रहा था। ट्रक पर बतौर चालक जसरऊ बिछवा मैनपुरी का दफेदार सवार था, जबकि बतौर क्लीनर बिहार के बेगूसराय भगवानपुर का रामू तैनात था। अकराबाद क्षेत्र में खेड़ा नारायन सिंह के पास दूसरे ट्रक में सवार बदमाशों ने उन्हें ओवरटेक कर रोका और दोनों को नीचे उतारकर हाथ पैर बांधकर झाड़ियों में डाल दिया। इस दौरान ड्राइवर की गला दबाकर हत्या कर दी, जबकि रामू ने तालाब में कूदकर अपनी जान बचाई। बाद में बदमाश ट्रक लूट ले गए। रामू की तहरीर पर पर हत्या व लूट का मुकदमा दर्ज हुआ। दौरान-ए-विवेचना पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए जहांगीराबाद बदायूं के मिंटू सक्सेना उर्फ आशीष व आवास विकास बदायूं के अतुल उर्फ निक्की के खिलाफ चार्जशीट दायर की। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान पुलिस के दस गवाह पेश हुए। मगर एसएसपी अलीगढ़ से लेकर एसएसपी बेगूसराय तक से हुए पत्राचार, कुर्की वारंट तक जारी होने के बावजूद वादी रामू को पुलिस पेश नहीं कर सकी। ऐसे में आरोपियों की शिनाख्त न हो सकी और अन्य कोई मजबूत कड़ी पुलिस पेश न कर सकी। इसके चलते आरोपियों को 11 फरवरी को अपर सत्र न्यायालय से बरी कर दिया गया।
केस:-2
महिला की हत्या में भी न खोज पाई चश्मदीद गवाह
लोधा में दर्ज यह घटना 16 फरवरी 2009 की है। गांव कदौली के चौकीदार की ओर से यह मुकदमा दर्ज कराया गया कि सड़क सहारे बबूल की झाड़ियों में एक महिला का जलता हुआ शव पाया गया। उसके गर्दन में कपड़े का फंदा बना हुआ था, जिससे लग रहा था कि उसे हत्या कर जलाया गया है। बाद में शव की पहचान गांव सारसौल के देवदत्त ने अपनी सास कलुआ निवासी रामश्री देवी के रूप में की। बताया कि वह कई दिन से गायब थीं। उन्हें कोई दो अज्ञात लोग भैंस खरीदवाने के बहाने से ले गए थे। उनके गायब होने पर गुमशुदगी भी थाने में दर्ज कराई थी। पुलिस ने हत्या दर्ज कर विवेचना में देवदत्त व उनकी पत्नी की गवाही के आधार पर मृत महिला रामश्री देवी के बेटे राजेंद्र, बहू मीना देवी व राया मथुरा के संतोष व लौहरा रुस्तमपुर लोधा के पप्पू उर्फ सुरेंद्र को आरोपी बनाया। जिसमें कहना था कि बेटा बहू मां को पीटते परेशान करते थे। जिससे तंग आकर वह बेटी के पास रह रही थीं। संपत्ति की नीयत को लेकर बेटा बहू ने दो अन्य आरोपियों से बहाने से बुलाकर उसे मरवाया है। इस मामले में पुलिस विवेचना में कोई ऐसी गवाही या साक्ष्य न्यायालय में पेश नहीं हुआ, जिसमें यह साबित हो सके कि कौन दो लोग ले गए और किसी ने उसे मारकर जलाते देखा हो। कुल मिलाकर साक्ष्यों के अभाव में 9 फरवरी को यह मुकदमा भी बरी कर दिया गया।
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केस:-3
डॉक्टर की हत्या में रंजिश साबित नहीं कर पाई पुलिस
लोधा में 28 जून 2011 को गांव राइट के डॉ. जान मोहम्मद की हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। इस मुकदमे में वादी डॉक्टर के बेटे नकीबुल इस्लाम ने बताया कि उनके पिता को दो अज्ञात लोग अपनी बाइक से उनके क्लीनिक से बैठाकर ले गए और फिर बीरमपुर चौराहे के पास उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। राहगीरों की सूचना पर परिवार मौके पर पहुंचा और तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया। मामले में पुलिस विवेचना में प्रधानी की रंजिश में गांव के तत्कालीन प्रधान भूरे खां, पूर्व प्रधान अली हसन, फतेहाबाद पहासू के रजनीश गौड़, ककौला लोधा के नीरज शर्मा व पुष्पेंद्र उर्फ पीके को आरोपी बनाया गया। सत्र परीक्षण के दौरान पुलिस या खुद वादी पक्ष यानी परिवार इस रंजिश को साबित नहीं कर सका। न यह साबित हो पाया कि किसी ने इन लोगों को ले जाते या हत्या करते देखा है। कुल मिलाकर पुलिस की कमजोर विवेचना के दम पर इस हत्या के आरोपी भी 9 फरवरी को बरी कर दिए गए।
- न्यायालय में संगीन अपराध के मुकदमों में पुलिस साक्ष्यों के दम पर अभियोजन पक्ष मजबूती से पैरवी करता है। जिन संगीन अपराधों में यहां आरोपी बरी कर दिए जाते हैं, उन मामलों में अभियोजन की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की जाती है। ऐसा ही इन प्रकरणों में किया जाएगा।
- धीरेंद्र सिंह तोमर, डीजीसी फौजदारी
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कहने को अज्ञात में दर्ज होने वाले हत्या जैसे संगीन अपराध में पुलिस जी-तोड़ मेहनत कर उसका खुलासा करती है। मगर कभी-कभी विवेचना में कड़ियां जोड़ने में कुछ ऐसी कमी रह जाती हैं, जिसकी वजह से विवेचना अदालत की दहलीज पर दम तोड़ती नजर आती हैं। ऐसा ही कुछ अदालत में हाल ही में हत्या जैसे तीन संगीन अपराधों में हुआ है, जिनमें पुलिस की कमजोर कहानियों के चलते आरोपी बरी कर दिए गए। अदालत ने तीनों प्रकरणों में अपने फैसले में पुलिस की कमियों पर टिप्पणी करते हुए फैसला सुनाया है। हालांकि अभियोजन पक्ष की ओर से अब हाईकोर्ट में अपील की तैयारी है। मगर विवेचना के स्तर पर हुई कमियों के कारण पुराने मुकदमों में अभी तक न्याय न मिल पाना बड़ा सवाल बन रहा है।
केस:-1
हत्या-लूट में वादी को तलब नहीं करा पाई पुलिस
अकराबाद में दर्ज हत्या व लूट के इस मुकदमे के फ्लैशबैक पर गौर करें तो घटना 19/20 सितंबर 2003 की है। ट्रक नंबर एचआर 55/3483 में माल गाजियाबाद से पटना बिहार जा रहा था। ट्रक पर बतौर चालक जसरऊ बिछवा मैनपुरी का दफेदार सवार था, जबकि बतौर क्लीनर बिहार के बेगूसराय भगवानपुर का रामू तैनात था। अकराबाद क्षेत्र में खेड़ा नारायन सिंह के पास दूसरे ट्रक में सवार बदमाशों ने उन्हें ओवरटेक कर रोका और दोनों को नीचे उतारकर हाथ पैर बांधकर झाड़ियों में डाल दिया। इस दौरान ड्राइवर की गला दबाकर हत्या कर दी, जबकि रामू ने तालाब में कूदकर अपनी जान बचाई। बाद में बदमाश ट्रक लूट ले गए। रामू की तहरीर पर पर हत्या व लूट का मुकदमा दर्ज हुआ। दौरान-ए-विवेचना पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए जहांगीराबाद बदायूं के मिंटू सक्सेना उर्फ आशीष व आवास विकास बदायूं के अतुल उर्फ निक्की के खिलाफ चार्जशीट दायर की। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान पुलिस के दस गवाह पेश हुए। मगर एसएसपी अलीगढ़ से लेकर एसएसपी बेगूसराय तक से हुए पत्राचार, कुर्की वारंट तक जारी होने के बावजूद वादी रामू को पुलिस पेश नहीं कर सकी। ऐसे में आरोपियों की शिनाख्त न हो सकी और अन्य कोई मजबूत कड़ी पुलिस पेश न कर सकी। इसके चलते आरोपियों को 11 फरवरी को अपर सत्र न्यायालय से बरी कर दिया गया।
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केस:-2
महिला की हत्या में भी न खोज पाई चश्मदीद गवाह
लोधा में दर्ज यह घटना 16 फरवरी 2009 की है। गांव कदौली के चौकीदार की ओर से यह मुकदमा दर्ज कराया गया कि सड़क सहारे बबूल की झाड़ियों में एक महिला का जलता हुआ शव पाया गया। उसके गर्दन में कपड़े का फंदा बना हुआ था, जिससे लग रहा था कि उसे हत्या कर जलाया गया है। बाद में शव की पहचान गांव सारसौल के देवदत्त ने अपनी सास कलुआ निवासी रामश्री देवी के रूप में की। बताया कि वह कई दिन से गायब थीं। उन्हें कोई दो अज्ञात लोग भैंस खरीदवाने के बहाने से ले गए थे। उनके गायब होने पर गुमशुदगी भी थाने में दर्ज कराई थी। पुलिस ने हत्या दर्ज कर विवेचना में देवदत्त व उनकी पत्नी की गवाही के आधार पर मृत महिला रामश्री देवी के बेटे राजेंद्र, बहू मीना देवी व राया मथुरा के संतोष व लौहरा रुस्तमपुर लोधा के पप्पू उर्फ सुरेंद्र को आरोपी बनाया। जिसमें कहना था कि बेटा बहू मां को पीटते परेशान करते थे। जिससे तंग आकर वह बेटी के पास रह रही थीं। संपत्ति की नीयत को लेकर बेटा बहू ने दो अन्य आरोपियों से बहाने से बुलाकर उसे मरवाया है। इस मामले में पुलिस विवेचना में कोई ऐसी गवाही या साक्ष्य न्यायालय में पेश नहीं हुआ, जिसमें यह साबित हो सके कि कौन दो लोग ले गए और किसी ने उसे मारकर जलाते देखा हो। कुल मिलाकर साक्ष्यों के अभाव में 9 फरवरी को यह मुकदमा भी बरी कर दिया गया।
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केस:-3
डॉक्टर की हत्या में रंजिश साबित नहीं कर पाई पुलिस
लोधा में 28 जून 2011 को गांव राइट के डॉ. जान मोहम्मद की हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। इस मुकदमे में वादी डॉक्टर के बेटे नकीबुल इस्लाम ने बताया कि उनके पिता को दो अज्ञात लोग अपनी बाइक से उनके क्लीनिक से बैठाकर ले गए और फिर बीरमपुर चौराहे के पास उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। राहगीरों की सूचना पर परिवार मौके पर पहुंचा और तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया। मामले में पुलिस विवेचना में प्रधानी की रंजिश में गांव के तत्कालीन प्रधान भूरे खां, पूर्व प्रधान अली हसन, फतेहाबाद पहासू के रजनीश गौड़, ककौला लोधा के नीरज शर्मा व पुष्पेंद्र उर्फ पीके को आरोपी बनाया गया। सत्र परीक्षण के दौरान पुलिस या खुद वादी पक्ष यानी परिवार इस रंजिश को साबित नहीं कर सका। न यह साबित हो पाया कि किसी ने इन लोगों को ले जाते या हत्या करते देखा है। कुल मिलाकर पुलिस की कमजोर विवेचना के दम पर इस हत्या के आरोपी भी 9 फरवरी को बरी कर दिए गए।
- न्यायालय में संगीन अपराध के मुकदमों में पुलिस साक्ष्यों के दम पर अभियोजन पक्ष मजबूती से पैरवी करता है। जिन संगीन अपराधों में यहां आरोपी बरी कर दिए जाते हैं, उन मामलों में अभियोजन की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की जाती है। ऐसा ही इन प्रकरणों में किया जाएगा।
- धीरेंद्र सिंह तोमर, डीजीसी फौजदारी