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छोटे जानवरों से कम हुआ प्यार, बड़े जानवरों की कुर्बानी में बन रहे साझीदार
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इकराम वारिस
ईद उल अजहा (बकरीद) में छोटे जानवरों की कुर्बानी देने की बजाय बड़े जानवरों की कुर्बानी में ज्यादातर लोग साझीदार बन रहे हैं। वजह, कोरोना काल में कारोबार का कमजोर होना। मार्च-2020 से कोरोना महामारी ने कारोबार पर ऐसा पंजा मारा, उससे कारोबारी अभी तक उबर नहीं सके हैं। इसका असर त्योहारों पर भी पड़ा। त्योहारोें में केवल औपचारिकताएं भर रहीं।
ऐसा ही ईद उल अजहा में भी देखने को मिल रहा है। जिन घरों में तीन दिन तक बकरों की कुर्बानी होती थी, वहां एक बकरे की कुर्बानी होगी। जबकि ज्यादातर लोग बड़े जानवरों की कुर्बानी में दिलचस्पी ले रहे हैं। वह कहते हैं कि जब माली हालत ठीक होगी, तब बकरे की कुर्बानी करेंगे।
हिस्सा किसे कहते हैं
भैंस या पड्डा (झोटा) की कुर्बानी करने में सात साझीदार होते हैं। इसी को हिस्सा भी कहते हैं। जानवरों की कीमत के हिसाब से सभी साझीदारों को बराबर-बराबर रुपये देने होते हैं। जानवरों को काटने वाले की मेहनताना अलग है।
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जानवरों की कीमतों में अंतर
भैंस जहां करीब 50-60 हजार में रुपये में मिल रही है। वहीं, पड्डा (झोटा) की कीमत 15 हजार से 22 हजार रुपये व्यापारी बता रहे हैं। बकरा, भेड़ की कीमत 6-8 हजार रुपये से शुरू होती है। हालांकि, मोल-भाव में इनकी कीमतों में कमी आ सकती है।
हिस्सा डलवाने के बोल
- इस बार बड़े जानवरों के एक हिस्से की कीमत 2500 रुपये है। बकरीद से तीन-चार दिन पहले आर्डर में तेजी आती है। -मोहम्मद अशफाक
- फिलहाल दो-चार लोग हिस्सा लेने का आर्डर दे चुके हैं। आर्डर में बकरीद के करीब आने के बाद ही तेजी आती है। -इरशाद अली
ईदगाह में होगी ईद उल अजहा की नमाज : शहर मुफ्ती
अलीगढ़। इस बार ईद उल अजहा (बकरीद) की नमाज शाहजमाल स्थित ईदगाह में कोविड-19 की गाइड लाइंस के साथ पढ़ी जाएगी। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने ने कहा कि नमाज के दौरान बनने वाली सफ (पंक्ति) और एक-दूसरे के बीच दूरी भी होगी। कहा कि कोरोना में कारोबार ठप होने से लोगों की माली हालत बिगड़ी है। इसलिए छोटे जानवरों की बजाय बड़े जानवरों की कुर्बानी में वह साझीदार बन रहे हैं।
तीन बार से ईदगाह में नहीं पढ़ी गई नमाज
कोरोना का कहर मार्च-2020 से शुरू हो गया था। इस साल पड़ने वाली ईद व बकरीद की नमाज नहीं पढ़ी जा सकी थी, जबकि मई, 2021 में ईद की नमाज नहीं पढ़ी गई।
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ईद उल अजहा (बकरीद) में छोटे जानवरों की कुर्बानी देने की बजाय बड़े जानवरों की कुर्बानी में ज्यादातर लोग साझीदार बन रहे हैं। वजह, कोरोना काल में कारोबार का कमजोर होना। मार्च-2020 से कोरोना महामारी ने कारोबार पर ऐसा पंजा मारा, उससे कारोबारी अभी तक उबर नहीं सके हैं। इसका असर त्योहारों पर भी पड़ा। त्योहारोें में केवल औपचारिकताएं भर रहीं।
ऐसा ही ईद उल अजहा में भी देखने को मिल रहा है। जिन घरों में तीन दिन तक बकरों की कुर्बानी होती थी, वहां एक बकरे की कुर्बानी होगी। जबकि ज्यादातर लोग बड़े जानवरों की कुर्बानी में दिलचस्पी ले रहे हैं। वह कहते हैं कि जब माली हालत ठीक होगी, तब बकरे की कुर्बानी करेंगे।
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हिस्सा किसे कहते हैं
भैंस या पड्डा (झोटा) की कुर्बानी करने में सात साझीदार होते हैं। इसी को हिस्सा भी कहते हैं। जानवरों की कीमत के हिसाब से सभी साझीदारों को बराबर-बराबर रुपये देने होते हैं। जानवरों को काटने वाले की मेहनताना अलग है।
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जानवरों की कीमतों में अंतर
भैंस जहां करीब 50-60 हजार में रुपये में मिल रही है। वहीं, पड्डा (झोटा) की कीमत 15 हजार से 22 हजार रुपये व्यापारी बता रहे हैं। बकरा, भेड़ की कीमत 6-8 हजार रुपये से शुरू होती है। हालांकि, मोल-भाव में इनकी कीमतों में कमी आ सकती है।
हिस्सा डलवाने के बोल
- इस बार बड़े जानवरों के एक हिस्से की कीमत 2500 रुपये है। बकरीद से तीन-चार दिन पहले आर्डर में तेजी आती है। -मोहम्मद अशफाक
- फिलहाल दो-चार लोग हिस्सा लेने का आर्डर दे चुके हैं। आर्डर में बकरीद के करीब आने के बाद ही तेजी आती है। -इरशाद अली
ईदगाह में होगी ईद उल अजहा की नमाज : शहर मुफ्ती
अलीगढ़। इस बार ईद उल अजहा (बकरीद) की नमाज शाहजमाल स्थित ईदगाह में कोविड-19 की गाइड लाइंस के साथ पढ़ी जाएगी। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने ने कहा कि नमाज के दौरान बनने वाली सफ (पंक्ति) और एक-दूसरे के बीच दूरी भी होगी। कहा कि कोरोना में कारोबार ठप होने से लोगों की माली हालत बिगड़ी है। इसलिए छोटे जानवरों की बजाय बड़े जानवरों की कुर्बानी में वह साझीदार बन रहे हैं।
तीन बार से ईदगाह में नहीं पढ़ी गई नमाज
कोरोना का कहर मार्च-2020 से शुरू हो गया था। इस साल पड़ने वाली ईद व बकरीद की नमाज नहीं पढ़ी जा सकी थी, जबकि मई, 2021 में ईद की नमाज नहीं पढ़ी गई।