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कितने कोरोना मरीज हुए 'आयुष्मान' विभाग अनजान
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पिछले 50 दिनों में जिले में 2478 लोगों ने विभिन्न बीमारियों का उपचार कराकर आयुष्मान योजना का लाभ उठाया है। हैरानी की बात यह है कि लाभार्थियों में कोरोना मरीज शामिल है या नहीं, इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि कोरोना संक्रमित आयुष्मान कार्डधारक उनके पास इलाज के लिए नहीं आए।
जनपद में 2 लाख 33 हजार 329 लोगों के पास आयुष्मान कार्ड है। मार्च-अप्रैल 2021 में कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद जनपद में इलाज के लिए जबरदस्त मारामारी मची थी। सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों को बेड नहीं मिल रहे थे। एंबुलेंस, निजी वाहनों एवं अस्पताल के गेट पर ही लोग दम तोड़ रहे थे। जेब में पैसा होने के बावजूद अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे थे। आयुष्मान भारत के नोडल अधिकारी डॉ. खानचंद ने बताया कि 1 अप्रैल 2021 से 20 मई 2021 तक 2478 लोगों ने आयुष्मान योजना के अंतर्गत उपचार कराया है। इसमें कोरोना मरीज हैं या नहीं, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
आज तक 25902 लोग हुए लाभान्वित
आयुष्मान योजना शुरू होने के बाद से लेकर आज तक जनपद में 25902 लोग लाभान्वित हुए हैं। जनपद में 55 सरकारी एवं प्राइवेट अस्पताल उपचार के लिए सूचीबद्ध हैं।
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कोविड समर्पित हॉस्पिटल बनने के बाद दूसरी बीमारियों का उपचार बंद है। इस दौरान कोई आयुष्मान कार्ड धारक कोरोना के उपचार के लिए आया ही नहीं।
- डॉ. संजीव कुमार, एसजेडी हॉस्पिटल
अप्रैल एवं मई के महीने में कोरोना संक्रमित मरीज उपचार के लिए अस्पताल में नहीं आया। अगर मरीज होंगे तो सरकारी अस्पताल में गए होंगे।
- डॉ. राजेश्वर सिंह, जीवन ज्योति हॉस्पिटल
सरकारी अस्पतालों में भेज दिए जाते हैं मरीज
आयुष्मान योजना के तहत आईसीयू वार्ड के लिए 3600 रुपये और सामान्य वार्ड के लिए 1800 रुपये निर्धारित हैं। जबकि कोरोना मरीजों से प्राइवेट अस्पताल प्रतिदिन अधिकतम 8 से 14 हजार रुपये वसूल रहे हैं। यह दर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित है। प्राइवेट अस्पतालों में 10 दिन भर्ती रहने वाले मरीजों ने आधिकारिक रूप से 1.40 लाख रुपये तक का भुगतान किया है। ऐसे में आयुष्मान कार्ड धारक को प्राइवेट अस्पताल भर्ती करने से बचते हैं। अगर कोई मरीज पहुंच गया तो बेड खाली नहीं है का बहाना बनाकर पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय या जेएन मेडिकल कॉलेज में भेज दिया जाता है। संकट के समय में प्राइवेट अस्पतालों पर आरोप लगते रहे। एक मरीज से अधिक फीस वसूली के आरोप में एक निजी अस्पताल सील किया जा चुका है।
सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क हो रहा उपचार
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय (एल-2), मलखान सिंह जिला अस्पताल (एल-1), मंगलायतन (एल-1) एवं अतरौली स्थित 100 बेड अस्पताल (एल-1) सहित कुछ सीएचसी पर कोरोना से संक्रमित मरीजों का नि:शुल्क उपचार हो रहा है। सरकारी अस्पतालों में जांच एवं दवा से लेकर अन्य स्वास्थ्य सेवाएं नि:शुल्क मिलने के कारण भी लोग सरकारी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं।
-कोरोना मरीजों की स्थिति
- जनपद में अब तक 20703 लोग संक्रमित
- जनपद में अब तक 18924 लोग स्वस्थ
- जनपद में 1883 सक्रिय मरीज
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जनपद में 2 लाख 33 हजार 329 लोगों के पास आयुष्मान कार्ड है। मार्च-अप्रैल 2021 में कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद जनपद में इलाज के लिए जबरदस्त मारामारी मची थी। सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों को बेड नहीं मिल रहे थे। एंबुलेंस, निजी वाहनों एवं अस्पताल के गेट पर ही लोग दम तोड़ रहे थे। जेब में पैसा होने के बावजूद अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे थे। आयुष्मान भारत के नोडल अधिकारी डॉ. खानचंद ने बताया कि 1 अप्रैल 2021 से 20 मई 2021 तक 2478 लोगों ने आयुष्मान योजना के अंतर्गत उपचार कराया है। इसमें कोरोना मरीज हैं या नहीं, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
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आज तक 25902 लोग हुए लाभान्वित
आयुष्मान योजना शुरू होने के बाद से लेकर आज तक जनपद में 25902 लोग लाभान्वित हुए हैं। जनपद में 55 सरकारी एवं प्राइवेट अस्पताल उपचार के लिए सूचीबद्ध हैं।
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कोविड समर्पित हॉस्पिटल बनने के बाद दूसरी बीमारियों का उपचार बंद है। इस दौरान कोई आयुष्मान कार्ड धारक कोरोना के उपचार के लिए आया ही नहीं।
- डॉ. संजीव कुमार, एसजेडी हॉस्पिटल
अप्रैल एवं मई के महीने में कोरोना संक्रमित मरीज उपचार के लिए अस्पताल में नहीं आया। अगर मरीज होंगे तो सरकारी अस्पताल में गए होंगे।
- डॉ. राजेश्वर सिंह, जीवन ज्योति हॉस्पिटल
सरकारी अस्पतालों में भेज दिए जाते हैं मरीज
आयुष्मान योजना के तहत आईसीयू वार्ड के लिए 3600 रुपये और सामान्य वार्ड के लिए 1800 रुपये निर्धारित हैं। जबकि कोरोना मरीजों से प्राइवेट अस्पताल प्रतिदिन अधिकतम 8 से 14 हजार रुपये वसूल रहे हैं। यह दर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित है। प्राइवेट अस्पतालों में 10 दिन भर्ती रहने वाले मरीजों ने आधिकारिक रूप से 1.40 लाख रुपये तक का भुगतान किया है। ऐसे में आयुष्मान कार्ड धारक को प्राइवेट अस्पताल भर्ती करने से बचते हैं। अगर कोई मरीज पहुंच गया तो बेड खाली नहीं है का बहाना बनाकर पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय या जेएन मेडिकल कॉलेज में भेज दिया जाता है। संकट के समय में प्राइवेट अस्पतालों पर आरोप लगते रहे। एक मरीज से अधिक फीस वसूली के आरोप में एक निजी अस्पताल सील किया जा चुका है।
सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क हो रहा उपचार
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय (एल-2), मलखान सिंह जिला अस्पताल (एल-1), मंगलायतन (एल-1) एवं अतरौली स्थित 100 बेड अस्पताल (एल-1) सहित कुछ सीएचसी पर कोरोना से संक्रमित मरीजों का नि:शुल्क उपचार हो रहा है। सरकारी अस्पतालों में जांच एवं दवा से लेकर अन्य स्वास्थ्य सेवाएं नि:शुल्क मिलने के कारण भी लोग सरकारी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं।
-कोरोना मरीजों की स्थिति
- जनपद में अब तक 20703 लोग संक्रमित
- जनपद में अब तक 18924 लोग स्वस्थ
- जनपद में 1883 सक्रिय मरीज